परिवर्तिनी एकादशी 2026 की तिथि और कथा
21 या 22 सितंबर को व्रत, राजा मान्धाता की कथा से जुड़ा है यह पर्व
परिवर्तिनी एकादशी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पद्मा एकादशी को कहा जाता है और यह 22 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। पौराणिक कथा के अनुसार, राजा मान्धाता ने इस व्रत से तीन साल की बारिश की कमी को दूर किया था। इस दिन जल से भरे घड़े को दही और चावल के साथ ब्राह्मणों को दान देना अनिवार्य होता है।
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परिवर्तिनी एकादशी का व्रत इस वर्ष 22 सितंबर को रखा जाएगा। यह व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पद्मा एकादशी के नाम से जाना जाता है, जिसकी पौराणिक कथा राजा मान्धाता से जुड़ी है। राजा ने तीन साल तक बारिश न होने पर मुनि से परामर्श लेकर यह व्रत रखा था।
परिवर्तिनी एकादशी को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है। इस वर्ष यह व्रत 21 सितंबर शाम चार बजे से शुरू होकर 22 सितंबर को रखा जाएगा क्योंकि दशमी युक्त एकादशी नहीं, द्वादशी युक्त एकादशी ही सही मानी जाती है।
पौराणिक कथा के अनुसार, राजा मान्धाता के राज्य में तीन वर्षों तक बारिश नहीं हुई, जिससे प्रजा भूख और संकट में आ गई। राजा ने मुनियों और तपस्वियों के आश्रम जाकर उपाय खोजा। ब्रह्मपुत्र अधिरा ऋषि ने बताया कि राज्य में शूद्र तपस्या करता है, इसलिए मेघ पानी नहीं बरसाते। उन्होंने राजा को एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।
राजा ने भाद्रपद मास की पद्मा एकादशी, जिसे परिवर्तिनी एकादशी भी कहा जाता है, का व्रत प्रजा के साथ किया। इसके बाद मेघस्वरूप भगवान विष्णु ने बारिश की। इस दिन जल से भरे घड़े को दही और चावल के साथ ब्राह्मणों को दान देना चाहिए। दान करते समय विशेष मंत्र बोलकर पापों से मुक्ति और सुख की कामना की जाती है।
राजा मान्धाता के राज्य में सभी वर्ण और आश्रम के लोग धर्म का पालन करते थे, प्रजा के पास पर्याप्त धन था और कोई भूखा नहीं था। राजा के पास न्यायोपार्जित धन था और प्रजा को कोई डर या चिंता नहीं थी।
इस व्रत का पालन करने से मनुष्य सभी पापों से मुक्त होता है और सुख-शांति प्राप्त करता है। यह व्रत प्रजा और राजा दोनों के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- परिवर्तिनी एकादशी का व्रत किस समय से शुरू होता है?
- इस वर्ष व्रत 21 सितंबर शाम चार बजे से शुरू होकर 22 सितंबर को रखा जाएगा।
- परिवर्तिनी एकादशी की कथा में मेघस्वरूप भगवान विष्णु की क्या भूमिका है?
- भगवान विष्णु ने राजा के व्रत के बाद वर्षा कर देश की आपदा दूर की।
- व्रत करने का महत्व क्या है?
- यह व्रत प्रजा और राजा दोनों के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है और सभी पापों से मुक्ति दिलाता है।
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