अमित शाह की अध्यक्षता में 6 राज्यों ने किशाऊ परियोजना पर एमओयू किया
नई दिल्ली में हुई बैठक में राजस्थान सहित छह राज्यों ने बहुउद्देशीय बांध परियोजना के लिए समझौता किया
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में छह राज्यों ने नई दिल्ली में किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना पर एमओयू पर हस्ताक्षर किए। यह परियोजना राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा को पेयजल, सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन का अवसर प्रदान करेगी। परियोजना के तहत जल संसाधन साझा किए जाएंगे और इसका संचालन किशाऊ कॉरपोरेशन लिमिटेड करेगा।
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नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में मंगलवार को छह राज्यों के बीच किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। इस परियोजना से राजस्थान सहित अन्य राज्यों को पेयजल, सिंचाई और विकास के नए अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस योजना को प्रदेश के लिए बड़ी सौगात बताया।
परियोजना का महत्व और लाभ
किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना यमुना की सहायक टोंस नदी पर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर प्रस्तावित है। करीब 15,000 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली इस परियोजना से 660 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन होगा। इससे राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा लाभान्वित होंगे।
परियोजना के तहत हिमाचल प्रदेश के जल हिस्से का 95 प्रतिशत भाग दिल्ली और राजस्थान को मिलेगा, जिसमें राजस्थान की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत है। शेष 5 प्रतिशत हिस्सा हिमाचल प्रदेश के स्थानीय उपयोग के लिए रहेगा। जल घटक की 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार वहन करेगी और शेष 10 प्रतिशत भागीदार राज्यों द्वारा दिया जाएगा।
परियोजना से प्राप्त जल शेखावाटी क्षेत्र की जल आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस जल का उपयोग पेयजल, सिंचाई और अन्य हितकारी उपयोगों के लिए किया जाएगा। शेखावाटी के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु तीन भूमिगत पाइपलाइन प्रणालियों के माध्यम से पानी हरियाणा के ताजेवाला से चूरू तक पहुंचाया जाएगा। इससे सीकर, चूरू, झुंझुनू और आसपास के क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ेगी।
यह परियोजना शेखावाटी के सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और स्वास्थ्य मानकों में सुधार की आधारभूमि तैयार करेगी और क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं खोलेगी। बेहतर जल उपलब्धता के साथ बेहतर सड़क और हवाई कनेक्टिविटी, पर्यटन एवं विरासत संरक्षण से रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ेंगे।
समझौते और हस्ताक्षर
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित बैठक में छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने किशाऊ परियोजना के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का एमओयू के लिए आभार जताया।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में हुए इस समझौते पर राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने हस्ताक्षर किए। परियोजना के निर्माण, संचालन एवं रख-रखाव की जिम्मेदारी किशाऊ कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा निभाई जाएगी और इसकी निगरानी अपर यमुना बेसिन से संबंधित व्यवस्था के तहत होगी।
वर्ष 1994 में पांच राज्यों के बीच संपन्न यमुना जल समझौते के तहत राजस्थान को मानसून अवधि में 1917 क्यूसेक जल आवंटित किया गया था, लेकिन जल प्रवाह प्रणाली उपलब्ध न होने के कारण पिछले 32 वर्षों से राजस्थान को इसका लाभ नहीं मिल पाया। किशाऊ परियोजना के संशोधित एमओयू से इस जल व्यवस्था को मजबूत आधार मिलेगा।
संशोधित समझौते में राजस्थान के हितों को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है.
भजनलाल शर्मा, मुख्यमंत्री
इस योजना से पेयजल, सिंचाई और विकास के नए अवसर सृजित होंगे.
भजनलाल शर्मा, मुख्यमंत्री
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- किशाऊ परियोजना की निगरानी और संचालन कौन करेगा?
- परियोजना के निर्माण, संचालन एवं रख-रखाव की जिम्मेदारी किशाऊ कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा निभाई जाएगी, तथा इसकी निगरानी अपर यमुना बेसिन से संबंधित व्यवस्था के तहत होगी।
- शेखावाटी क्षेत्र में जल कैसे पहुंचाया जाएगा?
- जल तीन भूमिगत पाइपलाइन प्रणालियों के माध्यम से हरियाणा के ताजेवाला से चूरू तक पहुंचाया जाएगा, जिससे सीकर, चूरू, झुंझुनू और आसपास के क्षेत्रों की जल उपलब्धता बढ़ेगी।
- किशाऊ परियोजना का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव क्या होगा?
- यह परियोजना शेखावाटी क्षेत्र के सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और स्वास्थ्य मानकों में सुधार करेगी और क्षेत्र में बेहतर सड़क, हवाई कनेक्टिविटी, पर्यटन एवं विरासत संरक्षण से रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ाएगी।
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