धर्म / अध्यात्म 2 MIN READ

17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा, देवताओं के शिल्पकार की आराधना

भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का प्रथम वास्तुकार माना जाता है, उनकी पूजा से व्यापार में सफलता मिलती है

हर साल 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा का पर्व मनाया जाता है। इस दिन मशीनों, औजारों और वाहनों की साफ-सफाई कर उनकी पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवताओं के अस्त्र-शस्त्र से लेकर भव्य महल और सिंहासन बनाने का श्रेय विश्वकर्मा जी को ही जाता है।
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हर साल 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा मनाई जाती है, जिसमें मशीनों, औजारों और वाहनों की साफ-सफाई कर उनकी पूजा की जाती है। भगवान विश्वकर्मा को सनातन धर्म में देवताओं के शिल्पकार और ब्रह्मांड का प्रथम इंजीनियर माना जाता है। इस दिन अभिजीत मुहूर्त में उनकी आरती और पूजा से व्यापार में सफलता और शांति की कामना की जाती है।

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विश्वकर्मा पूजा का पर्व
विश्वकर्मा पूजा का पर्व / प्रतीकात्मक चित्र · निहारिका टाइम्स

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हर साल 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा का पर्व मनाया जाता है। इस दिन मशीनों, औजारों और वाहनों की साफ-सफाई कर उनकी पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवताओं के अस्त्र-शस्त्र से लेकर भव्य महल और सिंहासन बनाने का श्रेय विश्वकर्मा जी को ही जाता है।

सनातन धर्म में भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड का पहला इंजीनियर या वास्तुकार माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उन्होंने स्वर्ग, लंका और द्वारका जैसी दिव्य नगरी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। कहा जाता है कि रावण की सोने की लंका, श्रीकृष्ण की सुंदर द्वारिका नगरी और पांडवों के लिए रहस्यमयी इंद्रप्रस्थ का निर्माण भी भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था।

विश्वकर्मा पूजा के दिन अभिजीत मुहूर्त में उनकी आरती करने से सभी कष्ट दूर होते हैं, मन को शांति मिलती है और व्यापार में अपार सफलता प्राप्त होती है। इस दिन विशेष रूप से मशीनों, औजारों, कंप्यूटर और वाहनों की साफ-सफाई करके उनकी पूजा करने का विधान है।

आरती के बोल हमें याद दिलाते हैं कि भगवान विश्वकर्मा ने कैसे महर्षि अंगिरा को शांति प्रदान की थी और संकट में पड़े राजा के दुखों को पल भर में दूर कर दिया था। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति अभिजीत मुहूर्त में मशीनों की पूजा करने के बाद यह आरती गाता है, उसके मन की सारी दुविधाएं दूर हो जाती हैं। उसे अटल शांति मिलती है और व्यापार में सुख-संपत्ति का वास होता है।

आज के दौर में जो लोग कामकाजी हैं, फैक्ट्रियों में काम करते हैं या किसी भी तरह के निर्माण, व्यापार या तकनीकी कार्य से जुड़े हैं, वे अपने सुनहरे भविष्य और काम में सफलता के लिए विश्वकर्मा जी की पूजा पूरी श्रद्धा से करते हैं। इस अवसर पर उनकी चालीसा का पाठ भी विशेष फलदायी माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

विश्वकर्मा जी के प्रमुख निर्माण कौन-कौन से हैं?
विश्वकर्मा जी ने स्वर्ग, लंका, द्वारका और इंद्रप्रस्थ जैसे दिव्य नगरों का निर्माण किया था।
विश्वकर्मा पूजा में कौन-कौन सी वस्तुओं की पूजा की जाती है?
मशीनें, औजार, कंप्यूटर और वाहन सफाई के साथ पूजा के लिए तैयार किए जाते हैं।
आधुनिक युग में विशवकर्मा पूजा का महत्व क्या है?
कामकाजी लोग, फैक्ट्री कर्मचारी और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोग काम में सफलता के लिए पूजा करते हैं।

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Published17 सितंबर 2026, 19:43 IST IST
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