नागौर के 1000 साल पुराने गोपीनाथ मंदिर में खंडित मूर्ति की पूजा
भगवान के सपने ने रोक दिया मूर्ति विसर्जन, अनूठी परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी जारी
राजस्थान के नागौर में लगभग 1000 साल पुराने गोपीनाथ मंदिर में भगवान गोपीनाथ की खंडित मूर्ति की पूजा की परंपरा चली आ रही है। मंदिर के पुजारी के अनुसार, मूर्ति को हटाने का प्रयास असफल रहा और इसे परिवार के सदस्य की तरह पूजा जाता है। इस मंदिर में जन्माष्टमी सहित कई त्योहार धूमधाम से मनाए जाते हैं और श्रद्धालु नई और पुरानी दोनों मूर्तियों की पूजा करते हैं।
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नागौर। राजस्थान के नागौर शहर में स्थित भगतावाड़ी का गोपीनाथ मंदिर लगभग 1000 वर्ष पुराना है और श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था का केंद्र है। यहां भगवान गोपीनाथ की खंडित प्रतिमा की पूजा की अनूठी परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है, जो सनातन परंपरा से अलग है।
मंदिर में राधा-कृष्ण के साथ भगवान गोपीनाथ की खंडित प्रतिमा स्थापित है, जिसे हटाने की बजाय उसी रूप में पूजा की जाती है। मंदिर के चौथी पीढ़ी के पुजारी कमल जी ने बताया कि लगभग 40 वर्षों से वे यहां सेवा कर रहे हैं।
पहले नई मूर्तियां लेकर एक व्यापारी मंदिर पहुंचा था ताकि खंडित प्रतिमा को विसर्जित किया जा सके, लेकिन उसी रात भगवान गोपीनाथ ने व्यापारी के सपने में आकर कहा, ‘मैं तो खेलने गया था, अंगूठे पर थोड़ी चोट लग गई तो क्या हुआ।’ इस स्वप्न के बाद पुरानी मूर्ति को हटाने का विचार त्याग दिया गया। तब से उस प्रतिमा की पूजा उसी स्थान पर जारी है।
खंडित मूर्ति की पूजा का भाव कोलकाता के दक्षिणेश्वर मंदिर से जुड़ा है, जहां एक बार जन्माष्टमी के बाद कृष्ण प्रतिमा का पैर टूट गया था। विद्वानों ने विसर्जन की सलाह दी थी, लेकिन स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने कहा था कि परिवार के सदस्य को चोटिल होने पर घर से बाहर नहीं निकाला जाता। इसी भाव से नागौर के मंदिर में भी खंडित मूर्ति को परिवार के सदस्य की तरह पूजा जाता है।
मंदिर में आने वाले श्रद्धालु नई और पुरानी दोनों प्रतिमाओं के दर्शन कर समान श्रद्धा व्यक्त करते हैं। जन्माष्टमी यहां का मुख्य त्योहार है, साथ ही रामनवमी, हरियाली अमावस्या और सावन में झूलोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। सावन के दौरान भगवान गोपीनाथ और राधा-कृष्ण को सुंदर झूले में विराजमान कर विशेष श्रृंगार किया जाता है।
पर्वों के दौरान मंदिर परिसर में दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और इस अनूठी परंपरा के साक्षी बनते हैं। यह मंदिर धार्मिक मान्यताओं से परे जाकर भगवान के प्रति शुद्ध भाव, प्रेम और भक्ति की अनुपम सीख देता है।
यह मामला पिछले 12 दिनों से चर्चा में है, लेकिन अब तक कोई अन्य जानकारी सामने नहीं आई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- खंडित मूर्ति को क्यों नहीं हटाया गया?
- एक व्यापारी ने मूर्ति हटाने की कोशिश की, पर भगवान ने सपने में प्रकट होकर रोक दिया।
- खंडित मूर्ति की पूजा की परंपरा का क्या धार्मिक अर्थ है?
- यह परिवार के सदस्य की चोटिल स्थिति में पूजा करने जैसी मान्यता पर आधारित है।
- मंदिर में और कौन-कौन से त्योहार मनाये जाते हैं?
- रामनवमी, हरियाली अमावस्या और सावन में झूलोत्सव भी धूमधाम से मनाये जाते हैं।
- श्रद्धालु मूर्तियों को कैसे देखते हैं?
- नई और पुरानी दोनों प्रतिमाओं को समान श्रद्धा से पूजा जाता है।
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