दयालपुरा में 21 सितंबर को बाबा रामदेव मेला और भजन संध्या
ग्रामवासियों के सहयोग से मंदिर परिसर में तैयारियां पूरी, सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे
दयालपुरा में 21 सितंबर को बाबा रामदेव मंदिर परिसर में मेला और भजन संध्या का आयोजन होगा जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य और भक्ति प्रस्तुति शामिल हैं। जिला प्रशासन और सेवा समिति सुरक्षा, सफाई और व्यवस्था पर ध्यान देंगे, और आसपास के गांवों से श्रद्धालु व दर्शक बड़ी संख्या में मौजूद रहेंगे।
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डीडवाना। दयालपुरा में हर साल की तरह इस बार भी बाबा रामदेव मंदिर परिसर में विशाल मेला और भजन संध्या का आयोजन 21 सितंबर को होगा। सेवा समिति के कार्यकर्ता और ग्रामीण सजावट, रोशनी, मंच और पंडाल की तैयारियों में लगे हुए हैं।
गोगामेड़ी मेले में जिला प्रशासन, देवस्थान विभाग और पर्यटन विभाग ने मिलकर दो दिवसीय सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसका शनिवार रात को समापन हुआ। मेला मजिस्ट्रेट और उपखंड मजिस्ट्रेट सुनीता यादव, देवस्थान विभाग के सहायक आयुक्त गौरव सोनी और जिला पर्यटन अधिकारी पवन शर्मा ने दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की।
राजस्थान के प्रसिद्ध कलाकारों ने राजस्थानी नृत्य, घूमर, भवई नृत्य, कालबेलिया नृत्य और पंजाबी नृत्य प्रस्तुत किए, जिनसे श्रद्धालुओं का खूब मनोरंजन हुआ। कार्यक्रम का संचालन अध्यापक शिवराज सिंह ने किया।
दयालपुरा के मेले में सिंगर टीकम नागौरी और सोनू अपनी प्रस्तुति देंगे। डांसर खुशबू नागौरी, कविता, विक्की मरवाड़ी, विक्की और रवि मारवाड़ी अपने नृत्य से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। झांकी आर्टिस्ट ओम मारवाड़ी खास झांकी दिखाएंगे, जबकि जादूगर कमल सम्राट अपने जादू से दर्शकों को खुश करेंगे।
भजन संध्या में श्रद्धालु बाबा रामदेव की भक्ति में डूबे नजर आएंगे। ग्रामीण हर साल इस आयोजन को करते हैं, जिसमें आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक आते हैं। मेले में बच्चों, युवाओं और महिलाओं के लिए मनोरंजन के साथ दुकानें, झूले और खाने-पीने के स्टॉल भी होंगे।
सेवा समिति ने सभी ग्रामीणों से सहयोग की अपील की है। प्रशासन और ग्रामीण सुरक्षा, सफाई और ट्रैफिक व्यवस्था को ठीक रखने में लगे हैं। 21 सितंबर को सुबह से देर रात तक चलने वाले इस आयोजन में बाबा रामदेव के दर्शन करने और मेले का आनंद लेने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।
आयोजकों ने बताया कि यह मेला पारंपरिक आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- गोगामेड़ी मेला कब और कैसे संपन्न हुआ?
- यह मेला दो दिवसीय सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम के साथ हुआ, जिसका शनिवार रात समापन हुआ।
- मेले में कौन-कौन से नृत्य प्रस्तुत किए जाते हैं?
- राजस्थानी नृत्य, घूमर, भवई नृत्य, कालबेलिया और पंजाबी नृत्य प्रस्तुत किए जाते हैं।
- मेले की सुरक्षा और व्यवस्था कौन करता है?
- प्रशासन और ग्रामीण मिलकर सुरक्षा, सफाई और ट्रैफिक व्यवस्था को ठीक रखते हैं।
- मेले का सांस्कृतिक महत्व क्या है?
- मेले को पारंपरिक आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक माना जाता है।
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