करौली में विराजमान बैठे हनुमान की अद्वितीय प्रतिमा
भद्रावती नदी के तट पर स्थित यह मंदिर भक्तों के लिए चमत्कारी माना जाता है
राजस्थान के करौली में भद्रावती नदी के किनारे एक प्राचीन मंदिर में विराजमान बैठे हनुमान की प्रतिमा स्थित है, जिसे देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। यह मंदिर और प्रतिमा करौली की धार्मिक परंपरा का हिस्सा हैं और स्थानीय लोगों के लिए आस्था का केंद्र हैं।
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करौली। राजस्थान के करौली में भद्रावती नदी के किनारे एक प्राचीन मंदिर में विराजमान बैठे हनुमान की प्रतिमा देश-विदेश से भक्तों को आकर्षित करती है। स्थानीय लोग और इतिहासकार इस प्रतिमा को अद्वितीय और चमत्कारी मानते हैं।
करौली की धार्मिक नगरी में कई प्राचीन हनुमान मंदिर हैं, लेकिन भद्रावती नदी के तट पर स्थित यह मंदिर अपनी स्वयंभू और विश्राम मुद्रा में विराजमान हनुमान की प्रतिमा के कारण खास है। इसे बैठे हनुमान के नाम से जाना जाता है।
भक्तों का कहना है कि केवल दर्शन मात्र से ही यहां की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जो एक बार दर्शन कर लेता है, उसका इस प्रतिमा से गहरा जुड़ाव हो जाता है। स्थानीय हरि बल्लभ गुप्ता ने बताया कि उन्होंने अपने 75 साल के जीवन में ऐसी प्रतिमा कहीं नहीं देखी। वे कहते हैं कि यह प्रतिमा आपदाओं को टालने में भी मदद करती है।
स्थानीय निवासी शिवम शर्मा ने बताया कि देश-विदेश से भक्त यहां दर्शन करने आते हैं और इस तरह की प्रतिमा भारत में केवल करौली में ही है। शनिवार और मंगलवार को यहां भक्तों की खास भीड़ रहती है, जबकि नवरात्रि के दौरान अखंड रामायण पाठ के समय सबसे ज्यादा श्रद्धालु आते हैं।
करौली से बाहर रोजगार के कारण दूर रहने वाले लोग दीपावली और दशहरे के दिन भी इस मंदिर में दर्शन करने जरूर आते हैं। मंदिर में बैठे हनुमान के साथ एक प्राचीन शिवालय भी है, जिसे रियासतकालीन बताया जाता है। मंदिर में पहले केवल मनकामेश्वर महादेव की पूजा होती थी, खासकर सावन में रानियां पंचमुखी भोलेनाथ की आराधना करती थीं।
करौली के वरिष्ठ इतिहासकार वेणुगोपाल शर्मा ने बताया कि लगभग 1747 में करौली के राजा गोपाल सिंह को एक रात सपना आया था, जिसमें अखाड़े से बैठे हनुमान की मूर्ति प्रकट हुई। मूर्ति को मंडरायल दुर्ग में स्थापित करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन रास्ते में जहां आज यह मंदिर है, वहां बैलगाड़ियों के पहिए अचानक खुल गए और मूर्ति वहीं विराजमान हो गई।
यह मंदिर और इसकी प्रतिमा करौली के इतिहास और धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो स्थानीय और दूर-दूर के भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बने हुए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- यह हनुमान प्रतिमा क्यों खास मानी जाती है?
- यह प्रतिमा स्वयंभू है और विश्राम मुद्रा में विराजमान है, जो भारत में दुर्लभ है।
- मंदिर में अन्य कौन-कौन से धार्मिक स्थल हैं?
- मंदिर में एक प्राचीन शिवालय भी है, जो रियासतकालीन माना जाता है।
- भक्त इस मंदिर में कब ज्यादा आते हैं?
- शनिवार, मंगलवार को और नवरात्रि में अखंड रामायण पाठ के दौरान सबसे ज्यादा श्रद्धालु आते हैं।
- दूर रहने वाले लोग किस अवसर पर दर्शन के लिए आते हैं?
- करौली से दूर रोजगार के कारण दूर रहने वाले लोग विशेषकर दीपावली और दशहरे के दिन दर्शन कर मंदिर आते हैं।
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