झुंझुनूं में कांग्रेस की बड़ी जीत, भाजपा 8 निकायों में सिमटी
राज्य के 19 निकायों में कांग्रेस ने 10 अध्यक्ष पद जीते, भाजपा को 8 पर सफलता
सोमवार को 18 निकायों में अध्यक्ष पद के परिणाम घोषित किए गए, जबकि खेतड़ी में भाज
झुंझुनूं में हुए नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस ने 10 निकायों में अध्यक्ष पद जीते जबकि भाजपा 8 निकायों में सीमित रही। विधानसभाओं के परिसीमन के कारण भाजपा को मुस्लिम बहुल इलाकों में फायदा हुआ, जबकि कांग्रेस ने कुछ क्षेत्रों में बढ़त बनाई। चुनाव परिणामों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी कुछ निकायों में जीत दर्ज की।
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जयपुर। राजस्थान के झुंझुनूं जिले में हुए नगर निकाय चुनाव के परिणाम में कांग्रेस ने 10 निकायों में अध्यक्ष पद हासिल किए हैं, जबकि भाजपा 8 निकायों में सीमित रही। एक निर्दलीय प्रत्याशी ने भी सूरजगढ़ में अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की।
सोमवार को 18 निकायों में अध्यक्ष पद के परिणाम घोषित किए गए, जबकि खेतड़ी में भाजपा की गीता देवी पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुकी थीं।
तीन निकायों में दोनों प्रमुख दलों के वोट बराबर रहने पर लॉटरी के जरिए अध्यक्ष का फैसला किया गया। खेतड़ी में भाजपा की गीता देवी पहले ही निर्विरोध निर्वाचित थीं।
झुंझुनूं नगर परिषद के सभापति पद पर कांग्रेस के अब्दुल्ला गुलाम नबी अगवान ने 35 वोट पाकर भाजपा प्रत्याशी को 25 वोटों से हराया। बिसाऊ में कांग्रेस की सलमा ने भाजपा प्रत्याशी को एक वोट से पराजित किया।
बराबरी के बाद लॉटरी से भाजपा की मंजूबाला, राकेश कुमार शर्मा और पवन कुमार को अध्यक्ष पद मिला। मुकुंदगढ़ में कांग्रेस के सत्यनारायण सैनी को 15 वोट मिले, जबकि पिलानी में भाजपा के नगेंद्र कुमार ने निर्दलीय को एक वोट के अंतर से हराया।
प्रदेश में हुए नगर निकाय चुनाव में भाजपा ने सर्वाधिक वार्ड जीतकर बड़ी बढ़त बनाई है। खासतौर पर मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों में भाजपा की बढ़त देखी गई है, जिसमें जयपुर की हवामहल, किशनपोल, चूरू, पुष्कर, रामगढ़, मसूदा, कामां, बृज नगर, नागौर, सवाई माधोपुर, फतेहपुर, लाडपुरा, पोकरण और तिजारा शामिल हैं।
हालांकि, मकराना, फतेहपुर और आदर्श नगर विधानसभा सीटों में कांग्रेस की बढ़त रही। आदर्श नगर के 17 वार्डों में से 10 वार्ड कांग्रेस ने जीते। फतेहपुर के 55 वार्डों में भाजपा 13, कांग्रेस 21 और निर्दलीय 21 वार्डों में विजयी रहे। कांग्रेस का दावा है कि अधिकांश निर्दलीय पार्षद कांग्रेस समर्थित हैं।
राजनीतिक विश्लेषक मनीष गोधा ने बताया कि परिसीमन के कारण भाजपा को मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों में फायदा मिला है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने निकाय परिसीमन करते हुए अल्पसंख्यक बहुल इलाकों को एक साथ रखा था, जिससे कांग्रेस को लाभ मिला। इस बार भाजपा सरकार ने वार्डों का परिसीमन इस तरह किया कि किसी एक धर्म के मतदाताओं की संख्या अधिक न हो।
मनीष गोधा ने कहा, "परिसीमन में भाजपा ने कांग्रेस के मतदाताओं वाले वार्डों को बड़ा और अपने वोट बैंक के वार्डों को छोटा किया। इसलिए कांग्रेस को वोट ज्यादा मिले, लेकिन भाजपा के वार्ड ज्यादा चुने गए।"
कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेशाध्यक्ष एमडी चौपदार ने कहा कि निकाय चुनाव में संगठन को तवज्जो नहीं दी गई। टिकट और प्रत्याशी चयन में ब्लॉक अध्यक्षों और जिलाध्यक्षों को नहीं पूछा गया। प्रदेश नेतृत्व ने विधायकों को फ्री हैंड दिया, जिसका नुकसान पार्टी को उठाना पड़ा। गुटबाजी और खींचतान के कारण भाजपा को फायदा हुआ क्योंकि टिकट नहीं मिलने से कांग्रेस के कार्यकर्ता नाराज होकर चुनाव मैदान में उतरे।
चौपदार ने कहा, "मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों में भाजपा ने सेंधमारी की है। पार्टी को संगठन को टिकट वितरण में महत्व देना चाहिए।"
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- खेतड़ी में भाजपा की गीता देवी का चुनाव परिणाम क्या रहा?
- गीता देवी पहले ही निर्विरोध निर्वाचित थीं, अतः उन्हें वोटिंग की आवश्यकता नहीं पड़ी।
- नगर परिषद के सभापति पद पर कांग्रेस ने कैसे जीत हासिल की?
- अब्दुल्ला गुलाम नबी अगवान ने 35 वोट पाकर भाजपा के प्रत्याशी को 25 वोटों से मारा।
- परिसीमन का चुनाव परिणामों पर क्या प्रभाव पड़ा?
- परिसीमन से भाजपा को मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों में फायदा हुआ, क्योंकि वार्डों का आकार बदला गया।
- भाजपा ने किन विधानसभा इलाकों में बढ़त बनाई है?
- जयपुर की हवामहल, किशनपोल, चूरू, पुष्कर, रामगढ़, मसूदा, कामां, बृज नगर, नागौर, सवाई माधोपुर, फतेहपुर, लाडपुरा, पोकरण और तिजारा में भाजपा ने बढ़त हासिल की।
- कांग्रेस ने टिकट वितरण में किन समस्याओं का सामना किया?
- प्रदेश नेतृत्व ने विधायकों को फ्री हैंड दिया, जिससे ब्लॉक और जिलाध्यक्षों की भूमिका कमजोर हुई और गुटबाजी बढ़ी।
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