मेघना गुलजार की 'दायरा' कमजोर पटकथा से निराश करती है
करीना कपूर और पृथ्वीराज सुकुमारन की फिल्म में क्राइम और इंसाफ के बीच जटिलता दिखाने की कोशिश
मेघना गुलजार की फिल्म 'दायरा' 2019 के हैदराबाद एनकाउंटर केस पर आधारित है, जिसमें न्याय और फेक एनकाउंटर के विषय पर सवाल उठाए गए हैं। फिल्म की पटकथा कमजोर होने के कारण इसे आलोचनात्मक रूप से औसत माना गया है, जबकि पृथ्वीराज सुकुमारन की एक्टिंग को अच्छा बताया गया है।
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मेघना गुलजार की नई फिल्म 'दायरा' 2019 के हैदराबाद एनकाउंटर केस पर आधारित है और चार प्रमुख मीडिया स्रोतों में इसकी समीक्षा सामने आई है। फिल्म में क्राइम और न्याय के बीच के अंतर को दिखाने का प्रयास किया गया है, लेकिन कमजोर पटकथा और उलझे सबप्लॉट इसे प्रभावशाली नहीं बना पाते।
फिल्म की कहानी डीसीपी रमन कुमार IPS के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्हें एनकाउंटर में चार आरोपियों को मारने के बाद जनता और मीडिया 'हीरो' मानते हैं। दूसरी ओर, डीसीपी अजूनी कोहली IPS को इस मामले की निष्पक्ष जांच का जिम्मा दिया गया है कि क्या रमन कुमार ने फेक एनकाउंटर किया। शुरुआत में कहानी न्याय के सवाल उठाती है, लेकिन आगे बढ़ते हुए यह उलझनों में फंस जाती है और दर्शकों को संतोषजनक समाधान नहीं देती।
पृथ्वीराज सुकुमारन की एक्टिंग फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी है। वह एक संवेदनशील पुलिस अधिकारी का किरदार निभाते हैं जो अंदर ही अंदर गुस्सा और अवसाद से जूझ रहा है। उनके चेहरे के भाव और संवाद प्रस्तुति चरित्र की भावनात्मक जटिलता को बखूबी दर्शाते हैं। इसके विपरीत, करीना कपूर खान का रोल सीमित कैमियो जैसा है, जिसमें उनका एक बड़ा सीन फिल्म के अंत में आता है। करीना ने अपनी भूमिका ईमानदारी से निभाई, लेकिन स्क्रीन पर उनका कम उपयोग फिल्म की कमजोरी साबित होता है।
मेघना गुलजार, जो 'तलवार', 'राजी' और 'छपाक' जैसी फिल्मों के लिए जानी जाती हैं, इस बार निर्देशन में लय खोती नजर आती हैं। उन्होंने न्याय प्रक्रिया और एनकाउंटर की नैतिकता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की, लेकिन फिल्म का मुख्य थ्रिलर तत्व कमजोर पड़ गया। सिनेमैटोग्राफी ने क्राइम की गंभीरता और जांच के माहौल को यथार्थवादी रूप में पेश किया है, जिसमें मेलोड्रामा और फ्लैशी शॉट्स से बचा गया है।
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर शांत और धीमा है, जो थ्रिलर के लिए जरूरी तनाव पैदा करने में असफल रहता है। गानों की अनुपस्थिति इस गंभीर विषय के लिए उपयुक्त है, लेकिन लंबा और जटिल पटकथा कई अनावश्यक सबप्लॉट से भरी है। मुख्य कहानी 2019 के केस पर केंद्रित है, लेकिन निर्भया केस से जुड़े सबप्लॉट दर्शकों को भ्रमित करते हैं।
दो घंटे से अधिक की अवधि में फिल्म वह रोमांच और थ्रिल नहीं दे पाती जिसकी उम्मीद की जाती है। अगर असल जीवन की घटनाओं पर आधारित प्रभावशाली क्राइम थ्रिलर देखनी हो तो 'दिल्ली क्राइम्स' जैसी वेब सीरीज बेहतर विकल्प हैं।
पृथ्वीराज की शानदार एक्टिंग और सामाजिक मुद्दे को उठाने के प्रयास के बावजूद, कमजोर स्क्रिप्ट, करीना कपूर के सीमित उपयोग और कमजोर निर्देशन के कारण 'दायरा' एक औसत और निराशाजनक फिल्म बनकर रह जाती है।
यह मामला पिछले 21 दिनों से चर्चा में है, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- फिल्म में मुख्य कहानी क्या है?
- फिल्म मीडिया में 'हीरो' बने डीसीपी रमन कुमार और फेक एनकाउंटर जांच की कहानी बताती है।
- मेघना गुलजार ने फिल्म में किस मुद्दे को उठाने की कोशिश की?
- उन्होंने न्याय प्रक्रिया और एनकाउंटर की नैतिकता के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है।
- पृथ्वीराज सुकुमारन के किरदार की विशेषता क्या है?
- उनका किरदार एक संवेदनशील पुलिस अधिकारी का है जो गुस्सा और अवसाद से जूझ रहा है।
- करीना कपूर की भूमिका कैसी है?
- करीना कपूर का रोल छोटा है और अंत में मुख्य सीन आता है, जिससे उनका कम उपयोग फिल्म की कमजोरी है।
- फिल्म की सिनेमैटोग्राफी कैसी है?
- सिनेमैटोग्राफी क्राइम की गंभीरता और जांच के माहौल को यथार्थवादी रूप में प्रस्तुत करती है।
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