बाड़मेर में गोबर से बायोगैस और महोगनी की खेती से ग्रामीणों को नई राह
गोबर से बायोगैस से रसोई में धुएं की समस्या खत्म, महोगनी के पेड़ से आर्थिक लाभ की उम्मीद
बाड़मेर के कई गांवों में गाय के गोबर से बायोगैस संयंत्र लगाए गए हैं, जिससे ग्रामीणों को स्वच्छ ईंधन मिल रहा है और एलपीजी पर निर्भरता कम हुई है। साथ ही, रेगिस्तानी इलाके में महोगनी की खेती शुरू की गई है, जो आर्थिक समृद्धि और हरियाली का स्रोत बन रही है।
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बाड़मेर। बाड़मेर जिले के कई गांवों में गाय के गोबर से बायोगैस संयंत्र लगाए गए हैं, जिससे ग्रामीण परिवारों को खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन मिल रहा है। इससे पारंपरिक चूल्हे के धुएं से होने वाली परेशानी खत्म हो गई है और एलपीजी पर निर्भरता भी कम हुई है।
बाड़मेर के कितनोरिया, धनाऊ, सेड़वा, जानपालिया, बाखासर, चौहटन, आलमसर, धोरीमन्ना सहित दर्जनों कस्बों में गोबर से बायोगैस तैयार करने के संयंत्र लगाए गए हैं। इसमें गोबर को पानी के साथ मिलाकर एक बंद प्लास्टिक टैंक में डाला जाता है, जहां ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में सूक्ष्मजीव इसे विघटित कर मीथेन गैस बनाते हैं। यह गैस पाइप के जरिए रसोई तक पहुंचाई जाती है और खाना पकाने में इस्तेमाल होती है।
जानपालिया की संगीता ने बताया कि पहले लकड़ियों के धुएं से आंखों में जलन होती थी और एलपीजी की बढ़ती कीमतें आर्थिक बोझ थीं, लेकिन अब बायोगैस प्लांट से कम खर्च में खाना बन जाता है। उन्होंने कहा, "इससे आग लगने या सिलेंडर फटने जैसी घटनाएं भी नहीं होती हैं।"
इस देसी तकनीक से न केवल रसोई के लिए वैकल्पिक ईंधन मिला है, बल्कि चूल्हे के धुएं से राहत भी मिली है। इससे ग्रामीण महिलाओं को खाना पकाने में होने वाली परेशानी से निजात मिली है।
साथ ही बाड़मेर के रेगिस्तानी इलाके में महोगनी के पेड़ की खेती भी शुरू हुई है, जिसे किसान 'पैसों वाला पेड़' कहते हैं। यह पेड़ 50 डिग्री तापमान में भी पनपता है और 12 साल में परिपक्व होकर अच्छी कमाई देता है।
मां सती दक्षिणी मंदिर के अध्यक्ष वासुदेव जोशी ने फेसबुक से 200 रुपये में महोगनी का पौधा खरीदा था। उन्होंने बताया कि महोगनी की लकड़ी की कीमत 1500 से 2500 रुपए प्रति घन फुट तक होती है।
महोगनी की लकड़ी मजबूत, सुंदर लाल-भूरी रंग की और पानी प्रतिरोधक होती है, जिसका उपयोग पानी के जहाज, फर्नीचर, सजावटी सामान और संगीत वाद्ययंत्र बनाने में होता है। इसके बीज, पत्ते और छाल का उपयोग कैंसर, मलेरिया, डायबिटीज और दस्त जैसी बीमारियों के इलाज में भी होता है। पत्तों से कीटनाशक, साबुन, पेंट और मच्छर भगाने वाली दवाएं बनाई जाती हैं।
यह खेती बाड़मेर के लिए हरियाली के साथ आर्थिक समृद्धि का जरिया बन रही है। महोगनी के पेड़ से किसानों को लाखों की कमाई की उम्मीद है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- बायोगैस संयंत्र कैसे काम करता है?
- गोबर को पानी के साथ मिलाकर बंद प्लास्टिक टैंक में डाला जाता है, जहां सूक्ष्मजीव ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में इसे विघटित कर मीथेन गैस बनाते हैं। यह गैस पाइप के जरिए रसोई तक पहुंचती है।
- बायोगैस से ग्रामीणों को क्या लाभ हुआ है?
- ग्रामीणों को एलपीजी की महंगी कीमतों से राहत मिली है और पारंपरिक चूल्हों के धुएं से होने वाली आंखों में जलन जैसी परेशानियां खत्म हुई हैं।
- महोगनी के पेड़ की खेती के फायदे क्या हैं?
- यह पेड़ मजबूत और पानी प्रतिरोधक लकड़ी देता है, जिसका उपयोग विभिन्न उत्पादों में होता है, साथ ही इसके बीज, पत्ते और छाल का उपयोग दवाओं और कीटनाशकों में किया जाता है।
- महोगनी की खेती कितने समय में लाभदायक होती है?
- महोगनी का पेड़ लगभग 12 साल में परिपक्व होकर अच्छी कमाई देता है।
- महोगनी की लकड़ी का उपयोग कहां-कहां होता है?
- इस लकड़ी का उपयोग पानी के जहाज, फर्नीचर, सजावटी सामान और संगीत वाद्ययंत्र बनाने में किया जाता है।
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