देवझूलनी एकादशी मेले में भारी वाहनों की देसूरी नाल एंट्री बंद
पाली-उदयपुर मार्ग पर भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक रास्ते तय, सुरक्षा के मद्देनज़र आदेश जारी
उदयपुर के देवझूलनी एकादशी मेले के दौरान 25 सितंबर को भारी वाहनों की देसूरी नाल घाट सेक्शन से आवाजाही बंद रहेगी। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से यह आदेश दिया है और भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से चलने के लिए कहा गया है। आपातकालीन सेवाओं और स्थानीय हल्के वाहनों को इस प्रतिबंध से मुक्त रखा गया है।
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उदयपुर। उदयपुर के चारभुजा में 25 सितंबर को देवझूलनी एकादशी का विशाल मेला लगेगा। मेले के दौरान भारी वाहनों की देसूरी नाल घाट सेक्शन से आवाजाही पूरी तरह बंद रहेगी। यह प्रशासनिक आदेश जिला कलेक्टर डॉ. रविन्द्र गोस्वामी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत जारी किया है।
चारभुजा मंदिर और रामदेवरा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिससे इस मार्ग पर पदयात्रियों और यात्रियों का भारी दबाव रहता है। देसूरी नाल घाट सेक्शन की भौगोलिक बनावट खतरनाक मोड़ों और तीव्र ढलान के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसलिए भारी वाहनों की आवाजाही रोकने का निर्णय लिया गया है।
25 सितंबर की रात 10 बजे से यह प्रतिबंध प्रभावी होगा और पाली जिले से देसूरी होते हुए चारभुजा की ओर जाने वाले सभी भारी वाहनों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं होगी। भारी वाहनों को वैकल्पिक और डायवर्टेड मार्गों से निकाला जाएगा।
प्रशासन ने आमजन की सुविधा और आपातकालीन स्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय हल्के वाहन, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड, आपातकालीन सेवाएं, सेना, पुलिस, सशस्त्र बल, होमगार्ड और कानून-व्यवस्था में तैनात अधिकारियों के वाहनों को इस प्रतिबंध से मुक्त रखा है।
पाली की ओर से आने वाले वाहन सांडेराव से सिरोही-पिंडवाड़ा फोरलेन (NH-62/NH-27) पकड़ सकते हैं। पिंडवाड़ा से गोगुंदा होते हुए सीधे उदयपुर पहुंचा जा सकता है। उदयपुर से आगे NH-48 मार्ग से अहमदाबाद तक जाना संभव है।
सोजत या पाली की तरफ से आने वाले वाहन ब्यावर-भीम (NH-58) होते हुए गोमती चौराहा होकर राजसमंद और उदयपुर की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
पाली से देसूरी नाल होकर उदयपुर जाने वाला पारंपरिक मार्ग लगभग 188 किलोमीटर लंबा है, जबकि वैकल्पिक फोरलेन मार्ग से दूरी करीब 245 किलोमीटर हो जाती है। इस वैकल्पिक मार्ग से लगभग 55 से 60 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है।
हालांकि वैकल्पिक मार्ग लंबा है, लेकिन फोरलेन होने के कारण भारी वाहनों के लिए यह सुरक्षित और सुगम रास्ता माना जाता है। प्रशासन ने मेले के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए यह व्यवस्था लागू की है ताकि यातायात सुचारू रहे और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- मेला लगने वाले क्षेत्र में भारी वाहनों का प्रतिबंध क्यों लगाया गया है?
- देसूरी नाल घाट सेक्शन की खतरनाक भौगोलिक बनावट और तीव्र ढलान के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
- कौन-कौन से वाहन प्रतिबंध से मुक्त हैं?
- स्थानीय हल्के वाहन, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड, आपातकालीन सेवाएं, सेना, पुलिस, सशस्त्र बल, होमगार्ड और कानून-व्यवस्था अधिकारी वाहन इस प्रतिबंध से मुक्त हैं।
- गांव पाली से उदयपुर के लिए वैकल्पिक मार्ग कौन से हैं?
- सांडेराव से सिरोही-पिंडवाड़ा फोरलेन NH-62/NH-27 पकड़कर और पिंडवाड़ा से गोगुंदा होते हुए सीधे उदयपुर जाया जा सकता है।
- वैकल्पिक मार्ग लंबा है तो इसका क्या फायदा है?
- वैकल्पिक मार्ग भले ही लंबा है, लेकिन यह फोरलेन होने के कारण भारी वाहनों के लिए सुरक्षित और सुगम माना जाता है।
- देसूरी नाल होकर पारंपरिक मार्ग की दूरी कितनी है?
- पाली से देसूरी नाल होकर उदयपुर जाने वाला पारंपरिक मार्ग लगभग 188 किलोमीटर लंबा है।
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