सीकर में दो चरणों में होगा बेरी पशु मेला
लम्पी के बीच प्रशासन ने मेले के आयोजन को दी अनुमति, 27 अक्टूबर से दूसरा चरण
सीकर के शेखावाटी क्षेत्र में प्रसिद्ध बेरी पशु मेला इस बार दो चरणों में आयोजित होगा, पहला 27 सितंबर से शुरू होगा और दूसरा 27 अक्टूबर से 5 नवंबर तक चलेगा। लम्पी बीमारी के बीच प्रशासन ने मेले के आयोजन की अनुमति दी है। मेला पशुओं की खरीद-फरोख्त, नस्ल, कद-काठी और उपयोगिता पर चर्चा का निर्माण स्थान है और ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों में भूमिका निभाता है।
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सीकर। सीकर के शेखावाटी क्षेत्र में प्रसिद्ध बेरी पशु मेला इस बार दो चरणों में आयोजित होगा। लम्पी बीमारी के बीच प्रशासन ने मेले के आयोजन को अनुमति दे दी है। पहला चरण 27 सितंबर से शुरू होगा और दूसरा 27 अक्टूबर से 5 नवंबर तक चलेगा।
बेरी पशु मेला ग्रामीण जीवन और पशुपालन की पुरानी परंपरा से जुड़ा आयोजन है। यहां अलग-अलग क्षेत्रों से पशुपालक अपने पशुओं के साथ पहुंचते हैं। मेले में ऊंट और घोड़ियां खास आकर्षण का केंद्र रहेंगी, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं।
मेला केवल खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पशुओं की नस्ल, कद-काठी और उपयोगिता पर चर्चा भी होती है। पशु प्रतियोगिताओं को देखने दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। इस बार मेले की अवधि छह दिन की कर दी गई है जिससे पशुपालकों और व्यापारियों को अलग-अलग समय पर भाग लेने का अवसर मिलेगा।
बेरी मेले की खास पहचान पशुपालकों का आपसी मेलजोल भी है। अलग-अलग गांवों और इलाकों से आए पशुपालक यहां पशुओं की देखभाल, नस्ल और पालन-पोषण के अनुभव साझा करते हैं। कई लोगों के लिए यह मेला व्यापार के साथ संपर्क बढ़ाने और नए खरीदारों तक पहुंच बनाने का अवसर भी है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन की भूमिका को देखते हुए ऐसे आयोजनों का महत्व है। राजस्थान में पशु मेलों की पुरानी परंपरा रही है। पहले गांव-कस्बों के बड़े मेलों में पशुओं की खरीद-बिक्री प्रमुख गतिविधि होती थी। आधुनिक बाजार व्यवस्था और परिवहन के साधन बढ़ने के बावजूद पारंपरिक मेलों का आकर्षण बना हुआ है।
इस बार दो चरणों में मेले के आयोजन से उम्मीद है कि बड़ी संख्या में पशुपालक और व्यापारी पहुंचेंगे। इससे पशुओं की खरीद-फरोख्त के साथ स्थानीय आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी। मेले में पशुओं की रौनक के साथ राजस्थान के ग्रामीण जीवन की तस्वीर भी नजर आएगी। पशुपालकों के साथ आने वाले परिवार, पशुओं की सजावट, खरीददारों की बातचीत और ऊंट-घोड़ियों की मौजूदगी मेले को खास माहौल देंगे।
सिंह चौहान ने बताया, "इस बार यह मेला दो चरणों में आयोजित होगा."
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- बेरी पशु मेले का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- यह मेला ग्रामीण जीवन और पशुपालन की परंपरा से जुड़ा है, जहाँ नस्ल, कद-काठी और पशुओं की उपयोगिता पर चर्चा होती है।
- मेला केवल खरीद-फरोख्त तक ही सीमित क्यों नहीं है?
- मेला पशु प्रतियोगिताओं और पशुपालकों के बीच अनुभव साझा करने का मौका भी प्रदान करता है।
- पशुपालकों के लिए बेरी मेला कैसे फायदेमंद है?
- यह मेला पशुपालकों को नए खरीदारों से जुड़ने और संपर्क बढ़ाने का अवसर देता है।
- मेला ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्या भूमिका निभाता है?
- मेला स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देता है और पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करता है।
- इस बार मेले का नया क्या होगा?
- इस बार मेले को दो चरणों में आयोजित किया जाएगा जिससे पशुपालकों को अलग-अलग समय भाग लेने का मौका मिलेगा।
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