दिल्ली हाईकोर्ट में 7 नए जजों ने ली शपथ, संख्या हुई 50
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने नियुक्ति की अधिसूचना जारी की
दिल्ली उच्च न्यायालय में सात नए न्यायाधीशों ने 21 सितंबर को शपथ ली, जिसके बाद वहां जजों की कुल संख्या 50 हो गई है। ये सभी न्यायाधीश पहले जिला न्यायपालिका में कार्यरत थे और उनकी नियुक्ति से अदालत की न्यायिक क्षमता बढ़ाने की उम्मीद है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के आधार पर इन नियुक्तियों की अधिसूचना जारी की है।
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जागरण संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय में 19 सितंबर को सात नए न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की अधिसूचना केंद्र सरकार ने जारी की। 21 सितंबर को सुबह 10 बजे अदालत परिसर में आयोजित समारोह में सभी नए जजों ने पद की शपथ ली। इससे हाईकोर्ट में जजों की कुल संख्या बढ़कर 50 हो गई है।
नवनियुक्त जजों का परिचय
शपथ ग्रहण समारोह में निवेदिता अनिल शर्मा और निशा सहाय सक्सेना ने न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। संजय शर्मा, भरत पाराशर, अदिति चौधरी, दिनेश भट्ट और अरुण भारद्वाज ने अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की। ये सभी अधिकारी पहले जिला न्यायपालिका में अपनी सेवाएं दे रहे थे। समारोह में हाईकोर्ट के सभी मौजूदा न्यायाधीश भी उपस्थित थे।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने नए जजों को शपथ दिलाई और उन्हें बधाई दी। इन नियुक्तियों से हाईकोर्ट की न्यायिक क्षमता में वृद्धि होगी और लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।
न्यायिक व्यवस्था और इतिहास
दिल्ली उच्च न्यायालय की स्थापना 31 अक्टूबर 1966 को हुई थी। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इन सात न्यायिक अधिकारियों के नाम न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए सुझाए थे। दिल्ली हाईकोर्ट की स्वीकृत जजों की संख्या 60 है, जिनमें अब 50 पद भरे जा चुके हैं।
न्यायिक अधिकारियों की पदोन्नति से ट्रायल कोर्ट और न्यायिक प्रशासनिक अनुभव हाईकोर्ट को मिलेगा, जिससे संस्थान की क्षमता मजबूत होगी। यह कदम न्यायपालिका की कार्यक्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हाल ही में केंद्र सरकार ने देश के चार हाईकोर्टों में 14 नए जजों की नियुक्ति की मंजूरी दी है, जिनमें दिल्ली, कर्नाटक, झारखंड और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट शामिल हैं।
न्यायिक नियुक्तियों का महत्व
नई नियुक्तियों से दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायिक टीम का विस्तार हुआ है। इससे कोर्ट के पेंडिंग मामलों के निपटारे में मदद मिलेगी। न्यायपालिका के इस कदम से न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
इससे न्यायपालिका की विश्वसनीयता और कार्यक्षमता दोनों में सुधार होता है।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार ने इन नियुक्तियों की अधिसूचना जारी की।
केंद्र सरकार, प्रशासन
नवनियुक्त जजों ने संविधान के प्रति अपनी निष्ठा की शपथ ली।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय, दिल्ली उच्च न्यायालय
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- नवनियुक्त न्यायाधीश किससे शपथ ग्रहण समारोह में शपथ ली?
- मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने नए न्यायाधीशों को शपथ दिलाई।
- इन न्यायाधीशों की नियुक्ति से कोर्ट पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
- नियुक्ति से न्यायालय की न्यायिक क्षमता बढ़ेगी और लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।
- नये न्यायाधीशों के पहले कहाँ कार्यरत थे?
- सभी नए न्यायाधीश पहले जिला न्यायपालिका में सेवाएं दे रहे थे।
- दिल्ली हाईकोर्ट में कुल कितने न्यायाधीश भरे जा चुके हैं और स्वीकृत संख्या क्या है?
- दिल्ली हाईकोर्ट में अब तक 50 न्यायाधीश पद भरे गए हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 60 है।
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