बीजेपी ने 10,235 वार्डों में 4,179 वार्ड जीते, कांग्रेस 3,613 पर सिमटी
राज्य के 302 निकायों में भाजपा ने 198 अध्यक्ष पद हासिल किए, कांग्रेस 94 पर सीमित
राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में बीजेपी ने 10,235 वार्डों में से 4,179 वार्डों और 198 अध्यक्ष पदों पर कब्जा किया है, जबकि कांग्रेस के खाते में 3,613 वार्ड और 94 अध्यक्ष पद आए हैं। पांच नगर निगमों में बीजेपी ने चार पर जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस केवल बीकानेर में सफल रही है। भाजपा ने कई निगमों में मेयर पद निर्दलीय समर्थन से हासिल किए हैं और कुल 302 निकायों में से दो-तिहाई अध्यक्ष पद जीते हैं।
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जयपुर। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा ने 10,235 घोषित वार्डों में से 4,179 वार्डों पर जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस के खाते में 3,613 वार्ड आए हैं। 302 निकायों में से भाजपा ने 198 अध्यक्ष पदों पर कब्जा जमाया है, जो दो-तिहाई से अधिक हैं।
राजस्थान के निकाय चुनाव में भाजपा ने मेयर, सभापति और पालिकाध्यक्षों के चुनाव में कांग्रेस से बढ़त बनाई है। दोपहर ढाई बजे तक आए 200 निकायों के चुनाव परिणामों में भाजपा ने 136 निकायों पर और कांग्रेस ने 59 निकायों पर कब्जा जमा लिया था। तीन निकायों में निर्दलीय और एक-एक में माकपा तथा आम आदमी पार्टी ने जीत हासिल की।
आज घोषित पांच नगर निगमों में भाजपा ने उदयपुर, अजमेर, पाली और अलवर पर कब्जा किया है। कांग्रेस केवल बीकानेर नगर निगम में ही बोर्ड बना पाई है। भीलवाड़ा और भरतपुर में भाजपा के प्रत्याशी निर्विरोध महापौर चुने जा चुके हैं।
जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर, भरतपुर, पाली, अलवर और भीलवाड़ा जैसे प्रमुख नगर निगमों में से आठ के परिणाम आ चुके हैं। बीकानेर को छोड़कर बाकी चार निगमों पर भाजपा काबिज हो गई है। जयपुर, जोधपुर और कोटा में महापौर का चुनाव 25 सितंबर को होगा।
इन तीन निगमों के आठ वार्डों में ईवीएम की तकनीकी खामी के कारण पुनर्मतदान हुआ था, इसलिए महापौर चुनाव चार दिन बाद होगा। सुकेत नगरपालिका के एक वार्ड में भी पुनर्मतदान हुआ है, जहां पालिकाध्यक्ष का चुनाव भी 25 सितंबर को होगा।
भरतपुर और भीलवाड़ा के अलावा 30 अन्य निकायों में भी निकाय प्रमुख पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं। भाजपा ने चार नगर निगमों में महापौर बनाए, जिनमें केवल उदयपुर में बहुमत था। कांग्रेस के पास केवल बीकानेर में बहुमत था।
पाली, अजमेर और अलवर में कांग्रेस पार्षदों की संख्या अधिक होने के बावजूद भाजपा ने निर्दलीय पार्षदों का समर्थन लेकर मेयर पद पर कब्जा किया। भाजपा की रणनीति ने कांग्रेस की बढ़त वाले निगमों में भी जीत सुनिश्चित की।
पाली नगर निगम में कांग्रेस के 29 पार्षद होने के बावजूद उसके मेयर उम्मीदवार को केवल तीन वोट मिले। अजमेर में कांग्रेस ने अपने पार्षदों की बाड़ाबंदी कर्नाटक में की, लेकिन मेयर पद नहीं जीत सकी।
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार अब तक 302 नगरीय निकायों में अध्यक्ष पद के परिणाम घोषित हो चुके हैं। भाजपा ने 198 अध्यक्ष पद जीते हैं, जबकि कांग्रेस के खाते में 94 पद आए हैं। निर्दलीयों ने सात निकायों में अध्यक्ष पद हासिल किया है। आम आदमी पार्टी, माकपा और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने भी एक-एक निकाय में अध्यक्ष पद जीता है।
भाजपा के खाते में दो-तिहाई से अधिक अध्यक्ष पद आए हैं, जो निकायों की कमान पर उसकी मजबूत पकड़ दिखाता है। कांग्रेस पूरी तरह बिखरी हुई है और वह 100 निकायों के आंकड़े तक भी नहीं पहुंच पाई है।
स्थानीय निकाय चुनाव के जो परिणाम सामने आए हैं, उनमें राजस्थान की जागरूक जनता ने बीजेपी को आशीर्वाद दिया है।
मदन राठौड़
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मदन राठौड़
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- निकाय चुनाव के महापौर चुनाव कब होंगे?
- जयपुर, जोधपुर और कोटा में महापौर चुनाव 25 सितंबर को होंगे, क्योंकि कुछ वार्डों में पुनर्मतदान हुआ है।
- भीलवाड़ा और भरतपुर में महापौर कैसे चुने गए?
- भीलवाड़ा और भरतपुर में भाजपा के प्रत्याशी निर्विरोध महापौर चुने गए हैं।
- निर्दलीयों और अन्य पार्टियों ने कितने अध्यक्ष पद जीते?
- निर्दलीयों ने सात, आम आदमी पार्टी, माकपा और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने एक-एक अध्यक्ष पद जीता है।
- भाजपा ने कांग्रेस की बढ़त वाले निगमों में जीत कैसे सुनिश्चित की?
- भाजपा ने निर्दलीय पार्षदों का समर्थन लेकर मेयर पद पर कब्जा किया, जिससे कांग्रेस की बढ़त वाली जगहों पर भी जीत मिली।
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