रामदेवरा में हरिराम बाबा का विशाल मेला लगा, श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी
दूर-दराज से आए भक्तों ने बाबा के दरबार में मत्था टेका, भजन संध्या में जयकारे गूंजे
रामदेवरा के फिरवासी गांव में 16 सितंबर को हरिराम बाबा का मेला पारंपरिक तरीके से आयोजित किया गया, जिसमें दूर-दराज से श्रद्धालु मौजूद रहे। मेले के दौरान पूजा-अर्चना, भजन संध्या और पदयात्राएं हुईं, जिसमें राजस्थान के साथ पंजाब और हरियाणा से भी लोग शामिल हुए। श्रद्धालुओं के लिए भंडारे, सेवा शिविर और सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।
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रामदेवरा। रामदेवरा के फिरवासी गांव में 16 सितंबर को हरिराम बाबा का विशाल मेला परंपरागत तरीके से लगा। ग्राम वासियों और सेवा समिति ने मिलकर आयोजन किया, जिसमें दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में मत्था टेका और मन्नतें मांगीं।
मेला स्थल पर सुबह से भक्तिमय माहौल था। मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना, जोत जलाई गई और आरती हुई। आसपास के गांवों और शहरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मेला स्थल पर दुकानें, झूले, मिठाई और प्रसाद की दुकानें सजी थीं।
भजन संध्या में सिंगर सोनम गुजरी एंड पार्टी ने एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति दी। जय बाबा हरिराम के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। ग्रामीणों, युवाओं और महिलाओं ने मिलकर व्यवस्था संभाली। सुरक्षा, पीने के पानी, इलाज और भीड़ को संभालने के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
भक्तों के लिए भंडारे और प्रसाद बांटने की व्यवस्था भी थी। देर रात तक चली भजन संध्या के बाद आरती हुई और प्रसाद वितरित किया गया।
रामदेवरा में भादवा मेले के दौरान श्रद्धालुओं का आगमन लगातार तेज हो गया है। दूर-दराज के क्षेत्रों से पदयात्री रामदेवरा पहुंच रहे हैं। बीकानेर, बाप वाया सिहड़ा होते हुए मुख्य सड़क पर पदयात्रियों के जत्थे नजर आ रहे हैं।
श्रद्धालु सिर पर बाबा रामदेव की विशाल ध्वजा लेकर चल रहे हैं, तो कई कपड़े से बने विशाल घोड़े लेकर बाबा की समाधि के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। हजारों की संख्या में पदयात्रियों के आवागमन से पूरा मार्ग भक्तिमय हो गया है।
पदयात्री समूहों में बाबा रामदेव के भजन गाते और जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे हैं। जैसे-जैसे रामदेवरा की दूरी घट रही है, श्रद्धालुओं का उत्साह भी बढ़ता दिखाई दे रहा है। सिहड़ा लिंक रोड पर कई श्रद्धालु कठिन कनक दंडवत यात्रा करते हुए रामदेवरा की ओर बढ़ रहे हैं।
वे सड़क पर दंडवत प्रणाम करते हुए कुछ दूरी तय करते हैं और फिर उठकर दोबारा यही प्रक्रिया दोहराते हैं। कठिन यात्रा के बावजूद श्रद्धालुओं के चेहरों पर आस्था व उत्साह साफ झलक रहा है।
पदयात्रियों की सेवा के लिए सड़क के किनारे जगह-जगह भंडारे और सेवा शिविर लगाए गए हैं। शिविरों में भोजन, पानी, विश्राम व प्राथमिक उपचार की व्यवस्था है। कई पदयात्री कुछ देर रुककर अपनी यात्रा आगे बढ़ाते हैं।
राजस्थान के विभिन्न जिलों के साथ पंजाब और हरियाणा से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामदेवरा पहुंच रहे हैं। श्रीगंगानगर और बीकानेर क्षेत्र से पैदल आने वाले श्रद्धालुओं के अलावा कई लोग वाहनों से भी आ रहे हैं।
पदयात्रियों के लगातार बढ़ते आवागमन से प्रमुख सड़क मार्गों पर दिनभर भीड़ बनी हुई है। ये जत्थे मेले की आस्था व परंपरा का जीवंत स्वरूप प्रस्तुत कर रहे हैं।
देशभर से रामदेवरा पहुंच रहे दर्शनार्थी सबसे पहले पवित्र रामसरोवर तालाब में स्नान कर पुण्य अर्जित कर रहे हैं। रामसरोवर के विभिन्न घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखी जा रही है।
कोई स्नान के बाद पूजा-अर्चना करता दिख रहा है तो कोई घाट पर बैठकर रामदेव के भजन गा रहा है। स्नान के उपरांत श्रद्धालु जयकारे लगाते हुए समाधि मंदिर की ओर बढ़ रहे हैं। पूरे रामदेवरा में ‘रामदेव की जय’ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- हरिराम बाबा मेले में कौन-कौन सी व्यवस्थाएं की गईं?
- मेला में सुरक्षा, पीने के पानी, इलाज, भीड़ नियंत्रण, भंडारे और प्रसाद वितरण की पुख्ता व्यवस्था थी।
- पदयात्रियों ने यात्रा में किस तरह की परंपराएं निभाईं?
- कई पदयात्री कनक दंडवत करते हुए रामदेवरा की ओर बढ़े और जयकारे लगाते हुए भजन गाते रहे।
- रामसरोवर तालाब का मेला में क्या महत्व है?
- पर्यटक और श्रद्धालु पहले भक्तिपूर्वक स्नान करते हैं, जिससे पुण्य प्राप्त होता है।
- मेले में ग्रामीणों की भूमिका क्या थी?
- ग्रामीणों, युवाओं और महिलाओं ने मिलकर पूरे मेले की व्यवस्था और सेवा संभाली।
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