सुप्रीम कोर्ट में चुनौती 2000 रुपये से अधिक के UPI शुल्क की
केंद्र सरकार की अधिसूचना को याचिका में रद्द करने की मांग, 15 अक्टूबर से 0.4 प्रतिशत MDR लागू
सुप्रीम कोर्ट में 2000 रुपये से अधिक के कमर्शियल UPI लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने को चुनौती दी गई है। याचिका में केंद्र सरकार की गजट अधिसूचनाओं को रद्द करने और प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था पर रोक लगाने की मांग की गई है। कोर्ट ने मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की है।
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सुप्रीम कोर्ट में 2000 रुपये से अधिक के कमर्शियल UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने के फैसले को चुनौती दी गई है। याचिका में वित्त मंत्रालय की 14 और 15 सितंबर को जारी गजट अधिसूचनाओं को रद्द करने की मांग की गई है। केंद्र सरकार ने 15 अक्टूबर 2026 से 0.4 प्रतिशत की मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फीस लागू करने का प्रस्ताव रखा है।
याचिका और विवाद
इसके साथ ही 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन के लिए अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में इस अधिसूचना को चुनौती देते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। याचिका में केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस को प्रतिवादी बनाया गया है।
याचिकाकर्ता का पक्ष
हालांकि, उनका तर्क है कि इस शुल्क के लागू होने से कैश भुगतान को बढ़ावा मिल सकता है, जो डिजिटल लेनदेन के लिए हानिकारक होगा। याचिका में प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था पर स्टे लगाने की भी मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस नरसिम्हा ने याचिकाकर्ता पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे हर सप्ताह एक जनहित याचिका दाखिल कर रहे हैं और सवाल किया कि क्या याचिकाएं दाखिल करने से पहले उनके प्रार्थनाओं पर उचित विचार किया जाता है। इस मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए केंद्र सरकार ने विशेष अनुमति याचिका दाखिल की है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मामले को जल्द सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है।
14 सितंबर को एक गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया था
अंजन दत्ता
यह तर्क दिया जा रहा है कि शुल्क बहुत मामूली हैं और UPI प्लेटफॉर्म को बनाए रखने के लिए इनकी जरूरत है
याचिकाकर्ता
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की क्या प्रतिक्रिया रही है?
- सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर टिप्पणी की है कि वे बार-बार जनहित याचिका दाखिल कर रहे हैं, और शुल्क मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए विशेष अनुमति याचिका भी दाखिल की गई है।
- यदि कोई विवाद या समस्या हो तो किन संस्थाओं से संपर्क किया जा सकता है?
- इस मामले में केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस मुख्य संबंधित संस्थाएँ हैं।
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