पाली में कांग्रेस ने मेयर चुनाव में भाजपा को हराया
कांग्रेस को 42 सीटों का समर्थन, भाजपा के 27 पार्षदों के साथ 3 वोट मिले
पाली नगर निगम के मेयर चुनाव में कांग्रेस के अनिल कल्ला ने भाजपा के डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत को हराया। कांग्रेस को 42 पार्षदों का समर्थन मिला, जबकि भाजपा को केवल 30 वोट मिले। भाजपा के अंदर टिकट वितरण और अंतर्कलह के कारण पार्टी कमजोर रही।
AI-निर्मित सार · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
पाली। पाली नगर निगम के मेयर चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अनिल कल्ला ने भाजपा के डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत को करारी शिकस्त दी। कांग्रेस को 80 में से 42 पार्षदों का समर्थन मिला, जबकि भाजपा को अपने 27 पार्षदों के अलावा केवल 3 वोट मिले।
सोमवार को हुए मेयर चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को पीछे छोड़ दिया। कांग्रेस के 42 पार्षदों ने एकजुट होकर अनिल कल्ला को वोट दिया, जबकि भाजपा को अपने 27 पार्षदों के अलावा केवल 3 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन मिला। भाजपा के खेमे में टिकट वितरण में असंतोष और अंतर्कलह ने पार्टी को कमजोर किया।
भाजपा ने निर्दलीयों और कांग्रेस पार्षदों को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन कांग्रेस ने अपनी बाड़ेबंदी मजबूत रखी। कांग्रेस के पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. बीडी कल्ला के भतीजे अनिल कल्ला को पूरी छूट देकर पार्टी ने मनोबल बढ़ाया।
चुनाव से पहले भाजपा 51 से अधिक वोट का दावा कर रही थी, लेकिन अंत में कांग्रेस की एकजुटता ने बाजी पलट दी। दोनों दलों के रणनीतिकार देर रात तक क्रॉस वोटिंग करने वाले पार्षदों की पहचान करने में लगे रहे।
व्यापारियों और होटल कारोबारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई ने समीकरण बदल दिए। कांग्रेस पार्षदों को नोटिस मिलने के बाद पार्टी एकजुट हो गई। भाजपा के 27 पार्षदों के अलावा 10 निर्दलीय और एक रालोपा पार्षद थे, लेकिन भाजपा को समर्थन कम मिला।
पाली नगर निगम बनने के बाद पहली बार हुए चुनाव में भाजपा की नमिता बुबकिया पहली निर्वाचित महापौर बनी थीं, लेकिन इस बार कांग्रेस ने स्पष्ट जनादेश हासिल किया। भाजपा को अपने 21 पार्षदों के साथ बहुमत के लिए 12 और वोट चाहिए थे।
कांग्रेस की जीत में सही उम्मीदवार चयन और पार्टी की बाड़ेबंदी निर्णायक रही। भाजपा के अंदर टिकट वितरण से पहले ही अंतर्विरोध खुलकर सामने आ गए थे, जो हार का बड़ा कारण बने।
चुनाव के दौरान बीकानेर में मुख्यमंत्री का रोड शो हुआ, लेकिन भाजपा नेतृत्व ने प्रत्याशी के दावों पर भरोसा किया। कांग्रेस खेमे में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पीसीसी चीफ डोटासरा ने पार्षदों से संपर्क साधा।
राजनीतिक गलियारों में भाजपा खेमे में मंथन और कांग्रेस में जश्न का माहौल है। इस चुनाव परिणाम ने सट्टा बाजार के तमाम अनुमानों को ध्वस्त कर दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- चुनाव में कांग्रेस ने कैसे अपनी एकजुटता कायम रखी?
- कांग्रेस ने पुराने कैबिनेट मंत्री डॉ. बीडी कल्ला के भतीजे अनिल कल्ला को पूरी छूट देकर मनोबल बढ़ाया।
- निर्दलीय और अन्य पार्टियों का समर्थन कितना था?
- भाजपा को 27 पार्षदों के अलावा 3 निर्दलीय और एक रालोपा पार्षद का समर्थन मिला।
- चुनाव परिणाम पर भाजपा और कांग्रेस दोनों के नेताओं ने क्या रणनीति अपनाई?
- भाजपा ने क्रॉस वोटिंग रोकने के लिए प्रयास किया, जबकि कांग्रेस के अशोक गहलोत और पीसीसी चीफ डोटासरा ने पार्षदों से संपर्क कायम रखा।
- पाली नगर निगम के मेयर चुनाव में पिछली बार क्या परिणाम था?
- पहली बार मेयर पद भाजपा की नमिता बुबकिया ने जीता था, लेकिन इस बार कांग्रेस ने स्पष्ट जनादेश प्राप्त किया।
AI-निर्मित · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
50 free articles left today
0 of 50 free reads used today.
पाठकों की पसंद





Comments
0 threadsNo approved comments yet. Start the discussion.