अमेरिकी संसद में रूस प्रतिबंध बिल से भारत पर 100% टैरिफ का रास्ता
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी शुल्क लगाने का प्रस्ताव, राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद लागू होगा
अमेरिकी संसद में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल पास होने के करीब है, जो राष्ट्रपति को भारत जैसे देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देगा। इससे भारत के अमेरिका को निर्यात पर प्रभाव पड़ सकता है और रूसी तेल पर प्रतिबंध बढ़ने से भारत के लिए तेल महंगा हो सकता है।
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अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला एक बिल पास होने के करीब है, जो राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को भारत जैसे देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देगा। यह बिल अमेरिकी सीनेट में पहले ही भारी बहुमत से पारित हो चुका है और अब प्रतिनिधि सभा में अंतिम मतदान के लिए रखा गया है।
यह विधेयक रूस के तेल और गैस व्यापार पर कड़े प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ उन टैंकरों पर भी कार्रवाई का प्रावधान करता है जो मौजूदा प्रतिबंधों से बचकर रूसी तेल की आपूर्ति करते हैं। अमेरिकी सरकार का मानना है कि रूस का कच्चा तेल यूक्रेन युद्ध को वित्तपोषित कर रहा है।
प्रतिनिधि सभा में बिल को 214 के मुकाबले 211 मतों से आगे बढ़ाया गया, जिसमें दो डेमोक्रेट सांसदों ने रिपब्लिकन सांसदों के साथ मतदान किया। हालांकि, विदेश मामलों की समिति के वरिष्ठ सदस्य ग्रेगरी मीक्स ने इस बिल का विरोध किया, क्योंकि इससे राष्ट्रपति को बिना अंकुश के टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा।
बिल के कानून बनने पर राष्ट्रपति ट्रंप को भारत और चीन जैसे देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का कानूनी अधिकार मिलेगा। इससे भारत के निर्यात बिल पर असर पड़ेगा और भारतीय सामान अमेरिका में दोगुना महंगा हो जाएगा। अमेरिकी खरीदार सस्ते विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे भारत के टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स, लेदर, समुद्री उत्पाद और केमिकल्स के ऑर्डर घट सकते हैं।
रूस से तेल पर प्रतिबंध बढ़ने से भारत को महंगा तेल खरीदना पड़ सकता है, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। यह बिल 1996 के ईरान प्रतिबंध कानून को 2031 तक बढ़ाने का भी प्रावधान रखता है।
सीनेट में इस बिल को 86-11 के भारी बहुमत से पारित किया गया था। बिल में रूस के व्यापारिक साझेदार देशों के नाम नहीं लिए गए हैं, लेकिन पांच सबसे बड़े तेल और गैस आयातकों का उल्लेख है। 15 यूरोपीय देशों को 100% टैरिफ से छूट दी गई है क्योंकि वे रूस से 15% से कम गैस खरीदते हैं और अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं।
सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा, "यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं है।" प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया, "भारत अपनी जरूरत, राष्ट्रीय हित और वैश्विक बाजार की कीमतों को देखकर ही रूस से तेल खरीदता है और यह साझेदारी जारी रहेगी।"
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- क्या बिल में रूस के तेल और गैस व्यापार पर रोक के अलावा और भी प्रावधान हैं?
- जी हां, बिल उन टैंकरों पर कार्रवाई करता है जो मौजूदा प्रतिबंधों से बचकर रूसी तेल आपूर्ति करते हैं।
- भारत की तेल खरीद पर इस बिल का क्या असर पड़ेगा?
- बढ़े प्रतिबंधों के कारण भारत को महंगा तेल खरीदना पड़ सकता है, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी।
- क्या सभी देश इस बिल के तहत समान रूप से प्रभावित होंगे?
- नहीं, 15 यूरोपीय देशों को 100% टैरिफ से छूट दी गई है क्योंकि वे रूस से कम गैस आयात करते हैं।
- भारत सरकार ने इस बिल पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
- प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत रूस से तेल खरीद अपनी जरूरत और राष्ट्रीय हित के अनुसार करता रहेगा।
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