निर्मला सीतारमण भावुक हुईं एमएस सुब्बुलक्ष्मी के गीत सुनकर
कर्नाटक संगीत की दिग्गज गायिका की 110वीं जयंती पर मंत्री ने उनकी साधना और योगदान याद किए
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एमएस सुब्बुलक्ष्मी की 110वीं जयंती पर बेंगलुरु में आयोजित कार्यक्रम में उनकी संगीत प्रस्तुति सुनकर भावुक हो गईं। एमएस सुब्बुलक्ष्मी को 1998 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था और वे कर्नाटक संगीत की पहली महिला संगीतकार थीं। उनकी जीवनगाथा पर आधारित पैन-इंडियन फिल्म ‘एमएस ए लेगेसी ऑन स्क्रीन’ बनाई जा रही है।
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 16 सितंबर को बेंगलुरु में एमएस सुब्बुलक्ष्मी की 110वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भावुक हो गईं। कार्यक्रम में महान गायिका का गीत बजाया गया, जिसे सुनते हुए मंत्री की आंखों में आंसू आ गए।
एमएस सुब्बुलक्ष्मी का जन्म 16 सितंबर 1916 को तमिलनाडु के मदुरै में हुआ था। वह संगीत से जुड़े परिवार में पली-बढ़ीं और बचपन से ही कर्नाटक संगीत की शिक्षा लेने लगी थीं। अपनी कड़ी साधना और असाधारण प्रतिभा के दम पर उन्होंने कम उम्र में संगीत की दुनिया में अलग पहचान बनाई।
20वीं सदी में भारतीय शास्त्रीय संगीत, खासकर कर्नाटक संगीत के क्षेत्र में उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। उनकी आवाज में भक्ति और शास्त्रीय संगीत का ऐसा मेल था, जिसने उन्हें भारत और विश्व में पहचान दिलाई।
निर्मला सीतारमण ने कहा, "कर्नाटक संगीत में भक्ति उसकी जीवंत आत्मा है और अलग-अलग भाषाओं और आध्यात्मिक परंपराओं का सुंदर संगम इस संगीत को खास बनाता है।" उन्होंने एमएस सुब्बुलक्ष्मी की कला और साधना को याद करते हुए कहा कि उनकी प्रतिभा के पीछे कठोर बौद्धिक अनुशासन था।
एमएस सुब्बुलक्ष्मी को 1998 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था, वह यह सम्मान पाने वाली पहली संगीतकार थीं। इससे पहले 1974 में उन्हें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार मिला था। 1966 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्तुति दी, जो भारतीय शास्त्रीय संगीत के लिए महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय क्षण माना जाता है।
उनकी गायकी में भक्ति का विशेष स्थान था और उन्होंने तमिल, संस्कृत और अन्य भारतीय भाषाओं में रचनाएं प्रस्तुत कीं। उनकी आवाज और संगीत भारतीय सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
एमएस सुब्बुलक्ष्मी का निधन 11 दिसंबर 2004 को चेन्नई में हुआ था, लेकिन उनकी रिकॉर्डिंग और प्रस्तुतियां आज भी सुनी जाती हैं। उनकी परपोती एस ऐश्वर्या और एस सौंदर्या ने भी संगीत परंपरा को आगे बढ़ाया है।
अब उनकी जिंदगी और संगीत यात्रा को बड़े पर्दे पर पेश करने की तैयारी है। आगामी पैन-इंडियन बायोपिक ‘एमएस ए लेगेसी ऑन स्क्रीन’ में अभिनेत्री रश्मिका मंदाना उनकी भूमिका निभाएंगी। फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी अनिरुद्ध रविचंदर संभाल रहे हैं।
कार्यक्रम बेंगलुरु के चौडैया मेमोरियल हॉल में आयोजित किया गया था, जहां निर्मला सीतारमण ने गीत सुनते हुए भावुक होकर आंखों में आंसू लिए। वीडियो में वह गीत के साथ गुनगुनाती भी नजर आईं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- एमएस सुब्बुलक्ष्मी को भारत रत्न कब मिला था?
- उन्हें भारत रत्न 1998 में सम्मानित किया गया था, जो उनकी संगीत कला के लिए सर्वोच्च सम्मान था।
- एमएस सुब्बुलक्ष्मी की परपोती कौन हैं और उन्होंने क्या किया है?
- उनकी परपोती एस ऐश्वर्या और एस सौंदर्या ने भी संगीत की परंपरा को आगे बढ़ाया है।
- एमएस सुब्बुलक्ष्मी की संगीत यात्रा पर आधारित फिल्म के बारे में क्या जानकारी है?
- फिल्म का नाम ‘एमएस ए लेगेसी ऑन स्क्रीन’ है, जिसमें अभिनेत्री रश्मिका मंदाना मुख्य भूमिका निभा रही हैं।
- निर्मला सीतारमण ने एमएस सुब्बुलक्ष्मी के संगीत के बारे में क्या कहा है?
- उन्होंने कहा कि कर्नाटक संगीत में भक्ति जीवन की आत्मा है और विभिन्न भाषाओं तथा आध्यात्मिक परंपराओं का सुंदर संगम होता है।
- एमएस सुब्बुलक्ष्मी का भारत और विश्व संगीत में क्या महत्व है?
- उनके संगीत में भक्ति और शास्त्रीय संगीत का मेल था, जिसने उन्हें भारतीय तथा वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।
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