अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी की अफीम रोकथाम की कोशिशों की सराहना की
अमेरिका ने भारत को अवैध नशीले पदार्थों की सूची में रखा, फिर भी मोदी सरकार के प्रयासों की तारीफ की
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अवैध अफीम की खेती रोकने और आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने के प्रयासों की सराहना की है। अमेरिका की रिपोर्ट में भारत को उन 23 देशों में शामिल किया गया है जहाँ नशीले पदार्थों का उत्पादन या तस्करी होती है, लेकिन भारत को 'साफ तौर पर नाकाम' देशों की श्रेणी में नहीं रखा गया है। अमेरिका और भारत के बीच नशीले पदार्थों पर सहयोग पहले से जारी है, जिसमें इस समस्या से निपटने के लिए खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान पर बल दिया गया है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अवैध अफीम की खेती रोकने और आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने के प्रयासों की सराहना की है। यह तारीफ 15 सितंबर को अमेरिका को भेजी गई एक रिपोर्ट के बाद आई, जिसमें भारत सहित 23 देशों का नाम था।
अमेरिका की रिपोर्ट में भारत को उन देशों में शामिल किया गया है जिनमें अवैध नशीले पदार्थों का उत्पादन या तस्करी होती है। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि सूची में शामिल होना यह नहीं दर्शाता कि किसी देश की सरकार नशीले पदार्थों के खिलाफ काम नहीं कर रही।
अफगानिस्तान, चीन, कोलंबिया, मैक्सिको, पाकिस्तान, म्यांमार और भारत जैसे देश इस सूची में हैं। भारत को 'साफ तौर पर नाकाम' देशों की श्रेणी में नहीं रखा गया है, जिसमें अफगानिस्तान, बोलीविया, बर्मा, कोलंबिया और वेनेजुएला शामिल हैं।
ट्रंप ने कहा, "मैं प्रधानमंत्री मोदी और भारत सरकार के उन प्रयासों का स्वागत करता हूं, जिनसे अवैध अफीम की खेती पर रोक लगाई जा रही है और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जा रहा है।" उन्होंने यह भी कहा कि "इस हमले के लिए जिम्मेदार नार्को-टेररिस्ट या तो मर चुके हैं, जेल में हैं, या इस डर में जी रहे हैं कि अमेरिकी न्याय का सामना करने वाले अगले वे ही होंगे।"
भारत और अमेरिका के बीच नशीले पदार्थों पर सहयोग पहले से जारी है। जनवरी 2026 में वाशिंगटन में अमेरिका-भारत ड्रग पॉलिसी कार्य समूह की पहली बैठक हुई थी, जिसमें दोनों पक्षों ने अवैध दवाओं, उनके कच्चे रसायनों और तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने पर जोर दिया था।
भारत में अफीम की खेती पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है। सरकार कुछ इलाकों में लाइसेंस देकर अफीम उगाती है ताकि दवा बनाने के लिए कच्चा माल उपलब्ध हो सके। समस्या तब होती है जब इसके साथ अवैध खेती या तस्करी जुड़ जाती है।
अमेरिका ने फेंटानिल जैसी सिंथेटिक दवाओं और उनके बनाने वाले रसायनों को बड़ी राष्ट्रीय समस्या बताया है। इस कारण वह भारत जैसे देशों से सख्त निगरानी, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान और आपूर्ति श्रृंखला की जांच चाहता है। भारत दुनिया के बड़े दवा उत्पादक देशों में से एक है, इसलिए अमेरिका की नजर फार्मा और केमिकल सेक्टर पर भी रहती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- भारत में अफीम की खेती कैसा प्रबंधित है?
- भारत में अफीम की खेती पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है, बल्कि कुछ इलाकों में लाइसेंस देकर दवा बनाने के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराया जाता है।
- ट्रंप ने नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई को कैसे बताया?
- ट्रंप ने कहा कि जिम्मेदार नार्को-टेररिस्ट मरे, जेल में हैं, या अमेरिकी न्याय का सामना करने से डर रहे हैं।
- अमेरिका को भारत में कौन-से क्षेत्र में खास रुचि है?
- अमेरिका फार्मा और केमिकल सेक्टर पर नजर रखता है, खासकर फेंटानिल जैसी सिंथेटिक दवाओं और रसायनों की निगरानी के लिए।
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