चूरू में शिक्षक संघ ने सार्वजनिक शिक्षा मजबूत करने पर जोर दिया
राजस्थान शिक्षक संघ के जिला स्तरीय सम्मेलन में शिक्षा और शिक्षक हितों से जुड़े प्रस्ताव पारित
चूरू में राजस्थान शिक्षक संघ के जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन का समापन हुआ, जिसमें सार्वजनिक शिक्षा को मजबूत करने और शिक्षक हितों पर चर्चा हुई। मंत्री शुभकरण नैण ने सामाजिक विषमता बढ़ने और उसके शिक्षा पर प्रभाव की चिंता व्यक्त की। सम्मेलन में शिक्षक समस्याओं के समाधान, महिला शिक्षिकाओं की भागीदारी और सरकारी शिक्षा संसाधनों में सुधार पर भी विचार-विमर्श हुआ।
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चूरू। चूरू में राजस्थान शिक्षक संघ के जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन का समापन सत्र शनिवार को हुआ। मंत्री शुभकरण नैण ने सामाजिक विषमता बढ़ने और उसके शिक्षा पर प्रभाव पर चिंता जताई। सम्मेलन में शिक्षक हितों और सार्वजनिक शिक्षा को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
जाट भवन में आयोजित इस सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सीगड़ ने की। जिला मंत्री वेदपाल मलिक ने सम्मेलन का एजेंडा प्रस्तुत किया। उप शाखा अध्यक्ष संजय खीचड़ और मंत्री सतीश जांगिड़ ने आभार व्यक्त किया। सम्मेलन की परंपरा के अनुसार अगले वर्ष के आयोजन के लिए संगठन का ध्वज तारानगर उपशाखा अध्यक्ष बनवारीलाल फगेड़िया को सौंपा गया।
सम्मेलन में शिक्षक हितों, विद्यार्थी कल्याण, महिला शिक्षिकाओं की भागीदारी और सार्वजनिक शिक्षा को मजबूत करने सहित विभिन्न शैक्षिक मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त जिला शिक्षा अधिकारी सांवरमल गहनोलिया ने राजस्थान शिक्षक संघ अंबेडकर के इतिहास और विचारधारा की जानकारी दी। मुख्य वक्ता डॉ. लता और डॉ. सुरेंद्र, दिल्ली विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर, ने शिक्षक संघों की भूमिका और सार्वजनिक शिक्षा को बचाने में शिक्षकों की जिम्मेदारी पर विचार व्यक्त किए।
प्रदेश उपाध्यक्ष मान सिंह मेहरा ने शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट होकर काम करने और शिक्षक हितों के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया। शिक्षाविद पुष्पलता मंडार ने महिला शिक्षिकाओं की संगठन में सक्रिय भागीदारी का महत्व बताया। प्रदेश प्रभारी धनराज लोहिया ने राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचाने की अपील की।
सम्मेलन में अभिचेतना ग्रुप की बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित शिक्षकों और अतिथियों का मन मोह लिया। सम्मेलन के दूसरे दिन जिले भर से आए सेवानिवृत्त वरिष्ठ शिक्षक साथियों का सम्मान किया गया। सम्मानितों में सांवरमल गहनोलिया, गजानंद खेड़ीवाल, कमला खेड़ीवाल, छगन लाल बसेर, डालूराम, मनीराम इंदलिया, ओमप्रकाश कलिया, मदनलाल तालनियां, शिवकरण जांगिड़, भगीरथ चौहान, मेघराज गूंसाईवाला, हंसराज मौर्य, नानूराम कांटीवाल और चेतराम शामिल थे।
नारायण मेघवाल अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी ने भी विचार व्यक्त किए। इस मौके पर चूरू जिले की विभिन्न उपशाखाओं के पदाधिकारी और शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित थे। संचालन मुरारी सांडेला और सांवरमल बरोड़ ने किया। सम्मेलन में सभी शिक्षकों ने 20 सूत्री मांग भी रखी।
सोनू जिलोवा ने कहा कि शिक्षा को बाजार की वस्तु बनाने के बजाय प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण और समान शिक्षा पहुंचाने की दिशा में काम होना चाहिए। मंत्री शुभकरण नैण ने बताया कि देश में सामाजिक विषमता बढ़ रही है और इसका सीधा प्रभाव शिक्षा पर पड़ रहा है। नेता ओमप्रकाश मुहाल ने कहा कि शिक्षक केवल अपने अधिकारों के लिए नहीं, बल्कि सार्वजनिक शिक्षा और भावी पीढ़ी के भविष्य की रक्षा के लिए भी संगठित होकर अपनी भूमिका निभाएं।
सदस्य महेंद्र पूनिया ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकारी स्कूलों में आवश्यक संसाधन उपलब्ध करवाने, रिक्त पदों को भरने और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की जरूरत है। जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सीगड़ ने बताया कि राजस्थान शिक्षक संघ सार्वजनिक शिक्षा की मजबूती, शिक्षक हितों की रक्षा और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए लगातार संघर्ष करता रहेगा। जिलाध्यक्ष राकेश किलानिया ने कहा कि संघ अंबेडकर शिक्षक व शिक्षार्थी हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- शैक्षिक सम्मेलन का समापन सत्र कब हुआ?
- समापन सत्र शनिवार को हुआ था, जिसमें जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सीगड़ ने अध्यक्षता की।
- सम्मेलन में किन मुख्य वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए?
- डॉ. लता और डॉ. सुरेंद्र जिन्होंने शिक्षक संघों की भूमिका और सार्वजनिक शिक्षा पर चर्चा की।
- शिक्षक संघ ने किस तरह की मांगें रखीं?
- सम्मेलन में सभी शिक्षकों ने 20 सूत्री मांग रखी जो शिक्षा सुधार और शिक्षक हितों से संबंधित हैं।
- सम्मेलन में कौन-कौन से सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए?
- अभिचेतना ग्रुप की बालिकाओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।
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