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सुप्रीम कोर्ट ने अरावली समिति को 30 नवंबर तक रिपोर्ट देने को कहा

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कमेटी को अंतिम समयसीमा का पालन करने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की परिभाषा और सीमांकन तय करने वाली समिति को 30 नवंबर तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह समयसीमा अंतिम है और इसके बाद कोई विस्तार नहीं मिलेगा।
AI सार

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की परिभाषा और सीमांकन तय करने वाली समिति को 30 नवंबर तक रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है और कहा है कि यह समयसीमा अंतिम है। कोर्ट ने सभी पक्षों, विशेषकर राजस्थान और गुजरात के आदिवासी समुदायों की राय लेने पर जोर दिया है। अरावली पर्वतमाला के पर्यावरण संरक्षण और खनन नियमन से जुड़े इस मामले में समिति को अब और विस्तार नहीं मिलेगा।

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सुप्रीम कोर्ट में अरावली समिति की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में अरावली समिति की सुनवाई / सोशल मीडिया

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सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की परिभाषा और सीमांकन तय करने वाली समिति को 30 नवंबर तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह समयसीमा अंतिम है और इसके बाद कोई विस्तार नहीं मिलेगा।

अदालत ने कहा है कि समिति को दिन-रात काम करके तय समयसीमा में रिपोर्ट पूरी करनी होगी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कमेटी पर सख्ती दिखाते हुए कहा कि समिति ने जैसे उनके रिटायर होने तक का समय मांग लिया हो। उन्होंने कहा, "मेरे रिटायर होने का इंतजार है क्या, दिन-रात काम करो।" कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि अगर किसी खास मुद्दे पर तुरंत फैसला लेना जरूरी हो तो कमेटी उस विषय पर अंतरिम रिपोर्ट भी दाखिल कर सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली से जुड़े अहम विषयों पर सभी पक्षों और स्टेकहोल्डर्स की राय लेने पर जोर दिया है। इसमें राजस्थान और गुजरात के आदिवासी समुदाय भी शामिल हैं। कोर्ट ने संकेत दिया कि स्थानीय समुदायों और प्रभावित पक्षों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

यह मामला अरावली पर्वतमाला की समान परिभाषा और सीमांकन से जुड़ा है, जिसका पर्यावरण संरक्षण और खनन गतिविधियों के नियमन से सीधा संबंध है। मई 2026 में पांच सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया गया था, जिसे यह काम सौंपा गया है।

केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि समिति ने एक अंतरिम रिपोर्ट तैयार कर ली है, लेकिन प्रभावित पक्षों से प्रभावी बातचीत के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। अदालत ने यह अनुरोध खारिज कर दिया और साफ किया कि अब कोई और समय नहीं दिया जाएगा।

अरावली पर्वतमाला उत्तर-पश्चिम भारत के लिए महत्वपूर्ण पारिस्थितिक क्षेत्र है, जो शुष्क और रेगिस्तानी इलाकों तथा उपजाऊ मैदानी क्षेत्रों के बीच प्राकृतिक अवरोध का काम करता है।

पत्रकार नीतीश कुमार आठ साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हैं और लोकसभा तथा विधानसभा चुनावों की कवरेज कर चुके हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

समिति ने अतिरिक्त समय क्यों मांगा था?
अतिरिक्त समय प्रभावित पक्षों से प्रभावी बातचीत के लिए मांगा गया था।
क्या समिति अंतरिम रिपोर्ट भी दाखिल कर सकती है?
हां, कोर्ट ने कहा है कि यदि किसी खास मुद्दे पर तुरंत फैसला जरूरी हो तो समिति अंतरिम रिपोर्ट दाखिल कर सकती है।
कोर्ट ने स्थानीय समुदायों की भूमिका को कैसे महत्व दिया है?
कोर्ट ने कहा कि राजस्थान और गुजरात के आदिवासी समुदाय समेत सभी स्टेकहोल्डर्स की राय ली जाएगी और उनकी आवाजे नजरअंदाज नहीं की जाएंगी।
अरावली पर्वतमाला किस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है?
यह पर्वतमाला उत्तर-पश्चिम भारत के शुष्क, रेगिस्तानी और उपजाऊ मैदानी इलाकों के बीच प्राकृतिक अवरोध का काम करता है।

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Published8 सितंबर 2026, 00:08 IST IST
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