डीग में 10 साइबर ठग गिरफ्तार, 19 मोबाइल और 3 लग्जरी गाड़ियां जब्त
फेसबुक-इंस्टाग्राम पर मुर्गे बेचने का झांसा देकर ऑनलाइन ठगी का खुलासा
राजस्थान के डीग जिले में पुलिस ने साइबर ठगों के खिलाफ कार्रवाई कर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और 19 मोबाइल फोन तथा 3 लग्जरी गाड़ियां जब्त की हैं। आरोपियों ने सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर मुर्गे बेचने के फर्जी विज्ञापन देकर लोगों को ठगा था। पुलिस जांच कर रही है कि ये आरोप अन्य साइबर ठगी वारदातों और नेटवर्क से जुड़े हैं या नहीं।
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डीग। डीग जिले में साइबर ठगों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन काउंटडाउन के तहत पुलिस ने 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से 19 मोबाइल फोन और तीन लग्जरी गाड़ियां जब्त की गईं। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर उनकी अन्य वारदातों की जानकारी जुटा रही है।
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर मुर्गों के मालिक बनकर सस्ते दाम में अलग-अलग वैरायटी के मुर्गे बेचने की पोस्ट डाली। व्हाट्सएप पर भी फर्जी विज्ञापन प्रसारित कर वे ग्राहकों को अपने जाल में फंसाते थे। जब कोई व्यक्ति मुर्गे खरीदने में रुचि दिखाता था, तो आरोपी उससे सोशल मीडिया और व्हाट्सएप के जरिए बातचीत करते थे। विश्वास में लेने के बाद ऑनलाइन भुगतान करा लिया जाता था और फिर ठगी की जाती थी। इस तरह वे सोशल मीडिया पर सस्ते मुर्गों का लालच देकर लोगों को निशाना बनाते थे।
डीग पुलिस अधीक्षक शरण गोपीनाथ के निर्देश पर बृजनगर थाना पुलिस ने आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की। गिरफ्तार आरोपियों में सपात खान (29), जलाउद्दीन खान (40), सपीक खान (19), फैशन खान (21), रिहान खान (20), नासिर (21), भुट्टु (35), शौकीन (37), रोबिन (32) और अजीज खान (18) शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर आरोपी बृजनगर थाना क्षेत्र के जगडका गांव के रहने वाले हैं।
पुलिस के मुताबिक साइबर ठगी से कमाए गए पैसों से खरीदी गई दो बोलेरो और एक क्रेटा को भी जब्त किया गया है। बरामद मोबाइल फोन और सिम कार्ड की जांच की जा रही है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर उनकी अन्य साइबर ठगी की वारदातों और नेटवर्क से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है। मोबाइल और सिम की जांच में 1930 साइबर पोर्टल पर पांच शिकायतों में 17,198 रुपए के ऑनलाइन फ्रॉड से जुड़े लेन-देन का रिकॉर्ड सामने आया है।
पुलिस को 17 सितंबर को मुखबिर से सूचना मिली कि जाजमका पहाड़ की तलहटी में कुछ युवक ऑनलाइन ठगी कर रहे हैं। सूचना पर कैथवाड़ा थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस को देखते ही सभी भागने लगे, लेकिन टीम ने पीछा कर तीन आरोपियों को पकड़ लिया। पकड़े गए युवकों की पहचान फारुख (38), शकील (32) और वकील (26) के रूप में हुई। तीनों झैझपुरी, थाना कैथवाड़ा के रहने वाले हैं। इनके साथ मिले तीन नाबालिगों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया।
जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी फेसबुक और व्हाट्सऐप आईडी बनाकर लोगों को निशाना बनाते थे। गिरोह के सदस्य लोगों से अश्लील वीडियो कॉल करते और उसकी रिकॉर्डिंग कर लेते थे। इसके बाद वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उनसे पैसे वसूलने की कोशिश की जाती थी। आरोपी अज्ञात लोगों को टेक्स्ट मैसेज भेजकर हर्जा-खर्चा में मदद करने के नाम पर भी धोखाधड़ी करते थे। पुलिस जांच में फर्जी सिम कार्ड और फर्जी बैंक खातों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है।
पुलिस ने बरामद मोबाइल फोन के IMEI नंबर और सिम नंबरों की जांच 1930 साइबर पुलिस पोर्टल पर की। इसके बाद साइबर ठगी से जुड़े वित्तीय लेन-देन और अन्य पहलुओं की जांच शुरू कर दी गई है। कैथवाड़ा थाने में मुकदमा नंबर 163/2026 दर्ज किया गया है। मामले में भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के साथ आईटी एक्ट की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
पुलिस आरोपियों और निरुद्ध किए गए बालकों से पूछताछ कर उनके बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है। साथ ही यह भी जांच कर रही है कि साइबर ठगी से अर्जित रकम से आरोपियों ने कोई संपत्ति बनाई या खरीदी है या नहीं। ऐसी संपत्ति मिलने पर नए कानूनों के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
कार्रवाई में कैथवाड़ा थाना पुलिस के साथ डीएसटी और साइबर सेल की टीम की भूमिका रही। पुलिस टीम में थाना प्रभारी ताराचंद शर्मा, एएसआई हरवीर सिंह सहित पुलिसकर्मी शामिल थे। डीएसटी और साइबर सेल की टीम ने तकनीकी जांच में सहयोग किया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- साइबर ठगों ने अपना अपराध किस तरह अंजाम दिया?
- वे फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप पर फर्जी विज्ञापन डालकर लोगों को ऑनलाइन भुगतान करने पर मजबूर करते थे।
- कैथवाड़ा थाने में पकड़े गए आरोपी कौन हैं?
- फारुख, शकील, वकील और तीन नाबालिग गिरफ्तार किए गए हैं, जो झैझपुरी क्षेत्र से हैं।
- पुलिस ने बरामद सामान की जांच में क्या पाया?
- मोबाइल और सिम कार्ड जांच में 1930 साइबर पोर्टल पर 17,198 रुपये के ऑनलाइन फ्रॉड के लेन-देन का रिकॉर्ड मिला।
- डीग पुलिस ने कार्रवाई में किन टीमों की मदद ली?
- डीएसटी और साइबर सेल की टीमों ने तकनीकी जांच में सहयोग किया।
- अभियुक्तों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस क्या कर रही है?
- पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर उनके बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।
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