मिलन प्रधान की गिरफ्तारी से नंदीग्राम चुनाव में सियासी भूचाल
2007 के हत्या मामले में कांग्रेस उम्मीदवार गिरफ्तार, तृणमूल गुट में विवाद
नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 2007 के हत्या मामले में गिरफ्तार किया गया है, जिससे चुनावी मुकाबला और तीखा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच चुनाव चिन्ह और नाम को लेकर विवाद चल रहा है, जिसकी शिकायत पर चुनाव आयोग ने हस्तक्षेप किया है। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
AI-निर्मित सार · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 2007 के पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार किया गया है। यह गिरफ्तारी चुनावी मुकाबले को और तीखा कर गई है, जिसमें तृणमूल कांग्रेस के दो गुट आमने-सामने हैं।
गिरफ्तारी और आरोप
शुक्रवार शाम करीब 5:30 बजे नंदीग्राम के रेयापारा इलाके में चुनाव प्रचार कर रहे मिलन प्रधान को पुलिस ने गिरफ्तार किया। उन पर 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़े चार आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें तीन हत्या के आरोप (आईपीसी धारा 302) शामिल हैं।
पहला मामला 30 अप्रैल 2007 को नंदीग्राम पुलिस स्टेशन में केस नंबर 75/07 के तहत दर्ज किया गया था, जिसमें आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 448, 302, 506 और आर्म्स एक्ट की धारा 27 शामिल हैं। चौथा मामला खेजुरी पुलिस स्टेशन का है, जिसमें 30 जुलाई 2007 को केस नंबर 44/07 दर्ज किया गया था, और आरोप आईपीसी धारा 148/149 तथा आर्म्स एक्ट की धारा 25/35 के तहत हैं।
मिलन प्रधान के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट लंबित थे, जिन्हें चुनाव के दौरान तामील किया गया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
कांग्रेस ने इस गिरफ्तारी को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा, "यह गिरफ्तारी कोई संयोग नहीं है। भाजपा चुनाव लड़ने के बजाय मुकाबला खत्म करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस न तो डरेगी और न झुकेगी।"
नंदीग्राम उपचुनाव पहले से ही बागी गुटों और नए गठबंधनों के बीच सियासी और कानूनी लड़ाई में तब्दील हो चुका है।
इससे पहले ममता बनर्जी के गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद अपना नामांकन वापस ले लिया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन दिया।
तृणमूल कांग्रेस का चुनाव चिन्ह विवाद
चुनाव आयोग ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम और 28 साल पुराने 'जोड़ाफूल' चुनाव चिन्ह को फ्रीज कर दिया है। इसके बाद दोनों धड़ों को नए नाम और प्रतीक चिन्ह आवंटित किए गए हैं।
असम की नागांव लोकसभा सीट पर ममता बनर्जी के गुट वाले उम्मीदवार अब्दुल सलाम की उम्मीदवारी पर भी चुनाव आयोग के फैसले के बाद पर्चा रद्द होने की आशंका है। अब्दुल सलाम ने कहा है कि वे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के निर्देशों का पालन करेंगे और किसी भी कीमत पर नामांकन वापस नहीं लेंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस अंतरिम आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनकी याचिका में चुनाव आयोग के साथ-साथ बागी नेता रितब्रत बनर्जी को भी प्रतिवादी बनाया गया है। संभावना है कि चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच अगले हफ्ते इस मामले पर सुनवाई करेगी।
यह कार्रवाई उनके गुट द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर हुई है
रितब्रत बनर्जी, नेता
नंदीग्राम उपचुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी कोई संयोग नहीं है
गांधी, नेता
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- अब नंदीग्राम उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार कैसे चुने जाएंगे?
- दोनों बागी गुटों को नए नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए गए हैं, जिससे वे चुनाव लड़ सकेंगे।
- ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के आदेश के खिलाफ क्या कार्रवाई की है?
- उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश को चुनौती दी है, जिसमें बागी नेता रितब्रत बनर्जी को भी प्रतिवादी बनाया गया है।
AI-निर्मित · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
50 free articles left today
0 of 50 free reads used today.
पाठकों की पसंद






Comments
0 threadsNo approved comments yet. Start the discussion.