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फर्जी ST सर्टिफिकेट पर 30 साल नौकरी, सुप्रीम कोर्ट ने रिटायरमेंट लाभ दिए

मुंबई के जूनियर इंजीनियर को फर्जी प्रमाण पत्र के बावजूद पेंशन और रिटायरमेंट के फायदे मिलेंगे

सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र के आधार पर मुंबई नगर निगम में नौकरी करने वाले जूनियर सिविल इंजीनियर को रिटायरमेंट और पेंशन से जुड़े सभी लाभ देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने 30 जून 2025 को रिटायर हुए कर्मचारी को सेवा से वंचित न करने का फैसला सुनाया।
AI सार

सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र के आधार पर मुंबई नगर निगम में 30 साल नौकरी करने वाले जूनियर सिविल इंजीनियर शिरीष पी पाटिल को रिटायरमेंट और पेंशन के सभी लाभ देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में न तो पाटिल और न ही उनके परिवार को अमान्य प्रमाण पत्र के आधार पर कोई लाभ मिलेगा।

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मुंबई में सुप्रीम कोर्ट का फैसला
मुंबई में सुप्रीम कोर्ट का फैसला / सोशल मीडिया

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 सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र के आधार पर मुंबई नगर निगम में नौकरी करने वाले जूनियर सिविल इंजीनियर को रिटायरमेंट और पेंशन से जुड़े सभी लाभ देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने 30 जून 2025 को रिटायर हुए कर्मचारी को सेवा से वंचित न करने का फैसला सुनाया।

मामले का इतिहास

शिरीष पी पाटिल ने 1984 में खुद को 'टोकरे कोली' अनुसूचित जनजाति समुदाय का बताकर प्रमाण पत्र हासिल किया था। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर 1994 में उन्हें मुंबई नगर निगम में जूनियर सिविल इंजीनियर के पद पर नियुक्ति मिली। बाद में मूल प्रमाण पत्र खोने का दावा करते हुए उन्होंने वर्ष 2000 में नया प्रमाण पत्र भुसावल के उप-विभागीय मजिस्ट्रेट से बनवाया।

एमसीजीएम की जांच में पता चला कि पाटिल के पूर्वज 'कोली', 'हिंदू कोली' और 'हिंदू सूर्यवंशी कोली' श्रेणी में थे, जो एसटी वर्ग में नहीं आते। जुलाई 2009 में उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, लेकिन वे वकीलों और परिजनों की अनुपलब्धता का हवाला देकर जनवरी 2020 तक जांच टालते रहे।

अंततः 2020 में जांच समिति ने उनका प्रमाण पत्र रद्द कर दिया, जिसे हाई कोर्ट ने भी सही ठहराया। इसके बावजूद पाटिल ने 30 जून 2025 तक सेवा जारी रखी और उसी दिन सेवानिवृत्त हुए।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने सुनवाई की। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए पाटिल को उनके रिटायरमेंट और पेंशन से जुड़े सभी लाभ देने का आदेश दिया।

कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता ने 1994 में सेवा शुरू की और 30 जून 2025 तक तीन दशकों से अधिक समय तक सेवा में रहा। इसलिए उसे सेवानिवृत्ति लाभों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न तो अपीलकर्ता और न ही उनके परिवार के किसी सदस्य को अमान्य प्रमाण पत्र के आधार पर भविष्य में कोई लाभ मिलेगा। यह आदेश न्यायसंगत और मामले की परिस्थितियों के अनुरूप है।

"मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए हम यह सुनिश्चित करना उचित समझते हैं कि अपीलकर्ता को उसके रिटायरमेंट और पेंशन से जुड़े फायदों से वंचित न किया जाए।"

सुप्रीम कोर्ट, जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

एमसीजीएम की जांच में क्या पाया गया?
जांच में पता चला कि पाटिल के पूर्वज एसटी वर्ग में नहीं आते और उनका प्रमाण पत्र फर्जी था।
सुप्रीम कोर्ट ने पाटिल को किन लाभों से वंचित नहीं किया?
सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें रिटायरमेंट और पेंशन से जुड़े सभी लाभ देने का आदेश दिया।
क्या परिवार के किसी सदस्य को भविष्य में लाभ मिलेगा?
न तो अपीलकर्ता के परिवार के किसी सदस्य को अमान्य प्रमाण पत्र के आधार पर भविष्य में कोई लाभ मिलेगा।

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Published5 सितंबर 2026, 18:43 IST IST
Last updated5 सितंबर 2026, 18:43 IST IST
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