DU छात्र संघ चुनाव में हॉस्टल और सुरक्षा प्रमुख मुद्दे
सत्य निकेतन हादसे के बाद पहली बार हो रहे छात्र संघ चुनाव में छात्राओं की सुरक्षा और हॉस्टल की कमी पर जोर
दिल्ली विश्वविद्यालय में 16 सितंबर को छात्र संघ चुनाव हुए, जिनमें हॉस्टल की कमी और छात्राओं की सुरक्षा प्रमुख मुद्दे रहे। कई छात्रों ने निजी पीजी के बढ़ते किराए और सुरक्षा के खतरे पर चिंता जताई, जबकि चुनाव प्रचार में बाहरी लोगों की मौजूदगी को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया गया।
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नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र संघ के चुनाव 16 सितंबर को संपन्न हुए। ये चुनाव जंतर मंतर पर हुए बड़े प्रोटेस्ट के बाद पहली बार हो रहे हैं, जिसमें हॉस्टल की कमी और छात्राओं की सुरक्षा प्रमुख मुद्दे रहे। छात्र और उम्मीदवार दोनों ने इन समस्याओं पर चिंता जताई।
छात्र संघ चुनाव के दौरान साउथ और नॉर्थ कैंपस के बीच लगभग 15 किमी की दूरी है। विश्वविद्यालय में कुल 91 कॉलेज हैं, लेकिन केवल 52 कॉलेज और फैकल्टी ही सीधे वोटिंग में हिस्सा लेते हैं। सेंट स्टीफंस, लेडी श्री राम और जीसस एंड मैरी जैसे बड़े कॉलेज इस चुनाव का हिस्सा नहीं हैं।
छात्रों ने हॉस्टल की कमी को सबसे बड़ा मुद्दा बताया है। कई छात्र निजी पीजी पर निर्भर हैं, जहां उन्हें 12 से 14 हजार रुपए प्रति माह किराया देना पड़ता है। श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के छात्र वैष्णव सेठ ने बताया कि विजय नगर जैसे इलाकों में डबल शेयरिंग कमरे का किराया 30 हजार रुपए है, इसके अलावा बिजली का बिल भी देना पड़ता है।
PGDAV कॉलेज की छात्रा अनन्या ने महिला सुरक्षा को बड़ा मुद्दा बताया, जबकि उनकी क्लासमेट हर्षिता चौधरी ने साफ-सफाई की समस्या उठाई। हिमांशी ने पढ़ाई में हो रहे व्यवधान और सत्य निकेतन हॉस्टल हादसे को लेकर छात्रों के एकजुट होने की जरूरत बताई। शहीद भगत सिंह कॉलेज के छात्र चिन्मय सिंह ने चुनाव प्रचार के शोर-शराबे को क्लास में दिक्कत का कारण बताया।
छात्र आलोक ने कहा कि पीजी हादसों को देखकर विश्वविद्यालय को मुआवजा देना चाहिए या अपने मान्यता प्राप्त हॉस्टल बनाने चाहिए। संजय ने फैकल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार की मांग की। सभी ने माना कि चुनाव में मुद्दे उठाए जाते हैं, लेकिन उन पर काम नहीं होता।
छात्रों ने बताया कि चुनाव प्रचार में बाहरी लोगों की उपस्थिति से असहजता होती है, खासकर छात्राएं इससे नाखुश हैं। प्रचार के तरीके में बदलाव की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
विश्वविद्यालय की फीस 30 से 40 हजार रुपए होती है, लेकिन पीजी का खर्च शिक्षा को महंगा बना रहा है। छात्रावास की कमी और सुरक्षा की चिंता के बीच ये चुनाव छात्र समुदाय के लिए अहम साबित हुआ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- साफ-सफाई और पढ़ाई के मुद्दों पर क्या प्रतिक्रिया रही?
- छात्रों ने साफ-सफाई की समस्या और पढ़ाई में हो रहे व्यवधान को लेकर भी चिंता जताई है।
- छात्र सुरक्षा को लेकर कौन-कौन सी चिंताएं हैं?
- महिला सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया और हॉस्टल हादसों को लेकर मुआवजे या मान्यता प्राप्त हॉस्टल की मांग उठाई गई।
- कौन से प्रमुख कॉलेज इस चुनाव का हिस्सा नहीं थे?
- सेंट स्टीफंस, लेडी श्री राम और जीसस एंड मैरी जैसे बड़े कॉलेज चुनाव में शामिल नहीं थे।
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