सभापति चुनाव के लिए भाजपा के दो दावेदार आज नामांकन दाखिल करेंगे
दोपहर 3 बजे तक नामांकन की अंतिम तारीख, कांग्रेस भी चौंकाने वाला चेहरा मैदान में ला सकती है
जैसलमेर नगरपरिषद के सभापति पद के चुनाव के लिए भाजपा के दो दावेदार अरुण पुरोहित और विजय डांगरा आज दोपहर 3 बजे तक नामांकन दाखिल करेंगे। कांग्रेस भी हाईब्रीड सिस्टम के तहत अशोक तंवर और निर्मल डांगरा को मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और जल्द ही दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों का चयन स्पष्ट हो जाएगा।
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जैसलमेर। जैसलमेर नगरपरिषद के सभापति पद के चुनाव को लेकर सियासी सस्पेंस आज खत्म होने की उम्मीद है। भाजपा के दो प्रमुख दावेदार अरुण पुरोहित और विजय डांगरा दोपहर 3 बजे तक नामांकन दाखिल करेंगे। कांग्रेस भी हाईब्रीड सिस्टम के तहत बड़ा खेल खेलने की तैयारी में है।
नगरपरिषद चुनाव में 45 में से 25 वार्ड जीतकर भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। इसके बाद पार्टी में क्रॉस वोटिंग और सियासी सेंधमारी के डर से पार्षदों को अज्ञात ठिकानों और बाड़ेबंदी में रखा गया था। भाजपा के वार्ड 5 से विजयी अरुण पुरोहित और वार्ड 32 से विजयी विजय डांगरा बीती रात बाड़ेबंदी से बाहर निकलकर जैसलमेर पहुंच चुके हैं।
दोनों के शहर पहुंचते ही पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की निगाहें भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर टिकी हैं कि अंतिम समय में किसके नाम पर मुहर लगाई जाएगी। तय समय सीमा दोपहर 3 बजे तक किसी एक या पार्टी के अधिकृत चेहरे द्वारा नामांकन दाखिल किया जाना है।
कांग्रेस की बात करें तो पार्टी आज बड़ा खेल खेलने के मूड में है। कांग्रेस वार्ड 20 से विजयी अशोक तंवर और हाईब्रीड सिस्टम से हारे हुए प्रत्याशी निर्मल डांगरा को मैदान में उतार सकती है। अशोक सिंह तंवर पूर्व नगरपरिषद अध्यक्ष और शहर के सबसे बड़े हजूरी समाज के बड़े चेहरे हैं। वे पूर्व विधायक रूपाराम और कांग्रेस की पहली पसंद भी हैं। निर्मल रैयानी पूर्व पार्षद और ब्राह्मण समाज से आते हैं। हालांकि वे इस बार चुनाव हार चुके हैं, लेकिन हाईब्रीड सिस्टम के जरिए सभापति का चुनाव लड़ सकते हैं।
नामांकन की समय सीमा नजदीक आते ही कलेक्ट्रेट और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अब कुछ ही समय में यह साफ हो जाएगा कि भाजपा और कांग्रेस किस नाम पर अंतिम मुहर लगाकर पर्चा दाखिल करवाएंगी।
हाईब्रीड सिस्टम या मिश्रित प्रणाली के तहत नगर निकायों के प्रमुख पदों का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं होता। इस व्यवस्था में कोई भी योग्य नागरिक, जो वार्ड पार्षद का चुनाव नहीं लड़ा या हार गया हो, सभापति पद का दावेदार बन सकता है। कुर्सी पर बैठने के लिए सदन के निर्वाचित पार्षदों का बहुमत हासिल करना अनिवार्य होता है। इसे हाईब्रीड इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें प्रत्यक्ष चुनाव और परोक्ष चुनाव दोनों का मिला-जुला स्वरूप होता है।
राजनीतिक दलों और रणनीतिकारों के बीच यह सिस्टम चर्चा का विषय रहता है क्योंकि इससे विधानसभा या लोकसभा चुनाव हार चुके बड़े नेता स्थानीय निकायों के जरिए राजनीति में वापसी कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- हाईब्रीड सिस्टम क्या है और कैसे काम करता है?
- हाईब्रीड सिस्टम में नगर निकायों के प्रमुख पद का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं होता बल्कि सदस्य पार्षदों के बहुमत से चुना जाता है। यह प्रत्यक्ष और परोक्ष चुनाव का मिश्रित रूप है।
- कांग्रेस के कौन-कौन से उम्मीदवार सभापति पद के लिए संभावित हैं?
- कांग्रेस वार्ड 20 से अशोक तंवर और हाईब्रीड सिस्टम के तहत हार चुके प्रत्याशी निर्मल डांगरा को मैदान में उतार सकती है।
- भाजपा पार्षदों को आखिर为何 अज्ञात ठिकानों पर रखा गया?
- क्रॉस वोटिंग और सियासी सेंधमारी के डर से भाजपा के पार्षदों को बाड़ेबंदी में रखा गया था ताकि उनका प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।
- अशोक तंवर के बारे में क्या विशेष है?
- अशोक तंवर पूर्व नगरपरिषद अध्यक्ष हैं और हजूरी समाज के बड़े नेता माने जाते हैं, जो कांग्रेस की पहली पसंद भी हैं।
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