सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग की कस्टडी गोद लेने वाले माता-पिता को सौंपी
तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर नाबालिग बच्चे की कस्टडी उसे गोद लेने वाले पति-पत्नी को सौंपने का निर्देश दिया है। साथ ही बिहार पुलिस ने सभी थानों में बाल सहायता डेस्क स्थापित करने का निर्णय लिया है ताकि बच्चों को सुरक्षित और भयमुक्त माहौल मिल सके।
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पीटीआई। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट के 12 जून के आदेश को रद्द करते हुए नाबालिग बच्चे की कस्टडी उसे गोद लेने वाले पति-पत्नी को सौंपने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि बच्चे को उसकी जैविक मां ने पैसे की तंगी के कारण गोद दिया था।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
वराले की पीठ ने मोहम्मद अकबर और अन्य की अपील स्वीकार करते हुए तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश को रद्द किया। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने बच्चे को उसकी जैविक मां द्वारा पहले दो अपीलकर्ताओं को बेचने के शक पर कस्टडी में लिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे सही नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि यह मामला नहीं है जहां गोद लेने वालों ने बच्चे की देखभाल ठीक से नहीं की।
बिहार पुलिस की बाल सहायता पहल
बिहार के सभी पुलिस थानों में बाल सहायता डेस्क बनाए जाएंगे जो बच्चों को सुरक्षित और भयमुक्त माहौल देंगे। पुलिस मुख्यालय ने 2 अक्तूबर से यह व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया है। सभी जिलों से पांच अक्तूबर तक अनुपालन रिपोर्ट मांगी गई है। यह पहल सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के आदेश पर की जा रही है।
बाल सहायता डेस्क की विशेषताएं
बाल सहायता डेस्क लॉकअप से अलग होगी और बच्चों के अनुकूल रंगीन दीवारों से सजाई जाएगी। डेस्क पर बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी और जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी के नाम, पदनाम एवं मोबाइल नंबर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होंगे। महिला पुलिसकर्मी बालिकाओं से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए नियुक्त होंगी। मोबाइल नंबर सदैव सक्रिय रखे जाएंगे और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई होगी।
बाल संरक्षण के नियम
बच्चों की पहचान सार्वजनिक नहीं की जाएगी और उनके साथ अपराधी जैसा व्यवहार नहीं किया जाएगा। बाल सहायता डेस्क से बच्चों को संवेदनशील एवं प्रभावी पुलिसिंग मिलेगी। इससे थाने में बच्चों को भयमुक्त माहौल मिलेगा और उनकी शिकायतों का समयबद्ध निष्पादन होगा।
जिलों में डीएसपी (विशेष अपराध) तथा अन्य वरीय पदाधिकारी बाल सहायता डेस्क के कार्यों की नियमित निगरानी करेंगे
केएस अनुपम
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- बिहार पुलिस ने बाल सहायता डेस्क स्थापित करने का निर्णय क्यों लिया है?
- यह पहल सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के आदेशों के पालन में की जा रही है ताकि बच्चों को सुरक्षित और भयमुक्त माहौल मिल सके।
- बाल सहायता डेस्क का संचालन कब से बिहार के थानों में शुरू होगा?
- यह व्यवस्था 2 अक्तूबर से लागू होगी और सभी जिलों से पांच अक्तूबर तक अनुपालन रिपोर्ट मांगी जाएगी।
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