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सुप्रीम कोर्ट बनाएगा विशेष पीठ बेसहारा पशु आश्रय याचिका पर

एनएचएआई की याचिका पर सुनवाई के लिए तीन जजों की पीठ गठित, चार सप्ताह बाद होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर बेसहारा पशुओं के आश्रय स्थल बनाने के आदेश पर एनएचएआई की याचिका पर सुनवाई के लिए तीन जजों की विशेष पीठ बनाने का फैसला किया है। इस मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी और याचिकाकर्ता एक सप्ताह में पुनः उत्तर दाखिल कर सकता है।
AI सार

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर बेसहारा पशुओं के लिए आश्रय स्थल बनाने के आदेश संबंधी एनएचएआई की याचिका पर सुनवाई के लिए तीन जजों की विशेष पीठ गठित की है। इस मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी और याचिकाकर्ता एक सप्ताह में पुनः उत्तर दाखिल कर सकता है।

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सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर सुनवाई / सोशल मीडिया

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सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर बेसहारा पशुओं के आश्रय स्थल बनाने के आदेश पर एनएचएआई की याचिका पर सुनवाई के लिए तीन जजों की विशेष पीठ बनाने का फैसला किया है। इस मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी और याचिकाकर्ता एक सप्ताह में पुनः उत्तर दाखिल कर सकता है।

विशेष पीठ गठित

राष्ट्रीय राजमार्गों पर बेसहारा पशुओं के लिए आश्रय स्थल बनाने के आदेश को चुनौती देते हुए एनएचएआई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सोमवार को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी की पीठ ने इस याचिका की सुनवाई के लिए विशेष पीठ गठित करने पर सहमति जताई। याचिकाकर्ता को एक सप्ताह में पुनः उत्तर दाखिल करने का अवसर दिया गया है।

एनएचएआई का पक्ष

एनएचएआई ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर बेसहारा पशुओं के आश्रय स्थल बनाने का कार्य स्थानीय जिला-स्तरीय प्रशासन की जिम्मेदारी है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि इस कार्य में लगभग 7,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। एनएचएआई ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव और प्रबंधन का कानूनी दायरा मुख्य रूप से यातायात और सड़क विकास तक सीमित है।

पूर्व आदेश और कानूनी संदर्भ

19 मई को जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने एक आदेश जारी किया था जिसमें बेसहारा पशुओं के प्रबंधन के लिए व्यापक रूपरेखा तैयार की गई थी। इस आदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों पर बेसहारा पशुओं की मौजूदगी से निपटने के लिए एनएचएआई को राज्यों के साथ मिलकर समयबद्ध व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया गया था।

अन्य सुप्रीम कोर्ट मामले

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के पूर्व सचिव की जमानत याचिका पर सीबीआई से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। इसके अलावा, तृणमूल कांग्रेस की याचिका पर भी जल्द सुनवाई के लिए सहमति जताई गई है। स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणीत मोरे की याचिका पर भी कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा है, जिसमें मोरे ने राष्ट्रीय महिला आयोग समेत सभी मंचों पर माफी मांग ली है।

इन निर्देशों का मतलब यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि उस पर राष्ट्रीय राजमार्गों पर जानवरों के लिए आश्रय स्थल, गौशाला, बाड़े या उनके लिए समर्पित विशेष वाहन रखने की कोई अलग जिम्मेदारी है

एनएचएआई, अधिकारियों

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पूर्व आदेश में बेसहारा पशुओं के प्रबंधन के बारे में क्या कहा गया था?
19 मई के आदेश में एनएचएआई को राज्यों के साथ मिलकर समयबद्ध व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया गया था।

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Published22 सितंबर 2026, 11:32 IST IST
Last updated22 सितंबर 2026, 11:32 IST IST
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