धर्म / अध्यात्म 2 MIN READ

4 सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी, पूजा विधि और नियम जानें

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर लड्डू गोपाल की सेवा और व्रत के खास नियम

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर शुक्रवार को कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा विधि और नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा में लड्डू गोपाल को दो बार स्नान कराना शुभ माना जाता है।
AI सार

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कृष्ण जन्माष्टमी पर्व मनाया जाएगा, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन लड्डू गोपाल को स्नान कराना, पंचामृत का उपयोग करना, और भोग व आभूषण अर्पित करना पूजा की विधियों में शामिल है। महिलाएं भी इस दिन व्रत रखती हैं, जो उनकी शारीरिक क्षमता और आस्था पर निर्भर करता है।

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कृष्ण जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल की पूजा करते श्रद्धालु
कृष्ण जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल की पूजा करते श्रद्धालु / प्रतीकात्मक चित्र · निहारिका टाइम्स

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भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर शुक्रवार को कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा विधि और नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा में लड्डू गोपाल को दो बार स्नान कराना शुभ माना जाता है।

जन्माष्टमी के दिन ठाकुर जी को दो बार स्नान कराना चाहिए। संभव हो तो दोनों बार पंचामृत से स्नान कराना उत्तम होता है। पंचामृत में दूध, दही, शहद, जल और शक्कर या मिश्री का प्रयोग होता है। यदि दोनों बार पंचामृत से स्नान कराना संभव न हो तो सुबह गंगाजल से स्नान कराएं और रात्रि को जब भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य होता है, तब पंचामृत से स्नान कराएं।

नए वस्त्र पहनाने के बाद नए आभूषण पहनाना चाहिए और मुरली अर्पित करनी चाहिए। जन्माष्टमी के दिन बाल गोपाल का श्रृंगार करना अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना जाता है। लड्डू गोपाल को माखन मिश्री का भोग लगाना आवश्यक है। भोग लगाने के बाद धूप-दीप जलाएं और ठाकुर जी को कुछ समय के लिए झूला झूलाएं। अंत में बाल गोपाल को प्रणाम करें और पूजा के दौरान हुई किसी भी भूल के लिए माफी मांगें।

मान्यता है कि जन्माष्टमी की रात भगवान श्रीकृष्ण जगते हैं, इसलिए दिन में कुछ समय के लिए उन्हें आराम कराना चाहिए। दिन के तीसरे प्रहर में ठाकुर जी को छोटे बालक की तरह जगाना चाहिए। यदि जन्माष्टमी की शाम को कीर्तन हो रहा हो तो ठाकुर जी को विश्राम नहीं कराना चाहिए। शाम को बाल गोपाल की आरती अवश्य उतारनी चाहिए। इसके बाद रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्म उत्सव मनाना चाहिए।

महिलाएं भी इस दिन व्रत रखती हैं और लड्डू गोपाल की पूजा करती हैं। मासिक धर्म के दौरान व्रत रखना या न रखना महिला की शारीरिक क्षमता, स्वास्थ्य और आस्था पर निर्भर करता है। यदि शरीर स्वस्थ है और व्रत में कोई परेशानी नहीं है तो महिला फलाहार या सामान्य व्रत रख सकती है। कमजोरी या दर्द होने पर व्रत न रखना उचित माना जाता है। मासिक धर्म एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और श्रद्धा, संकल्प व भक्ति व्रत का मुख्य आधार हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

जन्माष्टमी के विशेष पूजा विधि में क्या शामिल होता है?
भगवान को स्नान, नए वस्त्र और आभूषण पहनाना, मुरली अर्पित करना और विशेष श्रृंगार करना शामिल होता है।

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Published3 सितंबर 2026, 17:02 IST IST
Last updated3 सितंबर 2026, 17:02 IST IST
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