कांग्रेस को झुंझुनूं नगर परिषद में बहुमत के लिए एक पार्षद का समर्थन चाहिए
सभापति पद के लिए कांग्रेस के अब्दुल्ला और भाजपा के मनु धनकड़ ने आवेदन दिया है
झुंझुनूह नगर परिषद के 60 वार्डों में कांग्रेस ने 30 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है और बहुमत के लिए उसे एक पार्षद के समर्थन की आवश्यकता है। कांग्रेस के अब्दुल्ला गुलाम नबी अगवान और भाजपा के मनु धनकड़ सभापति पद के लिए उम्मीदवार हैं, जिसमें कांग्रेस को कई निर्दलीय पार्षदों का समर्थन प्राप्त होने की संभावना है। बहुमत के लिए भाजपा को 16 पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा।
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झुंझुनूं। झुंझुनूं नगर परिषद के 60 वार्डों के चुनाव में कांग्रेस 30 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। बहुमत के लिए उसे केवल एक पार्षद के समर्थन की जरूरत है। सभापति पद के लिए कांग्रेस के अब्दुल्ला गुलाम नबी अगवान और भाजपा के मनु धनकड़ ने आवेदन दाखिल किए हैं।
कांग्रेस के अब्दुल्ला गुलाम नबी अगवान वार्ड 41 से दूसरी बार पार्षद चुने गए हैं। 2026 के चुनाव में उन्होंने 1,003 वोट हासिल कर निर्दलीय प्रत्याशी अबरार अहमद को 734 वोट से हराया। उनका चुनावी प्रदर्शन और लगातार दो बार कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज करना उनकी सभापति पद की दावेदारी की सबसे बड़ी ताकत है।
अब्दुल्ला का राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू नहीं हुआ था। 2014 में वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े थे, लेकिन जीत नहीं मिली। 2019 में कांग्रेस ने मौजूदा पार्षद इकबाल जाजोदिया का टिकट बदलकर उन्हें प्रत्याशी बनाया, तब उन्होंने जीतकर पार्टी का भरोसा कायम किया। 2026 में भी कांग्रेस ने उन्हें वार्ड 41 से टिकट दिया, जिसमें उन्होंने बड़ी जीत हासिल की। उनकी पत्नी शबाना अगवान को वार्ड 53 से कांग्रेस ने टिकट दिया था, लेकिन वे चुनाव जीत नहीं सकीं। पति-पत्नी दोनों को टिकट मिलने से स्थानीय स्तर पर अब्दुल्ला के राजनीतिक प्रभाव की चर्चा हुई। वे स्थानीय कांग्रेस की राजनीति में सांसद बृजेन्द्र ओला के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं।
भाजपा की ओर से वार्ड 49 से निर्वाचित मनु धनकड़ पहली बार नगर परिषद का चुनाव लड़े और सीधे सभापति पद के लिए मैदान में हैं। वे पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और झुंझुनूं विधायक राजेंद्र भांबू के दामाद हैं। चुनाव में उन्होंने 651 वोट हासिल कर निर्दलीय प्रत्याशी डॉ. कमलचंद सैनी को 400 वोट के अंतर से हराया। भाजपा ने उन्हें सभापति पद के लिए उतारकर मुकाबला औपचारिक रूप से दोतरफा बना दिया है।
नगर परिषद के कुल 60 वार्डों में कांग्रेस के 30 पार्षद हैं। बहुमत के लिए कांग्रेस को अपने 30 पार्षदों के अलावा केवल एक और पार्षद का समर्थन चाहिए। निर्दलीय पार्षद वीरेंद्र डारा अब्दुल्ला अगवान के प्रस्तावक बने हैं। इसके अलावा कई निर्दलीय पार्षदों के कांग्रेस के साथ होने का दावा किया जा रहा है। भाजपा को बोर्ड गठन के लिए 16 पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा।
चुनाव से पहले ही वीरेंद्र डारा का नाम कांग्रेस के साथ जुड़ने की चर्चा में था। सभापति पद के आवेदन में प्रस्तावक बनने से उनके रुख को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हुई है। यदि यह समर्थन कायम रहता है तो कांग्रेस के पास बहुमत से अधिक संख्या हो सकती है। हालांकि अंतिम तस्वीर सभापति पद के चुनाव में पार्षदों के मतदान और आधिकारिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- अब्दुल्ला गुलाम नबी अगवान का राजनीतिक इतिहास क्या है?
- अब्दुल्ला ने 2014 में निर्दलीय चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए थे, बाद में 2019 से कांग्रेस के टिकट पर दो बार जीत हासिल की है।
- मनु धनकड़ की पृष्ठभूमि क्या है?
- मनु धनकड़ पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और वे झुंझुनूं विधायक राजेंद्र भांबू के दामाद हैं।
- सभापति पद के चुनाव की प्रक्रिया क्या है?
- सभापति का चुनाव पार्षदों के मतदान और आधिकारिक प्रक्रिया से तय होगा, अंतिम परिणाम तभी स्पष्ट होगा।
- कांग्रेस के समर्थन वाले अन्य निर्दलीय पार्षदों के बारे में क्या जानकारी है?
- कुछ अन्य निर्दलीय पार्षदों के कांग्रेस के साथ होने का दावा किया जा रहा है, जो पार्टी की ताकत बढ़ा सकते हैं।
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