17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा और कन्या संक्रांति मनाई जाएगी
दिनमान 12 घंटे 17 मिनट, सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6:07 से शाम 7:53 तक रहेगा
17 सितंबर 2026 को विश्वकर्मा पूजा और कन्या संक्रांति मनाई जाएगी, जो शिल्पकारों और तकनीकी कर्मियों के लिए महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग सुबह 6:07 बजे से शाम 7:53 बजे तक रहेंगे, जिससे पूजा और धार्मिक अनुष्ठान के लिए शुभ समय माना जाता है।
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17 सितंबर 2026, गुरुवार को विश्वकर्मा पूजा और कन्या संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन का दिनमान करीब 12 घंटे 17 मिनट और रात्रिमान लगभग 11 घंटे 43 मिनट रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6 बजकर 7 मिनट से शाम 7 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।
17 सितंबर भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि सुबह 10:47 बजे तक रहेगी, इसके बाद शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि शुरू होगी। अनुराधा नक्षत्र शाम करीब 7:50 बजे तक रहेगा, फिर ज्येष्ठा नक्षत्र का प्रवेश होगा। सूर्य सिंह राशि में स्थित हैं और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं। दिन के दौरान विष्कंभ योग दोपहर 12:48 बजे तक रहेगा, उसके बाद प्रीति योग शुरू होगा।
इस दिन सूर्य का उदय सुबह 6:07 बजे और सूर्यास्त शाम 6:24 बजे होगा। चंद्रमा का उदय सुबह 11:57 बजे और चन्द्रास्त रात 10:07 बजे होगा। पंचांग के अनुसार आज का दिन मशीन, औजार, निर्माण, इंजीनियरिंग, शिल्प और तकनीकी कार्यों से जुड़े लोगों के लिए विशेष माना जाता है।
विशेष रूप से 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा का आयोजन किया जाता है, जो शिल्पकारों और तकनीकी कर्मियों के लिए महत्वपूर्ण है। इस दिन कन्या संक्रांति भी मनाई जाती है, जब सूर्य सिंह राशि से कन्या राशि में प्रवेश करता है। सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग सुबह 6:07 बजे से शाम 7:53 बजे तक रहेंगे, जो पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए शुभ समय माना जाता है।
स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा के शुभ मुहूर्तों का पालन करना चाहिए। इस दिन गुरुवार व्रत का भी संयोग बनता है, जो धार्मिक महत्व को और बढ़ाता है।
पंचांग गणना के अनुसार वर्ज्य काल, गण्ड मूल, विडाल योग, नेत्रम, होमाहुति, अग्निवास, राहु वास, कुम्भ चक्र, भद्रावास और शिववास की स्थिति भी दिन के अनुसार निर्धारित होती है। इनका ध्यान धार्मिक क्रियाओं में रखा जाता है।
इस प्रकार 17 सितंबर का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखता है, जो पूजा, व्रत और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- विश्वकर्मा पूजा का धार्मिक महत्व क्या है?
- यह पूजा शिल्पकारों और तकनीकी कर्मियों के लिए विशेष महत्व रखती है और उन्हें सम्मानित करती है।
- कन्या संक्रांति कब होती है?
- कन्या संक्रांति तब होती है जब सूर्य सिंह राशि से कन्या राशि में प्रवेश करता है।
- पूजा के शुभ मुहूर्त कैसे तय होते हैं?
- स्थानीय पंचांग के अनुसार वर्ज्य काल, गण्ड मूल, विडाल योग सहित अन्य ज्योतिषीय गणनाओं से मुहूर्त निर्धारित होते हैं।
- इस दिन कौन-कौन से योग सक्रिय रहते हैं?
- दिन में विष्कंभ योग दोपहर 12:48 बजे तक और उसके बाद प्रीति योग सक्रिय होता है।
- गुरुवार व्रत का क्या महत्व है?
- गुरुवार व्रत का संयोग पूजा के धार्मिक महत्व को और बढ़ाता है।
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