ONGC को ओडिशा के समुद्र में 1450 मीटर गहराई पर गैस मिली
महानदी बेसिन में ड्रिलिंग के दौरान 43 किलोमीटर दूर गहरे समुद्र में गैस का भंडार मिला
ONGC ने ओडिशा के तट से करीब 43 किलोमीटर दूर महानदी ऑफशोर बेसिन में 1,450 मीटर गहराई पर गैस की खोज की है। यह खोज 'समुद्र मंथन' अभियान के तहत की गई है और अभी व्यावसायिक उपयोगिता की पुष्टि नहीं हुई है, आगे जांच और मूल्यांकन जारी हैं।
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ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन लिमिटेड (ONGC) ने ओडिशा के तट से करीब 43 किलोमीटर दूर महानदी ऑफशोर बेसिन में गहरे समुद्र में स्थित कुएं में गैस की खोज की है। कंपनी के मुताबिक, करीब 1,450 मीटर की गहराई पर गैस मिली है और पिछले तीन दिनों से गैस का प्रवाह जारी है।
यह खोज MN-DW18-1-H-D कुएं में 18 सितंबर को हुई, जिसे ONGC के 'समुद्र मंथन' डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन अभियान के तहत ड्रिल किया गया था। इस कुएं को 1,623 मीटर की लक्षित गहराई तक ड्रिल किया गया था। ड्रिलिंग 25 जुलाई को 'प्लैटिनम एक्सप्लोरर' ड्रिलशिप की मदद से शुरू हुई थी।
यह महानदी बेसिन में 'समुद्र मंथन' अभियान के तहत ONGC की ओर से ड्रिल किया गया पहला कुआं है। हालांकि, अभी इसे व्यावसायिक रूप से उपयोगी गैस भंडार की पुष्टि नहीं माना गया है। ONGC आगे की जांच और व्यावसायिक मूल्यांकन करेगी ताकि गैस भंडार के आकार और व्यवहार्यता का पता लगाया जा सके।
कंपनी ने बताया कि इस खोज के साथ क्षेत्र में हुई अन्य खोजों को साझा इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं के जरिए विकसित करने की संभावना है, जिससे हर खोज के लिए अलग-अलग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की जरूरत कम हो सकती है।
महानदी बेसिन में यह खोज ONGC के भारत के समुद्री इलाकों में डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन बढ़ाने के प्रयास का हिस्सा है। व्यावसायिक उत्पादन तक पहुंचाने के लिए आगे की जांच, इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश की आवश्यकता होगी।
अब ONGC का फोकस इस गैस रिजर्वायर का विस्तार पता लगाने, संसाधनों का अनुमान लगाने और व्यावसायिक विकास के फैसले पर होगा। आगे की जांच के नतीजों के आधार पर इस परियोजना का अगला चरण तय होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- क्या यह गैस भंडार व्यावसायिक है?
- अभी व्यावसायिक रूप से उपयोगी गैस भंडार की पुष्टि नहीं हुई है और आगे की जांच जरूरी है।
- ड्रिलिंग अभियान किसका हिस्सा है?
- यह खोज ONGC के 'समुद्र मंथन' डीपवाटर एक्सप्लोरेशन अभियान का हिस्सा है।
- ड्रिलिंग प्रक्रिया कब शुरू हुई थी?
- ड्रिलिंग 25 जुलाई को शुरू हुई थी और 18 सितंबर को गैस मिली।
- इस खोज का भारत के ऊर्जा क्षेत्र पर क्या प्रभाव होगा?
- यह खोज भारत के समुद्री डीपवाटर एक्सप्लोरेशन प्रयासों को बढ़ावा देगी और साझा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को सक्षम बनाएगी।
- यह खोज क्षेत्र में अन्य खोजों से कैसे जुड़ी है?
- इस खोज से क्षेत्र में अन्य खोजों को साझा संसाधनों और सुविधाओं से विकसित करने की संभावना बढ़ेगी।
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