सुप्रीम कोर्ट ने स्थायी निवासी महिला के बांग्लादेश निर्वासन पर केंद्र को नोटिस जारी किया
महिला को अवैध घुसपैठिया बताकर बांग्लादेश भेजे जाने के मामले में चार सप्ताह में जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने एक स्थायी निवासी महिला को बांग्लादेश भेजे जाने के मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और चार सप्ताह में जवाब मांगा है। महिला ने दावा किया है कि वे भारत में कानूनी रूप से रह रही थीं और उनकी गिरफ्तारी एवं निर्वासन को अदालत में चुनौती दी गई है।
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पीटीआई। सुप्रीम कोर्ट ने स्थायी निवासी महिला को गैरकानूनी तरीके से बांग्लादेश भेजे जाने के मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने चार सप्ताह में जवाब देने को कहा है। यह सुनवाई गुरुवार को शुरू हुई।
याचिका में कहा गया है कि महिला हमेशा से भारत में कानूनी रूप से मौजूद थीं और उन्होंने कभी अवैध प्रवेश नहीं किया। उनके दादा का नाम 1952 के निर्वाचन रजिस्टर में दर्ज है। महिला की गिरफ्तारी और भारत से बांग्लादेश में बलपूर्वक निकासी को चुनौती दी गई है।
वरिष्ठ अधिवक्ता एस. मुरलीधर और प्रसन्न एस ने साहीं अख्तर का प्रतिनिधित्व किया, जिन्होंने अदालत से केंद्र और अन्य अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की कि महिला को अदालत के समक्ष पेश किया जाए। साथ ही बांग्लादेश से उनकी सुरक्षित, तात्कालिक और बिना शर्त वापसी के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं ताकि उन्हें स्वतंत्र किया जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से क्या मांगा है?
- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह में मामले का जवाब देने और महिला को अदालत के सामने पेश करने के निर्देश देने को कहा है।
- महिला को बांग्लादेश क्यों भेजा गया था?
- याचिका में आरोप लगाया गया है कि महिला को गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार कर बलपूर्वक बांग्लादेश भेजा गया था।
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