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कार इंश्योरेंस क्लेम में न करें ये 10 बड़ी गलतियां

दुर्घटना के बाद क्लेम के लिए जरूरी सावधानियां और गलतियों से बचाव

कार इंश्योरेंस लेते समय लोग थर्ड पार्टी कवर, अपनी कार का बीमा और पॉलिसी रिन्यू कराने पर ध्यान देते हैं। लेकिन दुर्घटना के बाद क्लेम करते समय कई गलतियां पैसे और समय दोनों की बर्बादी कर सकती हैं।
AI सार

कार इंश्योरेंस क्लेम करते समय सही जानकारी देना और जरूरी दस्तावेज़ रखना आवश्यक है, क्योंकि गलत या अधूरी जानकारी से क्लेम खारिज हो सकता है। दुर्घटना के बाद मौके की तस्वीरें लेना, बीमा कंपनी को समय पर सूचना देना और पॉलिसी के कवरेज और ऐड-ऑन की शर्तें समझना क्लेम प्रक्रिया में मदद करता है। इसके अलावा, छोटे नुकसान पर क्लेम करने से नो-क्लेम बोनस खत्म हो सकता है, इसलिए मरम्मत खुद कराना बेहतर हो सकता है।

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कार इंश्योरेंस क्लेम से जुड़ी सावधानियां
कार इंश्योरेंस क्लेम से जुड़ी सावधानियां / प्रतीकात्मक चित्र · निहारिका टाइम्स

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कार इंश्योरेंस लेते समय लोग थर्ड पार्टी कवर, अपनी कार का बीमा और पॉलिसी रिन्यू कराने पर ध्यान देते हैं। लेकिन दुर्घटना के बाद क्लेम करते समय कई गलतियां पैसे और समय दोनों की बर्बादी कर सकती हैं।

कार एक्सीडेंट के बाद मौके की तस्वीरें और वीडियो लेना जरूरी होता है। इससे नुकसान की सही जानकारी मिलती है जो क्लेम के समय काम आती है। पॉलिसी खरीदते समय कार के पिछले क्लेम, नो-क्लेम बोनस, मालिकाना हक, इस्तेमाल और मॉडिफिकेशन की सही जानकारी देना आवश्यक है। गलत या अधूरी जानकारी से क्लेम खारिज हो सकता है।

कार का मालिक बदलने या निजी से कमर्शियल इस्तेमाल में बदलाव होने पर बीमा कंपनी को सूचित करना चाहिए। जीरो डेप्रिसिएशन ऐड-ऑन से कुछ पार्ट्स पर कटौती से राहत मिलती है, जबकि इंजन और टायर प्रोटेक्शन के लिए अलग कवर लेना पड़ता है। छोटे नुकसान पर क्लेम करने से नो-क्लेम बोनस खत्म हो सकता है, इसलिए 8-10 हजार रुपये की मरम्मत खुद कराना फायदेमंद हो सकता है।

पहले से मौजूद नुकसान को नए एक्सीडेंट का बताकर क्लेम करना जोखिम भरा है क्योंकि सर्वेयर पुराने और नए नुकसान में फर्क पहचान लेते हैं। सेकेंड हैंड कार खरीदने पर थर्ड पार्टी इंश्योरेंस ट्रांसफर हो सकता है, लेकिन ओन-डैमेज कवर को नए मालिक के नाम ट्रांसफर कराना जरूरी है। सभी जरूरी दस्तावेज, ओरिजिनल आरसी और चाबियां संभालकर रखें।

सूचना देने में देरी से क्लेम प्रक्रिया मुश्किल हो सकती है। अगर कार को टोटल लॉस घोषित किया जाता है तो क्षतिग्रस्त कार की कुछ कीमत रहती है, जिसे बीमा कंपनी की मदद से या खुद निपटाया जा सकता है। थर्ड पार्टी इंश्योरेंस दूसरे व्यक्ति या संपत्ति को हुए नुकसान की कानूनी देनदारी कवर करता है, जबकि ओन-डैमेज कवर आपकी कार को हुए नुकसान के लिए होता है। पर्सनल एक्सीडेंट कवर मालिक-ड्राइवर को दुर्घटना में आर्थिक सुरक्षा देता है।

पॉलिसी रिन्यू करते समय सिर्फ प्रीमियम और कवरेज देखकर फैसला न करें। कौन-से नुकसान कवर नहीं हैं, कौन-से ऐड-ऑन शामिल हैं, क्लेम के लिए दस्तावेज़ क्या चाहिए और किन परिस्थितियों में क्लेम में कटौती हो सकती है, यह जरूर जांच लें। इससे हादसे के समय खर्च और विवाद से बचा जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बीमा क्लेम के लिए कौन-से दस्तावेज जरूरी हैं?
क्लेम के लिए सभी जरूरी दस्तावेज, ओरिजिनल आरसी और चाबियां संभालकर रखना जरूरी है ताकि प्रक्रिया में सुविधा हो।
नो-क्लेम बोनस कैसे प्रभावित होता है?
छोटे नुकसान पर क्लेम करने से नो-क्लेम बोनस खत्म हो सकता है इसलिए मामूली मरम्मत खुद कराना बेहतर रहता है।
जिरो डेप्रिसिएशन ऐड-ऑन क्या राहत देता है?
यह ऐड-ऑन कुछ पार्ट्स पर कटौती को कम करता है जिससे क्लेम राशि बढ़ जाती है।
टोटल लॉस होने पर क्या होता है?
अगर कार टोटल लॉस घोषित होती है तो उसकी कुछ कीमत बचती है जिसे बीमा कंपनी की मदद से या खुद निपटाना पड़ता है।

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Published15 सितंबर 2026, 01:36 IST IST
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