जयपुर में कांग्रेस को मेयर चुनाव में शिकस्त, बीकानेर में मिली जीत
वार्डों में बढ़त के बावजूद कांग्रेस ने मेयर की कुर्सी नहीं जीती, बीकानेर में साफ बहुमत से मिली सफलता
जयपुर में कांग्रेस ने मेयर पद नहीं जीता जबकि बीकानेर में उसे स्पष्ट बहुमत के साथ मेयर पद प्राप्त हुआ। कई नगर निगमों में भाजपा ने निर्दलीयों का समर्थन लेकर मेयर पदों पर कब्जा किया। कांग्रेस ने कुछ जगह पार्षदों की बढ़त के बावजूद मेयर चुनाव में हार का सामना किया।
AI-निर्मित सार · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
जयपुर। राजस्थान के निकाय चुनाव में जयपुर में कांग्रेस ने पार्षदों की बढ़त के बावजूद मेयर पद नहीं जीता। बीकानेर में कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत के साथ मेयर की कुर्सी हासिल की। प्रदेश के कई नगर निगमों में भाजपा ने निर्दलीयों का समर्थन लेकर मेयर पद पर कब्ज़ा जमाया।
निकाय चुनाव के पहले चरण में कांग्रेस ने कई नगर निगमों में भाजपा को कड़ी चुनौती दी और कुछ जगह सबसे बड़ी पार्टी बनी। लेकिन मेयर और सभापति के चुनाव में बहुमत जुटाने, निर्दलीयों को साथ लेने और फ्लोर मैनेजमेंट की परीक्षा में कांग्रेस पिछड़ गई।
अजमेर में कांग्रेस ने 37 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद भी मेयर पद नहीं जीता। भाजपा के 32 पार्षद और 11 निर्दलीय थे। मेयर बनने के लिए बहुमत का आंकड़ा 41 था, लेकिन कांग्रेस को केवल चार अतिरिक्त वोटों की जरूरत थी। भाजपा ने सभी 11 निर्दलीयों का समर्थन हासिल कर 43 वोट जुटाए, जबकि कांग्रेस 37 वोटों पर सिमट गई। कांग्रेस ने निर्दलीयों को अपने साथ नहीं जोड़ सकी।
पाली नगर निगम में कांग्रेस के 29 वार्ड जीतने के बावजूद 26 पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग की। भाजपा के 21 और निर्दलीयों के 15 पार्षद थे। कांग्रेस को मेयर बनाने के लिए चार वोट चाहिए थे, लेकिन निर्दलीय राजबाला हिंगड़ ने भाजपा का समर्थन किया। कांग्रेस को अपने पार्षदों से भी पर्याप्त वोट नहीं मिले और उसकी उम्मीदवार को केवल तीन वोट मिले।
बीकानेर में कांग्रेस ने 80 सदस्यीय निगम में 42 पार्षदों के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल किया। पूर्व मंत्री बीडी कल्ला की रणनीति सफल रही और उनके भतीजे अनिल कल्ला को मेयर चुना गया। यहां कांग्रेस ने अपनी वार्ड जीत को मेयर की कुर्सी तक पहुंचाया।
कांग्रेस के प्रमुख नेताओं अशोक गहलोत, गोविंद डोटासरा और टीकाराम जूली ने सरकार पर पुलिस और प्रशासन का दुरुपयोग करने के आरोप लगाए हैं। गोविंद डोटासरा ने कहा कि हार के कारणों की समीक्षा की जाएगी और गड़बड़ी करने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। टीकाराम जूली ने कुछ स्थानों पर कांग्रेस पार्षदों पर दबाव और पुलिस कार्रवाई के आरोप लगाए हैं।
आज के नतीजे केवल भाजपा की जीत और कांग्रेस की हार नहीं हैं, बल्कि स्थानीय राजनीति में फ्लोर मैनेजमेंट, निर्दलीयों की भूमिका और नेतृत्व की ताकत को भी दर्शाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- बीकानेर में कांग्रेस की जीत कैसे संभव हुई?
- पूर्व मंत्री बीडी कल्ला की रणनीति के तहत कांग्रेस ने 80 सदस्यीय निगम में 42 पार्षदों के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल किया।
- पाली नगर निगम में कांग्रेस की हार का कारण क्या था?
- पाली में कांग्रेस के कई पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग की और निर्दलीय पार्षद राजबाला हिंगड़ ने भाजपा का समर्थन किया।
- कांग्रेस नेताओं ने चुनाव हार के बाद क्या कहा?
- अशोक गहलोत, गोविंद डोटासरा और टीकाराम जूली ने चुनाव में पुलिस और प्रशासन के दुरुपयोग के आरोप लगाए और हार की समीक्षा की बात कही।
AI-निर्मित · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
50 free articles left today
0 of 50 free reads used today.
पाठकों की पसंद






Comments
0 threadsNo approved comments yet. Start the discussion.