देशभर में धूमधाम से मनाई गई राधाष्टमी, पूजा का शुभ मुहूर्त 11:01 से 1:28 बजे तक
राधारानी के प्राकट्य दिवस पर भजन-कीर्तन, व्रत और विशेष श्रृंगार का आयोजन
19 सितंबर को भारत में राधाष्टमी का पर्व भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि पर मनाया गया, जिसमें राधारानी की पूजा, व्रत, भजन-कीर्तन और श्रृंगार किया जाता है। इस वर्ष पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:28 बजे तक है और आज से महालक्ष्मी व्रत भी शुरू हुआ है, जो 3 अक्टूबर तक चलेगा। ब्रज क्षेत्र जैसे बरसाना और वृंदावन में इस पर्व का विशेष आयोजन किया गया।
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आज राधाष्टमी। 19 सितंबर को देशभर में राधाष्टमी का पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर धूमधाम से मनाया गया। इस दिन राधारानी के प्राकट्य दिवस के रूप में पूजा, व्रत, भजन-कीर्तन और विशेष श्रृंगार किया जाता है। इस बार सौभाग्य योग, आयुष्मान योग, रवि योग समेत कई शुभ योग बनने से पर्व का महत्व और बढ़ गया है।
राधाष्टमी की पूजा विधि के अनुसार सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा स्थल की सफाई करनी चाहिए। लाल या पीला कपड़ा बिछाकर राधा-कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर पंचामृत से राधारानी का स्नान कराया जाता है। नए वस्त्र, आभूषण, फूल और माला अर्पित कर चंदन, कुमकुम, अक्षत, धूप और दीप जलाए जाते हैं। माखन-मिश्री, खीर, फल या सात्विक भोग लगाकर राधा-कृष्ण के मंत्रों का जाप किया जाता है। अंत में आरती कर प्रसाद बांटा जाता है।
पंचांग के अनुसार इस दिन का मध्याह्न मुहूर्त सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:28 बजे तक है, इसी समय राधारानी के प्राकट्य का पूजन विशेष माना जाता है। आज से 15 दिनों का महालक्ष्मी व्रत भी शुरू हुआ है, जो 3 अक्टूबर तक चलेगा। इस व्रत में 16 गांठ वाले धागे में गांठ लगाकर पूजा की जाती है, जिससे धन, संतान और वाहन की प्राप्ति होती है।
आज के दिन गुरु के उच्च राशि में होने से हंसराज योग, शुक्र के तुला राशि में होने से मालव्य राजयोग और कन्या राशि में सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग बन रहे हैं। आज का राहुकाल सुबह 9:11 बजे से 10:43 बजे तक है। शनि पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7:40 बजे से 9:11 बजे तक है।
दिनभर के अन्य मुहूर्तों में लाभ-उन्नति मुहूर्त शाम 6:22 बजे से 7:50 बजे तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2:17 बजे से 3:06 बजे तक और अमृत काल शाम 6:31 बजे से 8:19 बजे तक रहेगा। चंद्रोदय दोपहर 1:48 बजे और चंद्रास्त रात 11:45 बजे होगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:34 बजे से 5:21 बजे तक और अभिजीत मुहूर्त 11:50 बजे से 12:39 बजे तक रहेगा। निशिता मुहूर्त रात 11:51 बजे से अगले दिन 12:38 बजे तक रहेगा।
राधारानी को प्रेम, भक्ति और समर्पण की प्रतीक माना जाता है। उनकी पूजा करने से भक्तों के मन में प्रेम और भक्ति की वृद्धि होती है और वे हर परेशानी से मुक्ति पाते हैं। ब्रज क्षेत्र, खासकर बरसाना और वृंदावन में इस पर्व का विशेष उत्साह देखने को मिलता है। मंदिरों में राधारानी का विशेष श्रृंगार, अभिषेक और भजन-कीर्तन किए जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- राधाष्टमी पर कौन-कौन सी पूजा विधि अपनाई जाती है?
- पुजा स्थल की सफाई, पंचामृत से स्नान, नए वस्त्र और आभूषण अर्पित करना, मंत्र जाप और आरती शामिल हैं।
- महालक्ष्मी व्रत के फायदे क्या माने जाते हैं?
- इस व्रत में 16 गांठ वाले धागे में गांठ लगाकर पूजा की जाती है जिससे धन, संतान और वाहन की प्राप्ति होती है।
- राधारानी की पूजा से भक्तों को क्या लाभ होता है?
- राधारानी की पूजा करने से भक्तों के मन में प्रेम और भक्ति बढ़ती है तथा वे हर परेशानी से मुक्ति पाते हैं।
- ब्रज क्षेत्र में राधाष्टमी का उत्सव कैसे मनाया जाता है?
- ब्रज क्षेत्र के मंदिरों में राधारानी का विशेष श्रृंगार, अभिषेक और भजन-कीर्तन आयोजित किए जाते हैं।
- आज के दिन कौन से शुभ योग बन रहे हैं?
- गुरु के उच्च राशि में होने से हंसराज योग, शुक्र की तुला राशि में मालव्य राजयोग और सूर्य-बुध की कन्या राशि युति से बुधादित्य योग बन रहे हैं।
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