21 साल के बिट्टू तबाही ने बदली नदी की तस्वीर
बिना बजट और मशीन के अकेले सफाई शुरू कर नगर पालिका भी साथ आई
मध्य प्रदेश के बीएससी छात्र सुरेंद्र सिंह चौधरी ने अकेले नदी की सफाई शुरू की, जिससे नगर पालिका भी इस काम में शामिल हुई। नगर पालिका ने अब 14.77 करोड़ रुपये की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस पहल ने स्थानीय लोगों और प्रशासन को मिलकर नदी की सफाई के लिए काम करने के लिए प्रेरित किया है।
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मध्य प्रदेश में 21 साल के बीएससी छात्र सुरेंद्र सिंह चौधरी ने एक दिन फावड़ा उठाकर नदी की सफाई शुरू की। बिना किसी बड़े बजट या मशीन के उनकी पहल ने पूरे शहर को प्रेरित किया और नगर पालिका भी सफाई में जुट गई।
सुरेंद्र सिंह चौधरी अक्सर नदी के पास बने मंदिर में जाते थे, जहां उन्होंने देखा कि लोग नदी से आती बदबू और आसपास फैले कचरे से परेशान होकर दूर हट जाते हैं। इसी से उनके मन में नदी की सफाई का विचार आया। उन्होंने इंतजार किए बिना खुद सफाई शुरू कर दी।
बिना जरूरी उपकरण के सफाई आसान नहीं थी। काम के दौरान उन्हें हाथ-पैर में संक्रमण जैसी दिक्कतें हुईं और सांपों का सामना भी करना पड़ा। उनकी मेहनत देखकर ब्यावरा नगर पालिका ने भी सहयोग दिया। अब जेसीबी और पोकलेन मशीनों की मदद से नदी में जमा पुराना कचरा, पॉलीथिन और मलबा हटाया जा रहा है।
नगर पालिका के सब-इंजीनियर रूपेश कुमार नेताम ने बताया कि नदी में पांच बड़े नालों का पानी गिरता है, जो गंदगी और बदबू का कारण है। इसे रोकने के लिए करीब 14.77 करोड़ रुपये की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
सुरेंद्र की कहानी उस सोच की मिसाल है जिसमें एक इंसान की छोटी शुरुआत ने धीरे-धीरे लोगों और नगर पालिका को साथ जोड़ लिया। गणतंत्र दिवस के मौके पर शुरू हुई यह पहल अब लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। नदी के पूरी तरह साफ होने में वक्त लगेगा, लेकिन ‘बिट्टू तबाही’ की मुहिम ने साबित कर दिया कि बड़े बदलाव के लिए एक छोटी पहल काफी होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सुरेंद्र सिंह चौधरी ने नदी की सफाई कैसे शुरू की?
- उन्होंने बिना किसी बड़े बजट या मशीन के केवल एक फावड़ा लेकर सफाई शुरू की।
- नदी की गंदगी और बदबू का मुख्य कारण क्या है?
- नदी में पांच बड़े नालों का पानी गिरना, जो गंदगी और बदबू का कारण है।
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