भरतपुर के भुसावर में 40 से अधिक प्रकार के पारंपरिक अचार बनते हैं
56 मसालों से तैयार अचारों का स्वाद राजस्थान और आसपास के राज्यों में प्रसिद्ध है
राजस्थान के भरतपुर जिले के भुसावर कस्बे में 35 से 40 प्रकार के पारंपरिक अचार बनाए जाते हैं, जिनमें 56 तरह के मसालों का इस्तेमाल होता है। यहां के अचार राजस्थान सहित आसपास के राज्यों में भी लोकप्रिय हैं और इन्हें बनाने में पारंपरिक तरीके अपनाए जाते हैं।
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भरतपुर। राजस्थान के भरतपुर जिले का भुसावर कस्बा अपने पारंपरिक अचारों के लिए जाना जाता है। यहां करीब 35 से 40 प्रकार के अचार बनाए जाते हैं, जिनमें 56 तरह के मसालों का अनोखा मिश्रण होता है। भुसावर के अचार राजस्थान सहित आसपास के राज्यों में भी लोकप्रिय हैं।
भुसावर को अचार नगरी के नाम से भी जाना जाता है। यहां के अचारों की खासियत उनका पारंपरिक स्वाद और मसालों का अनोखा मिश्रण है, जो हर अचार को अलग और खास बनाता है। आम, नींबू, मिर्च और कई अन्य सब्जियों व फलों से अचार तैयार किए जाते हैं।
अचार बनाने की प्रक्रिया में आज भी पारंपरिक तरीकों को महत्व दिया जाता है। खासकर महिलाएं अपने हाथों से मसालों को सही अनुपात में मिलाकर स्वादिष्ट अचार बनाती हैं। स्थानीय अचार विक्रेताओं के अनुसार भुसावर में लंबे समय से अचार बनाने का काम होता आ रहा है और इन अचारों की मांग दूर-दराज के क्षेत्रों तक रहती है।
राजस्थानी खाने की थाली में अचार का खास महत्व है। दाल-बाटी, पराठे या दाल-चावल के साथ अचार खाने का स्वाद बढ़ा देता है। अगर कोई ज्यादा तेल वाला अचार पसंद नहीं करता तो भुसावर का पानी वाला मिर्च का अचार ट्राई कर सकता है, जिसे मिर्ची की कांजी भी कहा जाता है।
इस पानी वाले मिर्च के अचार में हरी मिर्च को हल्का नरम करके मसालों से भरा जाता है और फिर पानी में रखा जाता है। इसमें राई, सौंफ, मेथी दाना और भुना जीरा स्वाद को खास बनाते हैं। धीरे-धीरे मिर्च मसालों का स्वाद सोखती है और उसमें खट्टापन आता है। यह अचार उन लोगों को पसंद आ सकता है जो तेल कम रखना चाहते हैं।
अचार बनाने के लिए करीब 500 ग्राम ताजी हरी मिर्च ली जाती है, जो बहुत ज्यादा नरम या खराब नहीं होनी चाहिए। स्वाद के अनुसार नमक, आधा चम्मच हल्दी और एक चुटकी हींग डाली जाती है। खट्टापन लाने के लिए करीब दो चम्मच सफेद सिरका इस्तेमाल किया जा सकता है। सभी सामग्री ताजी और साफ होनी चाहिए ताकि अचार जल्दी खराब न हो।
हरी मिर्च को साफ कपड़े से पोंछकर पूरी तरह सुखाना जरूरी होता है। उबाल आने पर उसमें हरी मिर्च डालकर गैस बंद कर दी जाती है ताकि मिर्च थोड़ी नरम हो जाए लेकिन पूरी तरह गलनी न हो। इसके बाद मसाला तैयार कर मिर्च में भरा जाता है। इस प्रक्रिया से मिर्च में मसाला भरना आसान होता है और उसका स्वाद बना रहता है।
भुसावर के अचारों ने पारंपरिक स्वाद और स्थानीय मेहनत के दम पर कस्बे को एक अलग पहचान दिलाई है। लोग यहां के अचार को स्वाद और गुणवत्ता के कारण पसंद करते हैं।
अचार बनाने में मसालों की भूमिका
अचार तैयार करने में करीब 56 प्रकार के मसालों का इस्तेमाल किया जाता है। अलग-अलग अचार के अनुसार मसालों का मिश्रण तैयार किया जाता है, जिससे हर अचार का स्वाद एक-दूसरे से अलग और खास बन जाता है।
मसालों में राई, सौंफ, मेथी दाना और भुना जीरा प्रमुख हैं जो अचार के स्वाद को अनोखा बनाते हैं। अचार बनाने की प्रक्रिया में पारंपरिक तरीकों को आज भी महत्व दिया जाता है, खासकर महिलाओं द्वारा हाथों से मसालों को सही अनुपात में मिलाकर अचार तैयार किया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- पानी वाले मिर्च के अचार में कौन-कौन से मसाले होते हैं?
- इस अचार में राई, सौंफ, मेथी दाना और भुना जीरा मुख्य मसाले होते हैं जो विशेष स्वाद देते हैं।
- अचार बनाने में महिलाएं कैसे योगदान देती हैं?
- महिलाएं हाथों से मसालों को सही अनुपात में मिलाकर अचार का पारंपरिक स्वाद बनाए रखती हैं।
- अचार बनाने के लिए हरी मिर्च की कैसी गुणवत्ता जरूरी होती है?
- हरी मिर्च नरम लेकिन खराब नहीं होनी चाहिए और साफ-सुथरी होनी चाहिए ताकि अचार जल्दी खराब न हो।
- भुसावर के अचार किन राज्यों में लोकप्रिय हैं?
- भुसावर के अचार राजस्थान के साथ-साथ आसपास के राज्यों में भी पसंद किए जाते हैं।
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