राजस्थान के ज़िलों की 6 खबरें — भरतपुर: भरतपुर में अग्रसेन जयंती पर नौ दिवसीय कार्यक्रमों की रूपरेखा तय
करौली: करौली के भांकरी गांव में 500 साल पुराना महर्षि वेदव्यास मंदिर | उदयपुर: उदयपुर के मार्बल हैंडीक्राफ्ट्स में दिखती है राजस्थान की पारंपरिक कला | जालोर: जालोर में 56 वैरायटी के मोदक, कीमत 480 रुपए किलो से शुरू | अलवर: अलवर के पांडुपोल में हनुमान मेले में हजारों श्रद्धालु पहुंचे | कोटा: कोटा में
भरतपुर में महाराजा अग्रसेन जयंती पर नौ दिवसीय सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम 4 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक आयोजित किए जाएंगे। करौली के भांकरी गांव में लगभग 500 साल पुराना महर्षि वेदव्यास मंदिर है, जो स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है।
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राजस्थान। राजस्थान के अलग-अलग ज़िलों से ताज़ा खबरें एक जगह — भरतपुर: भरतपुर में अग्रसेन जयंती पर नौ दिवसीय कार्यक्रमों की रूपरेखा तय; करौली: करौली के भांकरी गांव में 500 साल पुराना महर्षि वेदव्यास मंदिर; उदयपुर: उदयपुर के मार्बल हैंडीक्राफ्ट्स में दिखती है राजस्थान की पारंपरिक कला; जालोर: जालोर में 56 वैरायटी के मोदक, कीमत 480 रुपए किलो से शुरू; अलवर: अलवर के पांडुपोल में हनुमान मेले में हजारों श्रद्धालु पहुंचे; कोटा: कोटा में नेहरू पार्क की गंदगी और खराब सफाई से लोग परेशान.
भरतपुर: भरतपुर में अग्रसेन जयंती पर नौ दिवसीय कार्यक्रमों की रूपरेखा तय
भरतपुर में महाराजा अग्रसेन शोभायात्रा समिति ने अग्रवाल भवन में साधारण सभा की बैठक कर अग्रसेन जयंती के अवसर पर नौ दिवसीय कार्यक्रमों की तैयारियों को अंतिम रूप दिया। समिति ने 4 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया।
बैठक में समिति के अध्यक्ष ने बताया कि 4 अक्टूबर को अग्रवाल चेतना बाइक रैली होगी। 5 अक्टूबर को डांडिया नृत्य का आयोजन किया जाएगा। 6 अक्टूबर को अपना घर आश्रम में भोजन प्रसादी का आयोजन होगा। 8 अक्टूबर को अग्रवाल भवन में निशुल्क मल्टीस्पेशलिटी चिकित्सा शिविर लगाया जाएगा।
11 अक्टूबर को सुबह 8.30 बजे जयंती महोत्सव का आयोजन होगा और शाम 4.30 बजे कला मंदिर स्कूल से शोभायात्रा निकाली जाएगी। 12 अक्टूबर को भजन संध्या, गौरव सम्मान और सहभोज का आयोजन होगा। 20 अक्टूबर को नई मंडी प्रांगण में रावण दहन और मंचन रखा गया है।
करौली: करौली के भांकरी गांव में 500 साल पुराना महर्षि वेदव्यास मंदिर
राजस्थान के करौली जिले के भांकरी गांव में स्थित महर्षि वेदव्यास का लगभग 500 वर्ष पुराना मंदिर स्थानीय आस्था का केंद्र है। इसे ‘बड़ा मंदिर’ कहा जाता है और यह वेदों के उच्चारण के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है। मंदिर की स्थापना गांव के व्यास परिवारों ने करीब पांच शताब्दी पहले कराई थी।
मंदिर में महर्षि वेदव्यास की लगभग तीन फीट ऊंची अष्टधातु की प्रतिमा स्थापित है। इसके साथ ही संकट मोचन हनुमान की प्रतिमा भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जयपुर, दिल्ली, अलवर सहित दूर-दराज के इलाकों से भी श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं।
मंदिर की निर्माण शैली अनूठी है। इसमें लाल पत्थर के सात से आठ इंच मोटे बड़े टुकड़ों का इस्तेमाल हुआ है, जिन्हें बिना चूना और बजरी के जोड़ा गया है। सदियों पुरानी यह संरचना आज भी अपनी मजबूती बनाए हुए है और स्थापत्य कला की झलक दिखाती है।
मंदिर में सामान्य दिनों के अलावा पूर्णिमा और प्रमुख त्योहारों पर विशेष पूजा-अर्चना होती है। पुजारी राधेश्याम शर्मा के अनुसार, महर्षि वेदव्यास को खीर-पूड़ी, हलवा, लड्डू और पंचमेवा का भोग लगाया जाता है। सुबह और शाम झालर बजाकर पूजा की जाती है, जिससे मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल बना रहता है।
स्थानीय निवासी जनार्दन उपाध्याय ने बताया कि मंदिर की स्थापना व्यास परिवारों ने मिलकर की थी। मान्यता है कि महर्षि वेदव्यास ने वेदों को व्यवस्थित कर आम लोगों के लिए समझने योग्य बनाया था। महाभारत और श्रीमद्भागवत जैसे धार्मिक ग्रंथों से उनका नाम जुड़ा है। मंदिर में वेदों के उच्चारण से संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
उदयपुर: उदयपुर के मार्बल हैंडीक्राफ्ट्स में दिखती है राजस्थान की पारंपरिक कला
राजस्थान के उदयपुर शहर की खूबसूरत झीलों और महलों के साथ मार्बल हैंडीक्राफ्ट्स भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। यहां के कारीगर मार्बल को बारीक नक्काशी और डिजाइन के साथ सजावटी वस्तुओं में बदलते हैं, जो देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों में लोकप्रिय हैं।
उदयपुर में मार्बल का उपयोग केवल मंदिरों और भवनों तक सीमित नहीं है। स्थानीय कारीगर इस सख्त पत्थर को अलग-अलग आकार और कलात्मक आकृतियों में ढालकर सजावटी सामान बनाते हैं। इन वस्तुओं में मार्बल के वास, टेबल डेकोरेटिव आइटम, शोपीस, घड़ियां और मीनाकारी वाले पीस शामिल हैं।
मार्बल की प्राकृतिक चमक और हाथों की बारीक कारीगरी इन्हें खास बनाती है। पर्यटक इन्हें घर की सजावट या गिफ्ट के रूप में खरीदते हैं। मार्बल हैंडीक्राफ्ट्स की वैरायटी और पारंपरिक लुक राजस्थान की समृद्ध कला की झलक दिखाते हैं।
देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इन्हें स्मृति चिह्न के रूप में अपने साथ ले जाते हैं। विदेशी पर्यटकों के बीच भी ये सजावटी चीजें आकर्षण का केंद्र हैं। त्योहारों और खास मौकों पर गिफ्टिंग के लिए भी मार्बल हैंडीक्राफ्ट्स की मांग बढ़ी है।
छोटे आकार के डेकोरेटिव पीस आसानी से पैक होकर पर्यटकों के लिए पसंदीदा विकल्प बन जाते हैं। उदयपुर की पहचान अब केवल झीलों और ऐतिहासिक इमारतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मार्बल की बेजोड़ कारीगरी इसे देश-दुनिया में पहचान दिला रही है।
जालोर: जालोर में 56 वैरायटी के मोदक, कीमत 480 रुपए किलो से शुरू
जालोर की गुप्ता स्वीट शॉप पर गणेश महोत्सव के मौके पर मोदक की मांग बढ़ गई है। यहां मावा, काजू, ड्राइफ्रूट, चॉकलेट और गोल्डन वर्क वाले मोदक सहित कुल 56 अलग-अलग वैरायटी तैयार की जा रही हैं। मोदक की कीमत 480 रुपए प्रति किलो से शुरू होती है।
यहां मोदक न केवल पारंपरिक स्वादों में मिलते हैं, बल्कि कुछ नए फ्लेवर और डिजाइन में भी उपलब्ध हैं। ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार वैरायटी चुन सकते हैं।
मोदक को सिर्फ प्रसाद के तौर पर नहीं, बल्कि गणेश प्रतिमाओं की सजावट के लिए बड़े आकार में भी तैयार किया जा रहा है। बड़े मोदक गणेश प्रतिमाओं की सजावट में आकर्षण बढ़ाते हैं।
कुछ मोदकों पर सुनहरी सजावट यानी गोल्डन वर्क भी किया गया है, जो इन्हें सामान्य मोदकों से अलग बनाता है। इस तरह स्वाद के साथ-साथ मोदकों के लुक और प्रस्तुति पर भी खास ध्यान दिया गया है।
गणेश महोत्सव के दौरान मोदक की ये वैरायटी ग्राहकों के लिए खास आकर्षण बनी हुई हैं, जो एक ही जगह पर कई विकल्प उपलब्ध कराती हैं।
अलवर: अलवर के पांडुपोल में हनुमान मेले में हजारों श्रद्धालु पहुंचे
अलवर जिले के पांडुपोल हनुमान मंदिर में मंगलवार को भव्य मेला लगा। सुबह से शाम तक करीब 8 से 10 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। उमरी तिराहा तक करीब 80 रोडवेज बसें चलीं, जिनमें से श्रद्धालुओं ने मंदिर तक पहुंचकर दर्शन किए।
पांडुपोल हनुमान मंदिर को मेले के अवसर पर फूल-मालाओं से सजाया गया था। मंदिर में हनुमान जी महाराज की प्रतिमा का विशेष शृंगार किया गया। दर्शन करने आए श्रद्धालु कुछ देर मंदिर में रुककर दरबार को निहारते नजर आए।
अलवर, सरिस्का गेट, टहला और राजगढ़ से बसों का संचालन किया गया। निजी वाहनों और बाइक को आगे जाने की अनुमति नहीं दी गई। अलवर से उमरी तिराहा तक बस किराया 35 रुपए रखा गया, जबकि सरिस्का गेट और टहला गेट से 11 रुपए प्रति व्यक्ति किराया था।
श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला सुबह 5 बजे शुरू हुआ और शाम 5 बजे तक जारी रहा। उमरी तिराहा तक बसों के पहुंचने से श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में सुविधा हुई।
कोटा: कोटा में नेहरू पार्क की गंदगी और खराब सफाई से लोग परेशान
कोटा के नेहरू पार्क में सफाई की कमी और गंदगी के कारण लोग परेशान हैं। नगर निगम आयुक्त और जिला कलेक्टर के निवास स्थान के पास बने इस पार्क में साफ-सफाई का अभाव है, जिससे यहां आने वाले लोगों को दिक्कत हो रही है। कई मोहल्लों में खराब रोड लाइट और जाम नालियों की समस्या भी बनी हुई है।
नगर निगम क्षेत्र के कई इलाकों में सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। नेहरू पार्क में कचरा जमा होने से बच्चे खेलने और बुजुर्ग टहलने में असुविधा महसूस कर रहे हैं। कुन्हाड़ी क्षेत्र के महाराणा प्रताप सर्किल के पास नालियों में कचरा फंसा होने से गंदा पानी जमा है, जिससे मच्छर और मक्खी पनप रही हैं। इससे मौसमी संक्रमण का खतरा बना हुआ है।
माला रोड और कोटा जंक्शन के आसपास सफाई कर्मचारी नियमित रूप से नहीं आ रहे हैं और कचरा उठाने वाली गाड़ियां कई दिनों से अनुपस्थित हैं। कई मोहल्लों में रोड लाइट खराब होने से अंधेरा रहता है, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है। शिव नगर और रंगबाड़ी क्षेत्र में खराब रोड लाइट को शिकायत के बाद ठीक किया गया है।
दैनिक भास्कर के 'भास्कर समाधान' सेगमेंट के जरिए लोग अपनी समस्याएं सीधे विभागों और अधिकारियों तक पहुंचा रहे हैं। अधिकारियों ने भी इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिकायतों का समाधान करना शुरू कर दिया है। शिकायतकर्ता को एप के जरिए समाधान की जानकारी दी जाती है और अधिकारी जरूरत पड़ने पर कॉल भी कर सकते हैं।
हालांकि कई जगहों पर सफाई और रोड लाइट की समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। नगर निगम और संबंधित विभागों को इन समस्याओं का स्थायी समाधान करना होगा ताकि जनता को राहत मिल सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- अग्रसेन जयंती के कार्यक्रमों में कौन-कौन से प्रमुख आयोजन होंगे?
- अग्रसेन जयंती में बाइक रैली, डांडिया नृत्य, निशुल्क चिकित्सा शिविर, शोभायात्रा, भजन संध्या और रावण दहन जैसे कई सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम शामिल होंगे।
- महर्षि वेदव्यास मंदिर की खास विशेषता क्या है?
- मंदिर में लाल पत्थर के बड़े टुकड़ों का उपयोग बिना चूना और बजरी के जोड़ा गया है, जो इसे स्थापत्य कला में अनूठा बनाता है और इसकी संरचना सदियों से मजबूत बनी हुई है।
- उदयपुर के मार्बल हैंडीक्राफ्ट्स क्यों प्रसिद्ध हैं?
- उदयपुर के कारीगर मार्बल को बारीक नक्काशी और डिजाइन के साथ सजावटी वस्तुओं में बदलते हैं, जो देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हैं और पारंपरिक राजस्थानी कला को दर्शाते हैं।
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