एक अक्टूबर से शुरू होगी धान की खरीद, समर्थन मूल्य 2441 रुपये तय
किसानों का पंजीकरण पोर्टल सक्रिय न होने से अभी शुरू नहीं हो सका
शासन ने एक अक्टूबर से धान की खरीद शुरू करने का निर्णय लिया है और समर्थन मूल्य 2441 रुपये प्रति कुंतल तय किया गया है। हालांकि, किसान पंजीकरण अभी पोर्टल के सक्रिय न होने के कारण शुरू नहीं हो पाया है, और संबंधित विभाग क्रय केंद्रों की तैयारियों में लगा हुआ है। किसान संगठन ने खरीद में देरी, बकाया राशि भुगतान, और अन्य कृषि संबंधी समस्याओं के समाधान की मांग की है।
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शासन ने धान का समर्थन मूल्य 2441 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया है। जिले में एक अक्टूबर से धान की खरीद शुरू करने की तैयारी है, लेकिन किसानों का पंजीकरण अभी तक पोर्टल के सक्रिय न होने के कारण शुरू नहीं हो पाया है। संबंधित विभाग क्रय केंद्रों की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने में जुटा है।
धान खरीद के लिए विभागों ने क्रय केंद्रों की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पोर्टल सक्रिय होते ही किसानों का पंजीकरण शुरू किया जाएगा, जिससे वे धान बेच सकेंगे।
एक अन्य किसान संगठन ने राज्य में नशे की बिक्री और सप्लाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। साथ ही, किसानों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई बंद करने और धान की खरीद समय पर शुरू करने की भी मांग की गई है।
किसान मोर्चे ने यह आशंका जताई है कि इस वर्ष धान की सरकारी खरीद पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 15 दिन देरी से शुरू हो सकती है। इसके अलावा, किसानों को 600 रुपये प्रति क्विंटल तक की बकाया राशि का भुगतान समय पर करने की भी मांग की गई है।
मोर्चे ने सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने, भूजल निकालने में हुए खर्च में राहत देने, ट्यूबवेल मोटरों से जुड़ी सुविधाएं सरल बनाने और अमृतसर एग्रीकल्चर डेवलपमेंट बैंक से संबंधित किसानों की समस्याओं के समाधान की भी मांग की है।
किसान संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे आगे की रणनीति तय करेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- किसान मोर्चे ने बिजली और सिंचाई से क्या मांगा है?
- मोर्चे ने सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली और ट्यूबवेल मोटरों से जुड़ी सुविधाएं सरल बनाने की मांग की है।
- किसानों की बकाया राशि का भुगतान कब तक होना चाहिए?
- किसान मोर्चे ने 600 रुपये प्रति क्विंटल तक की बकाया राशि का समय पर भुगतान करने की मांग की है।
- अगर किसान संगठन की मांगें पूरी नहीं हुईं तो क्या होगा?
- किसान संगठन ने चेतावनी दी है कि वे समाधान न होने पर आगे की रणनीति तय करेंगे।
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