उदयपुर में 50 दिव्यांग जोड़ों ने सात फेरे लिए
नारायण सेवा संस्थान के 22 वर्षों में 2,582 विवाह कराए, दिव्यांगों को सम्मान की जरूरत
उदयपुर में नारायण सेवा संस्थान के 47वें सामूहिक विवाह समारोह में 50 दिव्यांग जोड़ों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सात फेरे लिए। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में नवदंपतियों को दैनिक उपयोग की सामग्री और सहायक उपकरण भी प्रदान किए गए। संस्थान का उद्देश्य दिव्यांगों को दया नहीं, बल्कि सम्मान और अवसर देना है।
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उदयपुर। उदयपुर में नारायण सेवा संस्थान के 47वें सामूहिक विवाह समारोह में 50 दिव्यांग जोड़ों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सात फेरे लिए। संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि पिछले 22 वर्षों में इस संस्थान के माध्यम से 2,582 दिव्यांग युवक-युवतियों के विवाह संपन्न कराए जा चुके हैं।
समारोह 19 और 20 सितंबर को आयोजित हुआ, जिसमें वरमाला, वैदिक विवाह संस्कार, महिला संगीत, भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और विदाई जैसे कार्यक्रम शामिल थे। विवाह स्थल पर पूरे समय उत्सव और उल्लास का माहौल रहा। कई वर-वधू ऐसे थे, जिनका नारायण सेवा संस्थान में पहले निःशुल्क उपचार, ऑपरेशन, कृत्रिम अंग या सहायक उपकरण के माध्यम से पुनर्वास हुआ था। अब वे उसी संस्थान के परिसर में जीवनसाथी का हाथ थामकर नई गृहस्थी की ओर बढ़े।
उन्होंने यह भी कहा कि दिव्यांगजनों को दया नहीं, बल्कि सम्मान और अवसर की जरूरत है।
इस समारोह में ऐसे जोड़े भी थे, जिनमें एक साथी दिव्यांग और दूसरा सक्षम युवक-युवती था। उन्होंने सामाजिक सोच से ऊपर उठकर एक-दूसरे का साथ चुना। विवाह के दौरान उनकी पहचान उनकी दिव्यांगता से नहीं, बल्कि दूल्हा-दुल्हन के रूप में थी।
विवाह के बाद नवदंपतियों को नई गृहस्थी शुरू करने के लिए पलंग, गद्दा, बिस्तर, अलमारी, गैस चूल्हा-सिलेंडर, किचन सेट, प्रेशर कुकर, तवा-कढ़ाई, पंखा, सिलाई मशीन, ट्रॉली बैग सहित दैनिक उपयोग की सामग्री दी गई। जरूरत के अनुसार व्हीलचेयर और अन्य सहायक उपकरण भी प्रदान किए गए।
दो दिवसीय समारोह के समापन पर संत-महात्माओं, समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों और देश-विदेश से आए अतिथियों ने नव दंपतियों को आशीर्वाद दिया। जोधपुर के स्वतंत्रता सेनानी परिवार की सुशीला परिहार को करुणा भाव और सेवा भावना के लिए सम्मानित किया गया।
संस्थान के संस्थापक कैलाश मानव, अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल, यश मेहता, पलक अग्रवाल, निदेशक वंदना अग्रवाल और सहसंस्थापिका कमला देवी अग्रवाल सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे। 50 जोड़ों की शादी के साथ समारोह ने यह संदेश दिया कि जीवन में परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण हों, साथ, सम्मान और अवसर मिले तो सपनों को नई उड़ान दी जा सकती है।
देश में करीब 2.61 करोड़ दिव्यांगजन हैं, जो समाज का अहम हिस्सा हैं। नारायण सेवा संस्थान का मकसद दिव्यांगों को दया नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षित भविष्य देना है। यह केवल शादी का आयोजन नहीं है, बल्कि दिव्यांगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की एक बड़ी कोशिश है।
दिव्यांगजनों को अक्सर उनकी क्षमताओं के बजाय उनकी दिव्यांगता के आधार पर देखा जाता है।
प्रशांत अग्रवाल, अध्यक्ष
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- नारायण सेवा संस्थान का उद्देश्य क्या है?
- संस्थान दिव्यांगों को दया नहीं, सम्मान और सुरक्षित भविष्य देना चाहता है।
- विवाह समारोह में क्या-क्या गतिविधियां शामिल थीं?
- वरमाला, वैदिक विवाह संस्कार, महिला संगीत, भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और विदाई कार्यक्रम हुए।
- क्या सभी जोड़े दोनों दिव्यांग थे?
- कुछ जोड़ों में एक साथी दिव्यांग और दूसरा सक्षम युवक या युवती था।
- विवाह के बाद नवदंपतियों को कौन-कौन से सामान मिले?
- उन्हें पलंग, गैस चूल्हा, सिलाई मशीन, व्हीलचेयर समेत कई दैनिक उपयोग की वस्तुएं दी गईं।
- उदयन सेवा संस्थान के संस्थापक कौन हैं?
- संस्थान के संस्थापक कैलाश मानव हैं।
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