बीजेपी में सभापति पद को लेकर खींचतान, अजय दावड़ा और संजय मूंदड़ा आमने-सामने
श्रीगंगानगर नगर परिषद में 65 सदस्यों वाली परिषद में बीजेपी के 30 पार्षद हैं, लेकिन सभापति पद पर सहमति नहीं बन पा रही
श्रीगंगानगर नगर परिषद में बीजेपी के सभापति पद को लेकर अजय दावड़ा और संजय मूंदड़ा के बीच खींचतान बढ़ गई है। पार्टी के 30 पार्षद हैं जबकि बहुमत के लिए 33 की जरूरत है, जिससे कांग्रेस और निर्दलीयों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। पार्टी के अंदर इस विवाद के कारण आगामी चुनाव और राजनीतिक समीकरण प्रभावित होने की संभावना है।
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श्रीगंगानगर। श्रीगंगानगर नगर परिषद में बीजेपी के विधायक खेमे की पसंद अजय दावड़ा को सभापति पद का उम्मीदवार घोषित करने के बाद पार्टी के भीतर असहमति बढ़ गई है। संजय मूंदड़ा ने भी नामांकन फार्म भर दिया है, जिससे पार्टी के अंदर खींचतान तेज हो गई है। परिषद में बीजेपी के 30 पार्षद हैं, जबकि बहुमत के लिए 33 की जरूरत है।
बीजेपी के पास 65 सदस्यीय परिषद में 30 पार्षद हैं और बहुमत के लिए तीन और समर्थन की आवश्यकता है। हालांकि, सभापति पद के लिए पार्टी के भीतर सहमति नहीं बन पा रही है। चुनाव परिणाम के बाद डॉ. भरतपाल मय्यर, संजय मूंदड़ा और अजय दावड़ा के नाम सामने आए थे। बुधवार को अजय दावड़ा के नाम की घोषणा के बाद पार्टी में असहमति की चर्चा तेज हो गई।
संजय मूंदड़ा ने बीजेपी से सभापति पद के लिए नामांकन फार्म भर दिया है, जबकि अजय दावड़ा को विधायक जयदीप बिहानी के खेमे की पसंद माना जाता है। बिहानी ने दावड़ा के नामांकन के समय उनका समर्थन किया। दूसरी ओर, बीजेपी नेता अशोक चांडक का समूह भरतपाल मय्यर या संजय मूंदड़ा को उम्मीदवार बनाना चाहता था, लेकिन मय्यर फार्म नहीं भर सके।
इस स्थिति में सभापति पद का चुनाव केवल बहुमत के आंकड़े तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पार्टी के भीतर अलग-अलग नेताओं के प्रभाव और पसंद का सवाल भी बन गया है। संजय मूंदड़ा के निर्दलीय के रूप में मैदान में उतरने की संभावना की चर्चा भी शुरू हो गई है।
चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस के 17 पार्षद हैं और निर्दलीयों के 18, जो अपने दम पर बोर्ड बनाने में सक्षम नहीं हैं। पार्टी के भीतर मतभेद गहराने पर कांग्रेस और निर्दलीयों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। बीजेपी के रणनीतिकार पार्षदों को एकजुट रखने और निर्दलीयों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।
अगले कुछ घंटे श्रीगंगानगर नगर परिषद की राजनीति के लिए अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि यह स्पष्ट नहीं है कि बीजेपी अपने पार्षदों को एकजुट रख पाएगी या पार्टी के भीतर खींचतान नए राजनीतिक समीकरण बनाएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सभापति पद के लिए किन उम्मीदवारों के नाम सामने आए हैं?
- चुनाव परिणाम के बाद डॉ. भरतपाल मय्यर, संजय मूंदड़ा और अजय दावड़ा के नाम चर्चा में हैं.
- कांग्रेस और निर्दलीयों की भूमिका क्या हो सकती है?
- कांग्रेस के 17 और निर्दलीयों के 18 पार्षद हैं, जो समझौते के बिना बोर्ड नहीं बना सकते; इसलिए उनकी भूमिका निर्णायक होगी.
- संजय मूंदड़ा के विकल्पों में क्या संभावनाएं हैं?
- संजय मूंदड़ा के निर्दलीय के रूप में मैदान में उतरने की संभावना पर चर्चा हो रही है.
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