भरवारी में भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना के साथ जयंती मनाई गई
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय और नगर पालिका परिषद में विधि-विधान से हवन-पूजन हुआ
भरवारी में भगवान विश्वकर्मा की जयंती के अवसर पर गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, नगर पालिका परिषद और विभिन्न स्कूलों में पूजा-अर्चना आयोजित की गई। विद्युत यंत्रों, औजारों और वाहनों की भी पूजा की गई और भगवान विश्वकर्मा के प्रति समर्पण और तकनीकी कार्यों में गुणवत्ता बनाए रखने की कामना की गई। हरिद्वार के बीएचईएल में भी इस दिन को तकनीकी प्रतिबद्धता के रूप में मनाया गया।
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भरवारी। भरवारी में गुरूवार को भगवान विश्वकर्मा की जयंती धूमधाम से मनाई गई। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग और नगर पालिका परिषद के पावर हाउस में विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर विद्युत यंत्रों और औजारों की भी पूजा की गई।
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग में संकाय सदस्य, कर्मचारी और विद्यार्थी भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर पूजा-अर्चना में शामिल हुए। विधि-विधान के साथ हवन-पूजन किया गया, जिसमें सभी के सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और संस्थान की निरंतर प्रगति की कामना की गई। डीन डॉ. कीर्ति पाल, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एचसी ठाकुर, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. ओमवीर सिंह, आर्किटेक्चर विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. निर्मिता मल्होत्रा समेत अन्य संकाय सदस्य भी मौजूद थे।
नगर पालिका परिषद भरवारी के पावर हाउस में देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की पूजा हुई। विद्युत सब स्टेशन पर तैनात जेई राम सूरज, एसडीओ देवेंद्र प्रताप सिंह, टीजीटू गौरव श्रीवास्तव और बाबू अखिलेंद्र ने स्टाफ व संविदा कर्मचारियों के साथ विद्युत यंत्रों की वैदिक मंत्रों से पूजा-अर्चना की और सब स्टेशन के सुचारू संचालन के लिए आशीर्वाद लिया।
भरवारी के सरस्वती बाल मंदिर में विद्यालय के प्राचार्य राजेश सिंह गौतम ने अध्यापकों के साथ विश्वकर्मा की पूजा की। उन्होंने देव शिल्पी की कहानियां बच्चों को सुनाईं। शिक्षक बृजेश मिश्रा, रौनक सिंह, करन सिंह, अरुण पांडेय, शैलेंद्र पांडेय, शिवानी, सीमा, दीपिका, श्वेता, विष्णु रस्तोगी और विपिन वर्मा भी कार्यक्रम में उपस्थित थे।
लोहे के कारोबार से जुड़े व्यापारियों ने प्रतिष्ठानों में लौह यंत्रों की पूजा की। लोगों ने अपने वाहनों की पूजा के साथ उन्हें आकर्षक तरीके से सजाया।
हरिद्वार में बीएचईएल में भी विश्वकर्मा जयंती पर विभिन्न वर्कशॉप और कार्यालयों में विधिवत पूजा कार्यक्रम हुए। बीएचईएल के कार्यपालक निदेशक रंजन कुमार ने पूजा में भाग लेकर कर्मचारियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा जयंती कार्य के प्रति समर्पण, अनुशासन और गुणवत्ता को प्राथमिकता देने की प्रेरणा देती है।
भगवान विश्वकर्मा सृजन, कौशल और कर्मशीलता के प्रतीक हैं। बीएचईएल जैसे तकनीकी संस्थान के लिए यह दिवस तकनीकी उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता मजबूत करने का अवसर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- भगवान विश्वकर्मा की जयंती कब मनाई गई?
- यह जयंती गुरूवार के दिन मनाई गई, जो आर्टिकल में उल्लिखित है।
- पूजा में कौन-कौन शामिल हुए?
- पूजा में संकाय सदस्य, कर्मचारी, विद्यार्थी, नगर पालिका के कर्मचारी, देव शिल्पी, प्राचार्य और व्यापारियों सहित कई लोग शामिल हुए।
- विश्वकर्मा जयंती की विशेषता क्या है?
- यह दिवस सृजन, कौशल और कर्मशीलता के महत्व को दर्शाता है और तकनीकी उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
- बीएचईएल के कार्यपालक निदेशक ने क्या कहा?
- रंजन कुमार ने कहा कि विश्वकर्मा जयंती कार्य के प्रति समर्पण, अनुशासन और गुणवत्ता को प्राथमिकता देने की प्रेरणा देती है।
- लोहे के कारोबार से जुड़े व्यापारियों ने कैसे भाग लिया?
- उन्होंने अपने प्रतिष्ठानों में लौह यंत्रों की पूजा की और अपने वाहनों को पूजा के साथ आकर्षक ढंग से सजाया।
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