सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में की खुदकुशी, निठारी कांड फिर चर्चा में
नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने कोली को बरी कर रिहा किया था, अब मामला फिर सुर्खियों में
नोएडा के निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में खुदकुशी कर ली है। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में कोली को अंतिम मुकदमे में बरी कर रिहा किया था। यह मामला 2006 में निठारी गांव में कई बच्चों के कंकाल मिलने के बाद शुरू हुआ था और अब फिर से चर्चा में आया है।
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नोएडा के निठारी कांड का आरोपी सुरेंद्र कोली शुक्रवार को हरिद्वार में खुदकुशी कर लिया। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने क्यूरेटिव पिटीशन पर सुनवाई के बाद कोली को अंतिम केस में बरी कर रिहा किया था। इस मामले ने देश को झकझोर दिया था और अब फिर चर्चा में आ गया है।
निठारी कांड में वर्ष 2004 से निठारी गांव के बच्चे लापता हो रहे थे। परिजन थाना सेक्टर-20 पुलिस से लेकर बड़े अधिकारियों तक शिकायत करते रहे, लेकिन पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज करने के बजाय परिजनों को दुत्कार कर भगा दिया। गायब हुए बच्चों में अधिकतर लड़कियां थीं।
पायल नाम की युवती भी निठारी की पानी की टंकी के पास से लापता हो गई थी। उसके पिता नंदलाल ने डी-5 सेक्टर-31 कोठी के मालिक और जेसीबी के बड़े डिस्ट्रीब्यूटर मोनिंदर सिंह पंधेर पर बेटी के अपहरण का शक जताते हुए पुलिस से शिकायत की, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई के बजाय नंदलाल को ही बेटी से देह व्यापार करने का आरोप लगाकर भगा दिया।
हाईकोर्ट ने मामले की रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए और सीओ स्तर के अधिकारी को प्रगति आख्या के साथ कोर्ट में बुलाया। 15 दिसंबर को अधिकारियों ने मोनिंदर सिंह और नौकर सुरेंद्र कोली से पूछताछ की, लेकिन दबाव के चलते रात में ही उन्हें छोड़ दिया गया। वर्ष 2023 में मोनिंदर सिंह पंधेर भी निठारी कांड के सभी मामलों से बरी हो चुका है।
निठारी कांड वर्ष 2006 में सुर्खियों में आया जब नोएडा के निठारी गांव में कई बच्चों के कंकाल मिले। पुलिस ने पंधेर और सुरेंद्र कोली को आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया था। ज्योति की मां सुनीता ने बताया कि थाने में पंधेर और कोली ने पैर पकड़कर कहा था कि उनसे गलती हो गई।
हाईकोर्ट में पुलिस ने रिपोर्ट पेश की थी जिसमें कोठी मालिक और नौकर को क्लीन चिट देने का प्रयास करते हुए नंदलाल को ही आरोपी बनाने की कोशिश की गई। हाईकोर्ट ने नंदलाल के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई की और पुलिस को प्रगति आख्या देने को कहा।
इस बीच लापता हुई पायल का मोबाइल फोन चालू हो गया था। पुलिस टीम उस फोन तक पहुंची और 29 दिसंबर को डी-5 कोठी के नौकर सुरेंद्र कोली तक पहुंच गई। पुलिस ने उसे मालिक मोनिंदर सिंह के साथ सीओ ऑफिस में मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की, जिसमें कोली ने पायल के कत्ल सहित अन्य लापता बच्चों के कत्ल की कहानी बताई। पुलिस सुबह मारे गए बच्चों के कंकाल बरामद करने पहुंची।
डी-5 कोठी अब खंडहर में तब्दील हो चुकी है। कोठी के सामने से गुजरने वाले बच्चे अब डरते नहीं। कोठी भूत बंगले जैसी वीरान और उजड़ी हुई नजर आती है। अंदर खड़ी पंधेर की कार धूल की परतों से ढकी हुई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- निठारी कांड में पुलिस ने परिजनों की शिकायतों पर क्या کارروाई की?
- पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज करने के बजाय कई बार परिजनों को दुत्कारकर भगा दिया।
- पायल की पिता ने किस पर अपहरण का शक जताया था?
- नंदलाल ने मोनिंदर सिंह पंधेर पर बेटी के अपहरण का शक जताया था।
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