सरकार ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड का पुनर्गठन किया
18 सदस्यों के नए बोर्ड में फिल्म, संगीत और कला जगत के प्रमुख नाम शामिल
केंद्र सरकार ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) का तीन साल के कार्यकाल के लिए पुनर्गठन किया है, जिसमें फिल्म, संगीत, कला और मनोरंजन क्षेत्र के 18 सदस्य शामिल हैं। नया बोर्ड सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 और संबंधित नियमों के तहत बनाया गया है, जो फिल्मों के सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए प्रमाणन करता है।
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केंद्र सरकार ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) का पुनर्गठन किया है। नए बोर्ड में कुल 18 सदस्य शामिल किए गए हैं, जिनमें फिल्म, संगीत, कला और मनोरंजन जगत के कई प्रमुख नाम हैं। यह बोर्ड तीन साल के कार्यकाल के लिए गठित किया गया है।
सरकार ने यह फैसला सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 की धारा 3 की उप-धारा (1) और सिनेमैटोग्राफ (प्रमाणन) नियमावली, 2024 के नियम 3 के तहत लिया है। सीबीएफसी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन काम करती है और फिल्मों के सार्वजनिक प्रदर्शन को विनियमित करती है। भारत में किसी फिल्म को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने से पहले उसका सीबीएफसी से प्रमाणित होना अनिवार्य है।
पुनर्गठित बोर्ड में फिल्म, संगीत, कला, साहित्य और मनोरंजन जगत से जुड़े 18 सदस्यों को शामिल किया गया है। इनमें अभिनेता मनोज जोशी, प्रियदर्शन, सुनील शेट्टी, प्रीति जिंटा, पंकज त्रिपाठी और प्रोसेनजीत चटर्जी जैसे नाम प्रमुख हैं। इसके अलावा संगीतकार रिकी केज, सांसद हंसराज हंस, रूपाली गांगुली, पल्लवी जोशी और निशिगंधा वाड भी बोर्ड के सदस्य हैं।
पिछली बार अगस्त 2017 में तीन साल के कार्यकाल के लिए सीबीएफसी का पुनर्गठन किया गया था, लेकिन नए बोर्ड के गठन न होने के कारण पुराने सदस्य 2020 के बाद भी पद पर बने रहे। यह प्रावधान सदस्यों को उनके उत्तराधिकारियों की नियुक्ति तक पद पर बने रहने की अनुमति देता है।
सीबीएफसी का मुख्य उद्देश्य फिल्मों को सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए प्रमाणित करना है, न कि उन पर प्रतिबंध लगाना। बोर्ड फिल्म में मौजूद हिंसा, अश्लीलता, आपत्तिजनक भाषा और संवेदनशील सामाजिक या धार्मिक संदर्भों पर विचार करता है और जरूरत पड़ने पर कट सुझा सकता है।
बोर्ड में एक चेयरमैन और गैर-सरकारी सदस्य होते हैं, जिनकी नियुक्ति केंद्र सरकार करती है। यदि किसी फिल्म निर्माता को बोर्ड के फैसले से असहमति होती है तो वह कानूनी और अपीलीय प्रक्रिया का सहारा ले सकता है।
सरकार ने नए बोर्ड का कार्यकाल तीन साल या अगले आदेश तक रहने का निर्णय लिया है। यह पुनर्गठन भारतीय सिनेमा और टेलीविजन जगत के दिग्गज कलाकारों को शामिल कर बनाया गया है, जिससे प्रमाणन प्रक्रिया में विविधता और विशेषज्ञता बढ़ेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सीबीएफसी किस कानून के तहत पुनर्गठित किया गया है?
- सीबीएफसी का पुनर्गठन सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 की धारा 3(1) और सिनेमैटोग्राफ (प्रमाणन) नियमावली, 2024 के तहत किया गया है।
- सीबीएफसी का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- सीबीएफसी का मुख्य उद्देश्य फिल्मों को प्रमाणित करना है, ताकि उनकी सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए उपयुक्तता सुनिश्चित हो सके, न कि उन पर प्रतिबंध लगाना।
- सीबीएफसी में असहमति होने पर फिल्म निर्माता क्या कर सकते हैं?
- यदि फिल्म निर्माता बोर्ड के फैसले से असहमत हो तो वे कानूनी और अपीलीय प्रक्रिया का सहारा ले सकते हैं।
- नए बोर्ड में किन क्षेत्रों के सदस्य शामिल हैं?
- बोर्ड में फिल्म, संगीत, कला, साहित्य और मनोरंजन जगत के दिग्गज सदस्य शामिल किए गए हैं।
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