NSE का आईपीओ 15 फीसदी कम वैल्यूएशन पर जारी
विदेशी एक्सचेंजों से महंगा, घरेलू बाजार में BSE से सस्ता
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने आईपीओ के लिए प्राइस बैंड 1,700 से 1,785 रुपये प्रति शेयर रखा है, जो लगभग 15 फीसदी कम वैल्यूएशन पर है। NSE का पीई अनुपात विदेशी एक्सचेंजों की तुलना में अधिक है, लेकिन घरेलू बाजार में BSE और MCX से कम है। NSE की मजबूत बाजार हिस्सेदारी, कमाई और बढ़ते निवेश के कारण इसे प्रीमियम वैल्यूएशन प्राप्त हो रहा है।
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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने आईपीओ के लिए वैल्यूएशन करीब 15 फीसदी कम रखा है। इसके बावजूद NSE का प्राइस बैंड 1,700 से 1,785 रुपये प्रति शेयर है, जो विदेशी एक्सचेंजों की तुलना में अधिक है।
NSE के आईपीओ का ऊपरी प्राइस 1,785 रुपये प्रति शेयर है, जो वित्त वर्ष 2025-26 की कमाई के करीब 42.9 गुना पीई पर आधारित है। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, कॉइनबेस ग्लोबल 40.35 गुना, लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप 29.35 गुना और नैस्डैक 25.95 गुना पीई पर कारोबार कर रहे हैं। इस लिहाज से NSE का वैल्यूएशन विदेशी एक्सचेंजों से काफी ज्यादा है।
बाजार जानकारों का कहना है कि NSE की मजबूत बाजार हिस्सेदारी और भारत में शेयर बाजार के तेजी से बढ़ते दायरे के कारण इसे ज्यादा वैल्यूएशन मिल रहा है। AUM कैपिटल मार्केट के रिसर्च हेड राजेश अग्रवाल के मुताबिक, NSE का आईपीओ प्रीमियम वैल्यूएशन पर है, लेकिन कंपनी की मजबूत पकड़, ग्रोथ के मौके और कारोबार इसे सहारा देते हैं।
राजेश अग्रवाल ने बताया कि भारत का पूंजी बाजार विकसित देशों की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है। देश में परिवारों की बचत वित्तीय निवेश की ओर बढ़ रही है और शेयर बाजार में भागीदारी अभी कम है, जो NSE के लिए लंबी अवधि में ग्रोथ के अवसर पैदा करता है।
घरेलू बाजार में BSE और MCX के मुकाबले NSE का पीई कम है। राजेश अग्रवाल के अनुसार, BSE की तेज मौजूदा ग्रोथ उसके ज्यादा वैल्यूएशन की वजह है। वेंचुरा के रिसर्च हेड विनीत बोलिंजकर ने कहा कि NSE की बाजार हिस्सेदारी और कारोबार का स्तर इसे विदेशी एक्सचेंजों के मुकाबले प्रीमियम वैल्यूएशन दिलाने में मदद करता है।
विनीत बोलिंजकर ने बताया कि प्रमुख वैश्विक एक्सचेंजों की तुलना में NSE का एडजस्टेड ऑपरेटिंग एबिटा मार्जिन सबसे ज्यादा है। वित्त वर्ष 2025-26 में NSE की कैश मार्केट टर्नओवर में हिस्सेदारी 92.99 फीसदी, इक्विटी फ्यूचर्स में 99.79 फीसदी और इक्विटी ऑप्शंस प्रीमियम टर्नओवर में 74.71 फीसदी रही। इसी वित्त वर्ष में ट्रेड की संख्या के आधार पर NSE दुनिया का सबसे बड़ा मल्टी-एसेट एक्सचेंज भी रहा।
NSE की कमाई और मुनाफे के आंकड़े भी मजबूत हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का प्रॉफिट मार्जिन 62.1 फीसदी और रिटर्न ऑन इक्विटी 32.1 फीसदी रहा। कैश इक्विटी ट्रेड में NSE की वैश्विक हिस्सेदारी 11.38 फीसदी और इक्विटी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट में 51.18 फीसदी रही।
NSE का आईपीओ ज्यादातर बड़े विदेशी एक्सचेंजों के मुकाबले ऊंचे वैल्यूएशन पर आया है, लेकिन घरेलू स्तर पर BSE और MCX के मुकाबले इसका पीई कम है। NSE की वैल्यूएशन को समझने के लिए उसकी बाजार हिस्सेदारी, कमाई की रफ्तार और आगे के ग्रोथ के मौकों को देखना जरूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- NSE का आईपीओ प्रीमियम वैल्यूएशन क्यों है?
- NSE की मजबूत बाजार हिस्सेदारी और भारत के बढ़ते पूंजी बाजार ने इसे उच्च वैल्यूएशन दिलाया है।
- NSE का विदेशी एक्सचेंजों से तुलना कैसे होती है?
- NSE का पीई विदेशी एक्सचेंजों से ज्यादा है, लेकिन घरेलू BSE और MCX से कम है।
- भारत के पूंजी बाजार में क्या खास है?
- भारत में परिवारों की बचत वित्तीय निवेश की ओर बढ़ रही है और शेयर बाजार में भागीदारी अभी कम है, जिससे लंबी अवधि में ग्रोथ के अवसर हैं।
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