धौलपुर की कॉलोनियों में जलभराव से लोग परेशान
लीला बिहार कॉलोनी में पानी जमा, फसलों को भी भारी नुकसान
धौलपुर के कई क्षेत्रों में लगातार बारिश के बाद जलभराव और निकासी की समस्या बनी हुई है, जिससे लोगों को घरों से निकलने में कठिनाई हो रही है और बीमारी का खतरा बढ़ गया है। जिले के किसानों की खरीफ फसलें जलभराव के कारण खराब हो रही हैं, जिससे उनके आर्थिक हालात प्रभावित हो रहे हैं और वे प्रशासन से त्वरित मुआवजा व राहत की मांग कर रहे हैं।
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धौलपुर। धौलपुर शहर की कई कॉलोनियों में बारिश के बाद भी जलभराव की समस्या बनी हुई है। लीला बिहार कॉलोनी में लंबे समय से पानी जमा होने से लोग घरों से निकलने में दिक्कत महसूस कर रहे हैं और बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि कॉलोनी में जलभराव के साथ गंदगी और कीचड़ की समस्या भी है। पानी निकासी का सही इंतजाम न होने से बारिश का पानी कई दिनों तक जमा रहता है। मच्छरों की संख्या बढ़ने से कई परिवारों को परेशानी हो रही है। उन्होंने प्रशासन से जलभराव दूर करने, मच्छरों से बचाव के लिए दवा छिड़काव और सफाई कराने की मांग की है।
जिले में लगातार हुई बारिश का दौर थम गया है, लेकिन खेतों में तबाही के निशान अब भी साफ नजर आ रहे हैं। जलभराव के कारण खरीफ की फसलें बर्बाद होने के कगार पर हैं। किसान पकी फसल को पानी से बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। कहीं टब का सहारा लेकर बाजरे की बालियां काटी जा रही हैं तो कहीं खेत में घुटनों तक पानी में खड़े होकर फसल बचाने की कोशिश हो रही है।
किसानों ने बताया कि खरीफ सीजन की शुरुआत अच्छी रही थी और उन्होंने खाद, यूरिया, कीटनाशक सहित अन्य सामग्री पर बड़ी राशि खर्च की थी। मौसम भी अनुकूल था, लेकिन अगस्त से शुरू हुई तेज बारिश और जलभराव ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। बाजरा, दलहन, तिलहन, ग्वार और ज्वार सहित फसलों की स्थिति बेहतर थी, लेकिन लगातार बारिश से खेतों में पानी भर गया। कई दिनों तक जलभराव रहने से फसलें खराब हो गई हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में खेती के साथ मवेशी पालन किसानों की आय का प्रमुख सहारा है, लेकिन बारिश और जलभराव ने इस व्यवस्था को भी प्रभावित किया है। खेतों में खड़ा हरा चारा पानी में डूबने के बाद सड़ गया है, जिससे पशुपालकों के सामने चारे का संकट खड़ा हो गया है। किसान संदीप कुशवाह ने बताया कि फसल खराब होने के साथ पशुओं के लिए चारा भी उपलब्ध नहीं है। इससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ा है।
जिले के बसेड़ी और सैपऊ उपखंड क्षेत्र में स्थिति ज्यादा गंभीर है। निचले इलाकों में पानी जमा होने से बड़ी संख्या में खेत जलमग्न हो गए हैं। बसेड़ी उपखंड के कई गांवों के खेतों में जलभराव बना हुआ है। इसी तरह सैपऊ उपखंड के कई गांवों में खेत पानी में डूबे हुए हैं।
अधिकारी धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि जिले में फसल खराबे के आकलन के लिए कमेटी गठित कर दी गई है। प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी जुटाई जा रही है। जिन किसानों ने फसल बीमा कराया है, उनकी जानकारी भी एकत्र की जा रही है। किसानों ने प्रशासन और सरकार से प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सर्वे करवाकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सर्वे केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि खेत-खेत जाकर वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाए। किसानों ने फसल बीमा का लाभ दिलाने के साथ सरकार से उचित मुआवजा और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था कराने की भी मांग की है।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार की ओर से समय रहते उचित मुआवजा और राहत उपलब्ध नहीं कराई गई तो कई परिवारों के सामने आर्थिक संकट और पलायन जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- जलभराव से स्थानीय लोगों को क्या समस्याएं हो रही हैं?
- जलभराव के कारण कीचड़ और गंदगी बढ़ रही है, जिससे मच्छरों की संख्या बढ़ी है और लोग बीमार होने का डर महसूस कर रहे हैं।
- किसानों को जलभराव के कारण कौन-कौन सी फसलों का नुकसान हो रहा है?
- बाजरा, दलहन, तिलहन, ग्वार और ज्वार जैसी खरीफ फसलें जलभराव से प्रभावित हो रही हैं।
- पशुपालकों को जलभराव से क्या दिक्कत हो रही है?
- खेतों में हरा चारा पानी में डूबने के कारण सड़ गया है, जिससे पशुपालकों के लिए चारे की कमी हो गई है।
- प्रशासन ने जलभराव और फसल नुकसान से निपटने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
- प्रशासन ने फसल खराबे का आकलन करने के लिए कमेटी बनाई है और प्रभावित किसानों की जानकारी एकत्र की जा रही है।
- अगर सरकार ने मुआवजा नहीं दिया तो किसानों को क्या खतरा है?
- किसानों ने चेतावनी दी है कि मुआवजा न मिलने पर आर्थिक संकट और पलायन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
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