सुप्रीम कोर्ट ने वन कानून की वैधता पर सीमित सुनवाई का आदेश दिया
2023 के वन संरक्षण संशोधन अधिनियम की परिभाषा की संवैधानिक वैधता पर ही सुनवाई होगी
सुप्रीम कोर्ट ने 2023 के वन संरक्षण संशोधन अधिनियम में "वन" की परिभाषा की संवैधानिक वैधता की चुनौती तक सुनवाई सीमित रखने का आदेश दिया है। कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से वन भूमि का समेकित रिकॉर्ड तैयार करने के लिए विशेषज्ञ पैनल गठित करने को कहा है।
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पीटीआई। सुप्रीम कोर्ट ने 2023 के वन संरक्षण संशोधन अधिनियम के तहत वन की परिभाषा की संवैधानिक वैधता की चुनौती तक सुनवाई सीमित रखने का आदेश दिया है। यह फैसला बुधवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनाया।
वन कानून पर सुप्रीम कोर्ट का रुख
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीश जायमाल्या बागची और वी मोहन की पीठ ने कहा कि 2023 के वन संरक्षण संशोधन अधिनियम की परिभाषा 1996 के टीएन गोदावर्मन मामले में दी गई वन की परिभाषा को कमजोर करती है। पीठ ने कहा, "हम 1996 में इस न्यायालय द्वारा दी गई वन की परिभाषा के अनुसार चल रहे हैं।" उन्होंने उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है जिन्होंने विशेषज्ञ पैनल का गठन नहीं किया है कि वे वन, अनक्लास्ड और सामुदायिक वन भूमि का समेकित रिकॉर्ड तैयार करने के लिए पैनल गठित करें।
दिल्ली एसआईआर मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
दिल्ली में चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत करीब 33 लाख लोगों को 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' और 'अनमैप्ड' के कारण नोटिस भेजे जा रहे हैं। यह संख्या उन 42 लाख लोगों से अलग है जिनके नाम पहले ही वोटर सूची से हटाए जा चुके हैं। याचिका में आरोप है कि चुनाव आयोग नोटिस से जुड़े नियमों का पालन नहीं कर रहा है और जिन लोगों को नोटिस भेजे गए हैं, उनके नाम आयोग की वेबसाइट पर नहीं दिखाए गए हैं।
शिवसेना चुनाव चिन्ह विवाद
सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे विवाद में सवाल उठाया कि जब विधायकों की अयोग्यता की कार्यवाही लंबित हो, तब विधायी बहुमत को पार्टी के स्वामित्व का आधार कैसे माना जा सकता है। पीठ ने एकनाथ शिंदे गुट के वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल से पूछा कि चुनाव आयोग को बहुमत परीक्षण के लिए कौन सा तरीका अपनाना चाहिए। जस्टिस बागची ने यह भी पूछा कि यदि सभी परीक्षणों में सीमाएं हों तो दोनों गुटों को अलग-अलग चुनाव चिन्हों पर चुनाव लड़ने का विकल्प क्यों न दिया जाए।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि टीएन गोदावर्मन मामले में आदेश के अनुसार ही फैसला होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने वन कानून की संवैधानिक वैधता की चुनौती को प्राथमिकता दी है और मंगलवार को अन्य संबंधित मामलों के साथ सुनवाई करेगा।
वह 2023 के वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम के तहत "वन" की परिभाषा की संवैधानिक वैधता की चुनौती तक ही सीमित रहेगा और स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत भूमि के विवादों का निपटारा हाई कोर्ट ही करेंगे
सुप्रीम कोर्ट
इसे अन्य एसआईआर से जुड़े मामलों के साथ मंगलवार को सुना जाएगा.
जस्टिस ऑफ इंडिया
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- वन संरक्षण संशोधन अधिनियम की परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई क्यों सीमित की?
- सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनवाई पहले के 1996 के टीएन गोदावर्मन मामले में दी गई वन की परिभाषा को मान्यता देते हुए सीमित करने का निर्णय लिया है।
- दिल्ली एसआईआर प्रक्रिया में नोटिस भेजने का मकसद क्या है?
- नोटिस उन लोगों को भेजे जा रहे हैं जिनके वोटर सूची में 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' या 'अनमैप्ड' स्थिति है, ताकि उनकी जानकारी स्पष्ट की जा सके।
- शिवसेना चुनाव चिन्ह विवाद में सुप्रीम कोर्ट आगे क्या कर सकता है?
- सुप्रीम कोर्ट बहुमत परीक्षण के तरीकों पर जवाब मांग रहा है और दोनों गुटों को अलग-अलग चुनाव चिन्ह देने का विकल्प भी विचार में रख रहा है।
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