NSA अजीत डोभाल ने याद किया 20 साल पहले सिक्किम मिशन का संकट
युवा आईपीएस अधिकारी के रूप में डोभाल ने बताया कैसे लगा करियर खत्म हो गया
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में बताया कि 20 साल पहले सिक्किम में उनकी खुफिया टीम को चीनी सेना ने पकड़ लिया था। यह घटना सीमा पार दी गई गलत नक्शों के कारण हुई थी, जिसमें टीम के सभी सदस्य बाद में वापस आ गए। डोभाल ने इस अनुभव को जीवन की एक सीख बताया और युवाओं को लक्ष्य निर्धारित करने की सलाह दी।
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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में अपने शुरुआती खुफिया करियर का एक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वह 20 की उम्र में सिक्किम में इंटेलिजेंस की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, तब एक मिशन के दौरान टीम चीनी सेना के कब्जे में चली गई।
डोभाल ने बताया कि उस समय वह युवा आईपीएस अधिकारी थे और खुफिया काम में नए थे। सिक्किम उस वक्त भारत का हिस्सा नहीं था, बल्कि भारत के साथ विलय की प्रक्रिया में था। उनकी जिम्मेदारी सीमा क्षेत्र में चीनी सैन्य गतिविधियों की जानकारी जुटाने की थी।
उन्होंने कहा कि सीमा क्षेत्र में एक खुफिया टीम को मिशन पर भेजा गया था, लेकिन निर्धारित समय तक टीम वापस नहीं लौटी। पहले पांच दिन बीते, फिर दस दिन और उसके बाद करीब 15 दिन गुजर गए। उस दौरान किसी हिमस्खलन या दूसरी प्राकृतिक आपदा की कोई जानकारी नहीं मिली थी, जिससे टीम के लापता होने की वजह समझी जा सके।
बाद में मुख्यालय से सूचना मिली कि टीम के सदस्यों को चीनी सुरक्षा बलों ने पकड़ लिया था। डोभाल ने बताया कि टीम से पूछताछ की गई और बाद में सभी सदस्यों को वापस भेज दिया गया। उन्होंने कहा, "मुझे आशंका थी कि इस घटना के कारण मेरा करियर समाप्त हो जाएगा।" वह उस समय मानसिक रूप से काफी परेशान थे और उन्हें लगा कि अब उन्हें नया पेशा तलाशना पड़ेगा।
डोभाल ने बताया कि बाद में जांच में उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया। यह घटना मुख्यालय से उपलब्ध कराए गए स्केच और नक्शों में खामियों के कारण हुई थी।
उन्होंने कहा, "भारतीय एजेंट्स मिशन पर थे, लेकिन उस वक्त सबके माथे पर चिंता की लकीरें गहरा गई थीं, जब चीन की सेना ने पूरी टीम को ही पकड़ लिया था।" डोभाल ने बताया कि यह स्थिति उनके लिए पेशेवर और मानवीय दोनों स्तर पर बेहद गंभीर थी क्योंकि उन्हें यह तक पता नहीं था कि टीम के सदस्य जीवित हैं या नहीं।
डोभाल ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि पिछली पीढ़ियों ने गुलामी और कई तरह की सीमाओं का सामना किया, जबकि मौजूदा दौर में भारत और दुनिया में बदलाव के कारण युवाओं के लिए अवसरों का विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा, "तकनीक आने वाले समय में किसी भी देश और समाज की वृद्धि तथा प्रगति का सबसे महत्वपूर्ण कारक होगी।"
डोभाल ने इस अनुभव को जीवन की एक सीख बताया और कहा कि किसी भी व्यक्ति के जीवन में ऐसा दौर आ सकता है जब उसे लगे कि सब कुछ गलत हो गया है या उसका रास्ता खत्म हो गया है। उन्होंने कहा, "आपको पता होना चाहिए कि आप जाना कहां चाहते हैं और वहां पहुंचने का रास्ता क्या है।"
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सिक्किम उस समय भारत का हिस्सा क्यों नहीं था?
- सिक्किम भारत के साथ विलय की प्रक्रिया में था, इसलिए वह उस वक्त स्वतंत्र था।
- मिशन पर गए टीम के सदस्यों को क्या हुआ था?
- टीम के सदस्यों को चीनी सुरक्षा बलों ने पकड़ लिया था और पूछताछ के बाद वापस भेजा गया।
- डोभाल को इस घटना के बाद कैसा महसूस हुआ?
- वे मानसिक रूप से परेशान थे और उन्हें लगा कि उनका करियर खत्म हो सकता है।
- मिशन की विफलता की क्या वजह थी?
- मुख्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए नक्शे और स्केच में खामियों के कारण यह घटना हुई।
- डोभाल ने युवाओं के लिए क्या संदेश दिया?
- उन्होंने कहा कि तकनीक भविष्य में देश और समाज की प्रगति का सबसे महत्वपूर्ण कारक होगी।
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