ट्रंप ने रूस-ईरान तेल आयात पर 100% टैरिफ कानून को दी मंजूरी
भारत की नजरें राष्ट्रपति ट्रंप के अंतिम फैसले पर, ऊर्जा सुरक्षा को लेकर तैयारियां जारी
अमेरिका ने रूस और ईरान से तेल आयात पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का कानून पारित किया है, जिसका असर भारत पर भी पड़ सकता है। भारत ने रूस से तेल खरीदने की अपनी नीति में बदलाव से इनकार किया है और इस फैसले के प्रभावों का आकलन कर रहा है। चीन ने इस कानून का विरोध किया है और कहा है कि इसे संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी नहीं मिली है।
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अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस और ईरान से तेल आयात पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का कानून पारित किया है। अब भारत की निगाहें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस बिल पर हस्ताक्षर और अंतिम नीति पर टिकी हैं। भारतीय अधिकारी इस फैसले के प्रभाव और संभावित दबावों का सामना करने के लिए हर विकल्प पर विचार कर रहे हैं।
कानून और उसकी विशेषताएं
यह कानून रूस और ईरान से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रावधान करता है। हालांकि, यह भारतीय सामानों पर 100 प्रतिशत टैरिफ नहीं लगाता। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को हर 180 दिनों में रूस से तेल खरीदने वाले देशों की सूची की समीक्षा करनी होगी, जिससे भारत पर कूटनीतिक और आर्थिक दबाव बना रहेगा। इस बिल में रूस की शैडो फ्लीट से जुड़ी नौकाओं के खिलाफ भी कदम शामिल हैं, जो पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद ऊर्जा निर्यात में मदद करती हैं।
भारत की प्रतिक्रिया और द्विपक्षीय संबंध
भारतीय अधिकारी रूस से तेल खरीदने की नीति में बदलाव की संभावना से साफ इनकार कर रहे हैं। एक अधिकारी ने बताया, "अगर अंतिम तौर पर भारत पर सौ फीसद शुल्क लगा दिया जाता है तो उसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर होगा, लेकिन तब भारत अपने आर्थिक फैसले लेने और 1.40 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरत को पूरा करने के लिए स्वतंत्र होगा।" विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि हाल के महीनों में इस मुद्दे पर अमेरिकी पक्षकारों से उच्च स्तर पर चर्चा हो चुकी है और भारत ने संभावित प्रभाव स्पष्ट कर दिया है।
चीन का रुख और वैश्विक प्रभाव
चीन ने इस कार्रवाई का विरोध किया है और कहा है कि वह ऐसी किसी भी कार्रवाई का समर्थन नहीं करता जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी न मिली हो। चीन के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा, "चीन समानता और पारस्परिक लाभ के आधार पर दूसरे देशों के साथ सामान्य आर्थिक और व्यापारिक सहयोग करता है।" इस कानून के पारित होने से अमेरिका-भारत संबंधों में तल्खी बढ़ी है और द्विपक्षीय कारोबारी समझौता अटका हुआ है। इसके अलावा, जी-20 शिखर सम्मेलन में रूस और चीन के भाग लेने की संभावना कम होती जा रही है।
भारत अपने व्यापारिक और आर्थिक हितों की बेहतरी के लिए कोई भी कदम उठा सकता है
विदेश मंत्रालय, प्रवक्ता
यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं है
सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल, अमेरिकी सांसद
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- भारत इस प्रतिबंध के असर को कैसे संभालेगा?
- भारतीय अधिकारी इस फैसले के प्रभावों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण कर हर विकल्प पर विचार कर रहे हैं ताकि आर्थिक और ऊर्जा आवश्यकताएं पूरी की जा सकें।
- चीन ने इस कानून पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
- चीन ने इस कानून का विरोध किया है और इसे बिना संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी के कार्रवाई बताया है।
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